Rasulullah menyerahkan kebun Khaibar kepada penduduknya untuk digarap dengan biaya mereka sendiri, dengan bagian separuh dari hasilnya
Imam Muslim : 2897و حَدَّثَنِي عَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ السَّعْدِيُّ حَدَّثَنَا عَلِيٌّ وَهُوَ ابْنُ مُسْهِرٍ أَخْبَرَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ عَنْ نَافِعٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ قَالَ أَعْطَى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ خَيْبَرَ بِشَطْرِ مَا يَخْرُجُ مِنْ ثَمَرٍ أَوْ زَرْعٍ فَكَانَ يُعْطِي أَزْوَاجَهُ كُلَّ سَنَةٍ مِائَةَ وَسْقٍ ثَمَانِينَ وَسْقًا مِنْ تَمْرٍ وَعِشْرِينَ وَسْقًا مِنْ شَعِيرٍ فَلَمَّا وَلِيَ عُمَرُ قَسَمَ خَيْبَرَ خَيَّرَ أَزْوَاجَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ يُقْطِعَ لَهُنَّ الْأَرْضَ وَالْمَاءَ أَوْ يَضْمَنَ لَهُنَّ الْأَوْسَاقَ كُلَّ عَامٍ فَاخْتَلَفْنَ فَمِنْهُنَّ مَنْ اخْتَارَ الْأَرْضَ وَالْمَاءَ وَمِنْهُنَّ مَنْ اخْتَارَ الْأَوْسَاقَ كُلَّ عَامٍ فَكَانَتْ عَائِشَةُ وَحَفْصَةُ مِمَّنْ اخْتَارَتَا الْأَرْضَ وَالْمَاءَ و حَدَّثَنَا ابْنُ نُمَيْرٍ حَدَّثَنَا أَبِي حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ حَدَّثَنِي نَافِعٌ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَامَلَ أَهْلَ خَيْبَرَ بِشَطْرِ مَا خَرَجَ مِنْهَا مِنْ زَرْعٍ أَوْ ثَمَرٍ وَاقْتَصَّ الْحَدِيثَ بِنَحْوِ حَدِيثِ عَلِيِّ بْنِ مُسْهِرٍ وَلَمْ يَذْكُرْ فَكَانَتْ عَائِشَةُ وَحَفْصَةُ مِمَّنْ اخْتَارَتَا الْأَرْضَ وَالْمَاءَ وَقَالَ خَيَّرَ أَزْوَاجَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ يُقْطِعَ لَهُنَّ الْأَرْضَ وَلَمْ يَذْكُرْ الْمَاءَ و حَدَّثَنِي أَبُو الطَّاهِرِ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ وَهْبٍ أَخْبَرَنِي أُسَامَةُ بْنُ زَيْدٍ اللَّيْثِيُّ عَنْ نَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ قَالَ لَمَّا افْتُتِحَتْ خَيْبَرُ سَأَلَتْ يَهُودُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ يُقِرَّهُمْ فِيهَا عَلَى أَنْ يَعْمَلُوا عَلَى نِصْفِ مَا خَرَجَ مِنْهَا مِنْ الثَّمَرِ وَالزَّرْعِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أُقِرُّكُمْ فِيهَا عَلَى ذَلِكَ مَا شِئْنَا ثُمَّ سَاقَ الْحَدِيثَ بِنَحْوِ حَدِيثِ ابْنِ نُمَيْرٍ وَابْنِ مُسْهِرٍ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ وَزَادَ فِيهِ وَكَانَ الثَّمَرُ يُقْسَمُ عَلَى السُّهْمَانِ مِنْ نِصْفِ خَيْبَرَ فَيَأْخُذُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْخُمْسَ
हमसे कहिन है [अली बिन हुजर अस सादी] हमसे कहिन हैं [अली यानी इब्न मुशीर] हमसे ['उबैदुल्लाह] [नफी'] से [इब्न उमर] से कहिन हैं; 'पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम एक बार खैबर के लोगन का उनके द्वारा पैदा कीन गए कुछ पौधा या पौधा से पुरस्कृत किहिन। फिर हर साल अपनी पत्नियन का सौ वसाक अर्थात् अस्सी वसाक औ बीस गेहूँ बाँटत रहें। जब उमर बिन खठथब सत्ता में आए तो खैबर के जमीन बंटने लगी। उमर ने पैगम्बर के पत्नियन, सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का एक विकल्प दिहिन कि का उ जमीन अऊर पानी प्राप्त करै चाहत हैं या हर साल भोजन के सामान्य वसक हिस्सा प्राप्त करत रहैं। ओनमा से कुछ लोग जमीन अऊर पानी के वितरण का चुनत हैं, जबकि कुछ लोग हर साल सामान्य आवंटन का चुनत हैं। यहि मामला मा, ऐसिया अऊर हफशाह ने जमीन अऊर पानी के विभाजन का चुना। हमसे कहिन [इब्न नुमीर] हमसे कहिन हैं [मेरे पिता] हमसे कहिन हैं [उबैदुल्लाह] हमसे [अब्दुल्लाह बिन उमर] से कहिन हैं कि रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बार खैबर के लोगन का कुछ फसलन से मजदूरी के साथ काम पर लगावत रहें या फल जवन उ उगावत रहें फिर उ अली के हदीस के रूप मा जारी रखिन... मुशीर, अऊर लफाज़ का जिक्र नाहीं किहिन; उधर जमीन पानी के बंटवारे के लिए वोट देय वालेन मा 'ऐसियाह अऊर हफशाह भी शामिल रहे। अऊर मोका बतावा है [अबू थाहिर] हमसे कहिस है [अब्दुल्लाह बिन वहब] मोका [उसामाह बिन जैद अल लैत्सी] से [नफी'] से [अब्दुल्लाह बिन उमर] बताइस है; 'जब खैबर पर विजय प्राप्त कीन गै, तौ यहूदी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से विनती किहिन कि ओनका आधा फसल या पैदा कीन गा फल के मजदूरी के लिए धान के खेतन अऊर खेतन मा काम करै के लिए वहिके अनुमति दीन जाय'। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जवाब दिया: 'हम आपका निर्धारित समय सीमा तक रहे के अनुमति देत हैं'। फिर उ उबैदुल्लाह से इब्न नुमीर अऊर इब्न मुशीर के हदीस के तरह हदीस का अतिरिक्त लफाज़ के साथ जारी रखिन; अऊर खैबर घनिमा के फसल से आधा फल बांटा गा रहा, अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक-पांचवां हिस्सा लिहिन।'