Rasulullah menyerahkan kebun Khaibar kepada penduduknya untuk digarap dengan biaya mereka sendiri, dengan bagian separuh dari hasilnya
Imam Muslim : 2896
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ حَنْبَلٍ وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ وَاللَّفْظُ لِزُهَيْرٍ قَالَا حَدَّثَنَا يَحْيَى وَهُوَ الْقَطَّانُ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ أَخْبَرَنِي نَافِعٌ عَنْ ابْنِ عُمَرَ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَامَلَ أَهْلَ خَيْبَرَ بِشَطْرِ مَا يَخْرُجُ مِنْهَا مِنْ ثَمَرٍ أَوْ زَرْعٍ
हमका [अहमद बिन हनबल] अऊर [जुहैर बिन हरब] से कहिन है जबकि [जुहैर] से अनुवाद दुइनौ कहिन; हमका [यह्या यानी अल कथ्थान] ['उबैदिल्लाह] से [इब्न उमर] से बतावा गा है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बार खैबर के लोगन का आंशिक रूप से ओनके द्वारा लगाए गए फल या पौधन से मजदूरी के साथ काम पर रखत रहें।