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Turunnya Al Lahab(111): 1. Binasalah kedua tangan Abu Lahab dan sesungguhnya dia akan binasa
Imam Muslim : 307و حَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ مُحَمَّدُ بْنُ الْعَلَاءِ حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ عَمْرِو بْنِ مُرَّةَ عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ لَمَّا نَزَلَتْ هَذِهِ الْآيَةُ { وَأَنْذِرْ عَشِيرَتَكَ الْأَقْرَبِينَ } وَرَهْطَكَ مِنْهُمْ الْمُخْلَصِينَ خَرَجَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَتَّى صَعِدَ الصَّفَا فَهَتَفَ يَا صَبَاحَاهْ فَقَالُوا مَنْ هَذَا الَّذِي يَهْتِفُ قَالُوا مُحَمَّدٌ فَاجْتَمَعُوا إِلَيْهِ فَقَالَ يَا بَنِي فُلَانٍ يَا بَنِي فُلَانٍ يَا بَنِي فُلَانٍ يَا بَنِي عَبْدِ مَنَافٍ يَا بَنِي عَبْدِ الْمُطَّلِبِ فَاجْتَمَعُوا إِلَيْهِ فَقَالَ أَرَأَيْتَكُمْ لَوْ أَخْبَرْتُكُمْ أَنَّ خَيْلًا تَخْرُجُ بِسَفْحِ هَذَا الْجَبَلِ أَكُنْتُمْ مُصَدِّقِيَّ قَالُوا مَا جَرَّبْنَا عَلَيْكَ كَذِبًا قَالَ فَإِنِّي نَذِيرٌ لَكُمْ بَيْنَ يَدَيْ عَذَابٍ شَدِيدٍ قَالَ فَقَالَ أَبُو لَهَبٍ تَبًّا لَكَ أَمَا جَمَعْتَنَا إِلَّا لِهَذَا ثُمَّ قَامَ فَنَزَلَتْ هَذِهِ السُّورَةُ تَبَّتْ يَدَا أَبِي لَهَبٍ وَقَدْ تَبَّ كَذَا قَرَأَ الْأَعْمَشُ إِلَى آخِرِ السُّورَةِ و حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَأَبُو كُرَيْبٍ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ عَنْ الْأَعْمَشِ بِهَذَا الْإِسْنَادِ قَالَ صَعِدَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ذَاتَ يَوْمٍ الصَّفَا فَقَالَ يَا صَبَاحَاهْ بِنَحْوِ حَدِيثِ أَبِي أُسَامَةَ وَلَمْ يَذْكُرْ نُزُولَ الْآيَةِ { وَأَنْذِرْ عَشِيرَتَكَ الْأَقْرَبِينَ }
अऊर हमसे कहिन है [अबू कुरैब मुहम्मद बिन अल-अला] हमसे [अबू उसामा] [अल-अमासी] से [अमरू बिन मुर्रा] से [सैद बिन जुबैर] से [इब्न अब्बास] से कहिन है, 'जब ई आयत प्रकट भै: '-अपने निकटतम रिश्तेदारन का चेतावनी दइ द्या, अर्थात् आपके सच्चे रिश्तेदार हैं -' अस्य स्यु'रा`: 214-। तौ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम बाहर आइन अऊर सोफ्फा पहाड़ी पर चढ़िन अऊर चिल्लाए मानो पुकारत होइहैं: 'हे दोस्तन'। कुछ लोग सोचत रहे कि कौन चिल्ला रहा है। ओनमा से कुछ जवाब दिहिन, 'मुहम्मद'। यहिसे उइ ओकरे पास इकट्ठा होय लागे। तब उ कहिन: 'हे बानी फुलान! बानी फुलान! बानी फुलान! हे बानू अब्दुल मनाफ! हे बानी अब्दुल मुत्तलिब! ' तौ सब ओकरे पास पहुँचे। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तब कहिन: 'अगर मैं तोहसे कहूं कि घुड़सवारन के एक दल तोहरे ऊपर हमला करै खातिर ई पहाड़ी के तलहटी से निकलि के निकली तौ तू का सोचिहौ। का तुम मोर बिसवास करिहौ? ' उइ जवाब दिहिन, 'हम तोहका झूठ बोलत नाहीं पाएन'। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फिर से कहा: "वास्तव में, मैं आपके लिए एक दर्दनाक सजा के धमकी भरी खबर ला रहा हूँ।" इब्न अब्बास ने कहा, 'अबू लहब ने डांट दिया, 'हाय तुम पर! का आप हमसे खाली ई बात सुनै खातिर इकट्ठा होय का कहत हौ-अर्थात कयामत के धमकी के खबर सुनावै खातिर-'। तब अबू लहब चले गये। त चिट्ठी नीचे आई: '-अबू लाहब के दुइनौ हाथ नष्ट होइ जइहैं, अऊर निश्चित रूप से ओका नुकसान होइ-' यहि तरह अल-अमासी चिट्ठी के अंत तक पढ़िन'। अऊर उ हमसे [अबू बकर बिन अबू सैयबा] कहिन अऊर [अबू कुरैब] कहिन, उ हमका [अबू मुआविया] से [अल-अमासी] से ई सनाद से कहिन। उ कहिन, 'अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक दिन शफा पर चढ़ि के कहिन, 'हे मोर दोस्तन', अबू उसामा के हदीस के अनुसार, अऊर उ आयत के प्रकाशन का जिक्र नाहीं किहिन, '-अपने सबसे करीबी रिश्तेदारन का चेतावनी दइ द्या-'।