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Hamzah memotong unta dan mengambil hatinya atas perintah Nabi SAW
Imam Bukhari : 2202حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ مُوسَى أَخْبَرَنَا هِشَامٌ أَنَّ ابْنَ جُرَيْجٍ أَخْبَرَهُمْ قَالَ أَخْبَرَنِي ابْنُ شِهَابٍ عَنْ عَلِيِّ بْنِ حُسَيْنِ بْنِ عَلِيٍّ عَنْ أَبِيهِ حُسَيْنِ بْنِ عَلِيٍّ عَنْ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمْ أَنَّهُ قَالَأَصَبْتُ شَارِفًا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي مَغْنَمٍ يَوْمَ بَدْرٍ قَالَ وَأَعْطَانِي رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ شَارِفًا أُخْرَى فَأَنَخْتُهُمَا يَوْمًا عِنْدَ بَابِ رَجُلٍ مِنْ الْأَنْصَارِ وَأَنَا أُرِيدُ أَنْ أَحْمِلَ عَلَيْهِمَا إِذْخِرًا لِأَبِيعَهُ وَمَعِي صَائِغٌ مِنْ بَنِي قَيْنُقَاعَ فَأَسْتَعِينَ بِهِ عَلَى وَلِيمَةِ فَاطِمَةَ وَحَمْزَةُ بْنُ عَبْدِ المُطَّلِبِ يَشْرَبُ فِي ذَلِكَ الْبَيْتِ مَعَهُ قَيْنَةٌ فَقَالَتْ أَلَا يَا حَمْزُ لِلشُّرُفِ النِّوَاءِفَثَارَ إِلَيْهِمَا حَمْزَةُ بِالسَّيْفِ فَجَبَّ أَسْنِمَتَهُمَا وَبَقَرَ خَوَاصِرَهُمَا ثُمَّ أَخَذَ مِنْ أَكْبَادِهِمَا قُلْتُ لِابْنِ شِهَابٍ وَمِنْ السَّنَامِ قَالَ قَدْ جَبَّ أَسْنِمَتَهُمَا فَذَهَبَ بِهَا قَالَ ابْنُ شِهَابٍ قَالَ عَلِيٌّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَنَظَرْتُ إِلَى مَنْظَرٍ أَفْظَعَنِي فَأَتَيْتُ نَبِيَّ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَعِنْدَهُ زَيْدُ بْنُ حَارِثَةَ فَأَخْبَرْتُهُ الْخَبَرَ فَخَرَجَ وَمَعَهُ زَيْدٌ فَانْطَلَقْتُ مَعَهُ فَدَخَلَ عَلَى حَمْزَةَ فَتَغَيَّظَ عَلَيْهِ فَرَفَعَ حَمْزَةُ بَصَرَهُ وَقَالَ هَلْ أَنْتُمْ إِلَّا عَبِيدٌ لِآبَائِي فَرَجَعَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُقَهْقِرُ حَتَّى خَرَجَ عَنْهُمْ وَذَلِكَ قَبْلَ تَحْرِيمِ الْخَمْرِ
हमसे कहिस है [इब्राहिम बिन मूसा] हमसे [हिशम] कहिस है कि [इब्न जुरैज] ने ओनसे कहा है, हमका [इब्न शिहाब] से [अली बिन हुसैन बिन अली] से [उनके पिता, हुसैन बिन अली] से [अली बिन अबी थोलिब] रादलियाहु अनहुम से कहिस है कि उ कहिस है, 'मेरे पास अल्लाह अलैहि के साथ एक अच्छा आयत है बदर के लड़ाई से घोनिमा के खजाने से वसल्लम। उ कहिन: 'अऊर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मोका एक अउर ऊँट दिहिन। एक दिन हम दुइनौ ऊंटन का एक अंसार के घर के दुआरे के सामने बाँध लिहेन जब हम चाहेन कि दुइनौ ऊंटन खातिर घास ढूँढै। मेरे साथ कैनुका जनजाति का एक सुनार रहा, जेसे हम फातिमा अऊर हमजाह बिन अब्दुल मुथोलिब के वलिमा -शादी के रिसेप्शन- के लिए मदद माँगिन, जेका उ घर मा पी रहा रहा। वहि समय उनके साथ एक गायक दास रहा जे गावत रहा- 'ई जवान ऊँट का सामना करै वाला बलवान कौन है'? त हमजा तलवार निकाल के प्रकट भवा, दुइनौ ऊंटन के कूबड़ का काट दिहिस, फिर ओनके पेट का काट दिहिस अऊर ओनके दिल लइ लिहिस।' हम इब्न शिहाब से पूछेन; 'का ई ओकरे कंधा से काटा गा रहा?' ऊ कहिस: ऊ आपन कूबड़ काट के लइ गवा है'। इब्न शैहाब ने कहा, अली रदलियाअल्लाहु अन्हू ने कहा: 'तब मैंने एक भयानक दर्शन देखा और फिर मैं पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मिला जो उस समय उनके साथ जैद बिन हरितसाह थे तो मैंने यह घटना बताई। तौ ऊ जैद के साथे बाहर आवा अऊर हमहूँ साथै आवा, फिर ऊ हमजा से मिला अऊर ऊ ओसे नाराज रहा। हमजा ने अपनी आँखें खोलीं अऊर कहिन: 'तुम अउर केहू नाहीं बल्कि मोर माता-पिता के गुलाम हौ'। तौ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम वापस गें अऊर ओनका छोड़ि के चले गें। ई घटना शराब के निषेध से पहिले के रही।