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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



- Makkah, Madinah dan tempat bersejarahnya Masjid Nabawi Bani Najjar, hargailah kebun kalian ini (lahan Masjid Nabawi)
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Bani Najjar, hargailah kebun kalian ini (lahan Masjid Nabawi)
Imam Nasa'i : 695

أَخْبَرَنَا عِمْرَانُ بْنُ مُوسَى قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَارِثِ عَنْ أَبِي التَّيَّاحِ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَلَمَّا قَدِمَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَزَلَ فِي عُرْضِ الْمَدِيِنَةِ فِي حَيٍّ يُقَالُ لَهُمْ بَنُو عَمْرِو بْنِ عَوْفٍ فَأَقَامَ فِيهِمْ أَرْبَعَ عَشْرَةَ لَيْلَةً ثُمَّ أَرْسَلَ إِلَى مَلَإٍ مِنْ بَنِي النَّجَّارِ فَجَاءُوا مُتَقَلِّدِي سُيُوفِهِمْ كَأَنِّي أَنْظُرُ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَى رَاحِلَتِهِ وَأَبُو بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ رَدِيفَهُ وَمَلَأٌ مِنْ بَنِي النَّجَّارِ حَوْلَهُ حَتَّى أَلْقَى بِفِنَاءِ أَبِي أَيُّوبَ وَكَانَ يُصَلِّي حَيْثُ أَدْرَكَتْهُ الصَّلَاةُ فَيُصَلِّي فِي مَرَابِضِ الْغَنَمِ ثُمَّ أَمَرَ بِالْمَسْجِدِ فَأَرْسَلَ إِلَى مَلَإٍ مِنْ بَنِي النَّجَّارِ فَجَاءُوا فَقَالَ يَا بَنِي النَّجَّارِ ثَامِنُونِي بِحَائِطِكُمْ هَذَا قَالُوا وَاللَّهِ لَا نَطْلُبُ ثَمَنَهُ إِلَّا إِلَى اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ قَالَ أَنَسٌ وَكَانَتْ فِيهِ قُبُورُ الْمُشْرِكِينَ وَكَانَتْ فِيهِ خَرِبٌ وَكَانَ فِيهِ نَخْلٌ فَأَمَرَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِقُبُورِ الْمُشْرِكِينَ فَنُبِشَتْ وَبِالنَّخْلِ فَقُطِعَتْ وَبِالْخَرِبِ فَسُوِّيَتْ فَصَفُّوا النَّخْلَ قِبْلَةَ الْمَسْجِدِ وَجَعَلُوا عِضَادَتَيْهِ الْحِجَارَةَ وَجَعَلُوا يَنْقُلُونَ الصَّخْرَ وَهُمْ يَرْتَجِزُونَ وَرَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَعَهُمْ وَهُمْ يَقُولُونَ اللَّهُمَّ لَا خَيْرَ إِلَّا خَيْرُ الْآخِرَةِفَانْصُرْ الْأَنْصَارَ وَالْمُهَاجِرَةَ

हमका सूचित किहिन हैं ['इमरान बिन मूसा] उ कहिन; हमका ['अब्दुल वारित्स] से [अबू अत-तय्याह] से [अनस बिन मलिक] से कहिन है, उ कहिन; अनस बिन मलिक, उ कहिन, 'जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मदीना आए, तौ उ बानी अमरू बिन औफ नामक गाँव के एक खेत मा रुके। वह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम चौदह दिन तक रहे। तब बानी नज्जर के अधिकारियन के लगे लोगन का भेजिन, तौ वै तलवार निकारि आइन। हम देखेन कि रसूलल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम अपने ऊँट पर सवार रहे अऊर अबू बकर रदलियाल्लाहुअन्हू उनके पीछे सवार रहे, जबकि बनी नज्जर के अधिकारी उनके आसपास रहे जब तक कि उ अबू अयूब के आँगन मा नाहीं पहुँचे, अऊर उ सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम जब भी नमाज का समय आवत रहा, उ नमाज पढ़त रहे। फिर उ सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम उ जगह पर नमाज पढ़िन जहाँ बकरी बंधी रहीं, अऊर उ मस्जिद बनावै का आदेश दिहिन। तब उन्होंने बनी नज्जर के अधिकारियों के पास लोग भेजे और वे आए, तब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उनसे कहा कि हे बनी नज्जर इस आँगन का भाव निर्धारित करो? ' उइ जवाब दिहिन, 'अल्लाह के कसम, हम इका अल्लाह अज्जा वा जल्ला के अलावा नाहीं बेचत हैं''। अनस ने कहा, 'पहिले वहि जगह पर मुश्रिकन के कब्र, इमारतन के खंडहर अऊर खजूर के पेड़ रहे। रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने मुश्रिकन के कब्रन का तोड़ै अऊर खजूर के पेड़न के आधार का काटै अऊर पहिले के इमारतन का समतल करै का आदेश दिहिन। फिर उ मस्जिद के किबला के दिशा मा एक खजूर के पेड़ अऊर मस्जिद के दुइ पत्थरन का एक बड़ा पत्थर बनाइन। उइ एक आयत गावत समय मेहनत से बड़े-बड़े पत्थरन का हिलावै लागे - जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ओनके साथे रहे - जेहिमा लिखा रहा: 'हे अल्लाह, परलोक के अच्छाई से बढ़िया कौनो अच्छाई नाहीं है। हे अल्लाह अंसार और मुहाजिरीन लोगो कि सहायता करो''।

Hadith Corroboration :

Imam Ahmad : 8594, 12731, 13072
Imam Bukhari : 410, 1735, 1964, 2564, 2567, 2571, 3639
Imam Muslim : 816
Imam Abu Dawud : 383
Imam Nasa'i : 695