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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
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- Malaikat Malaikat Jibril Malaikat jibril: lain-lain Mimpi Rasulullah tentang malaikat jibril dan mikail membawa beliau melihat siksaan di akhirat
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Mimpi Rasulullah tentang malaikat jibril dan mikail membawa beliau melihat siksaan di akhirat
Imam Bukhari : 1297

بَاب حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَاعِيلَ حَدَّثَنَا جَرِيرُ بْنُ حَازِمٍ حَدَّثَنَا أَبُو رَجَاءٍ عَنْ سَمُرَةَ بْنِ جُنْدَبٍ قَالَكَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا صَلَّى صَلَاةً أَقْبَلَ عَلَيْنَا بِوَجْهِهِ فَقَالَ مَنْ رَأَى مِنْكُمْ اللَّيْلَةَ رُؤْيَا قَالَ فَإِنْ رَأَى أَحَدٌ قَصَّهَا فَيَقُولُ مَا شَاءَ اللَّهُ فَسَأَلَنَا يَوْمًا فَقَالَ هَلْ رَأَى أَحَدٌ مِنْكُمْ رُؤْيَا قُلْنَا لَا قَالَ لَكِنِّي رَأَيْتُ اللَّيْلَةَ رَجُلَيْنِ أَتَيَانِي فَأَخَذَا بِيَدِي فَأَخْرَجَانِي إِلَى الْأَرْضِ الْمُقَدَّسَةِ فَإِذَا رَجُلٌ جَالِسٌ وَرَجُلٌ قَائِمٌ بِيَدِهِ كَلُّوبٌ مِنْ حَدِيدٍ قَالَ بَعْضُ أَصْحَابِنَا عَنْ مُوسَى إِنَّهُ يُدْخِلُ ذَلِكَ الْكَلُّوبَ فِي شِدْقِهِ حَتَّى يَبْلُغَ قَفَاهُ ثُمَّ يَفْعَلُ بِشِدْقِهِ الْآخَرِ مِثْلَ ذَلِكَ وَيَلْتَئِمُ شِدْقُهُ هَذَا فَيَعُودُ فَيَصْنَعُ مِثْلَهُ قُلْتُ مَا هَذَا قَالَا انْطَلِقْ فَانْطَلَقْنَا حَتَّى أَتَيْنَا عَلَى رَجُلٍ مُضْطَجِعٍ عَلَى قَفَاهُ وَرَجُلٌ قَائِمٌ عَلَى رَأْسِهِ بِفِهْرٍ أَوْ صَخْرَةٍ فَيَشْدَخُ بِهِ رَأْسَهُ فَإِذَا ضَرَبَهُ تَدَهْدَهَ الْحَجَرُ فَانْطَلَقَ إِلَيْهِ لِيَأْخُذَهُ فَلَا يَرْجِعُ إِلَى هَذَا حَتَّى يَلْتَئِمَ رَأْسُهُ وَعَادَ رَأْسُهُ كَمَا هُوَ فَعَادَ إِلَيْهِ فَضَرَبَهُ قُلْتُ مَنْ هَذَا قَالَا انْطَلِقْ فَانْطَلَقْنَا إِلَى ثَقْبٍ مِثْلِ التَّنُّورِ أَعْلَاهُ ضَيِّقٌ وَأَسْفَلُهُ وَاسِعٌ يَتَوَقَّدُ تَحْتَهُ نَارًا فَإِذَا اقْتَرَبَ ارْتَفَعُوا حَتَّى كَادَ أَنْ يَخْرُجُوا فَإِذَا خَمَدَتْ رَجَعُوا فِيهَا وَفِيهَا رِجَالٌ وَنِسَاءٌ عُرَاةٌ فَقُلْتُ مَنْ هَذَا قَالَا انْطَلِقْ فَانْطَلَقْنَا حَتَّى أَتَيْنَا عَلَى نَهَرٍ مِنْ دَمٍ فِيهِ رَجُلٌ قَائِمٌ عَلَى وَسَطِ النَّهَرِقَالَ يَزِيدُ وَوَهْبُ بْنُ جَرِيرٍ عَنْ جَرِيرِ بْنِ حَازِمٍ وَعَلَى شَطِّ النَّهَرِ رَجُلٌ بَيْنَ يَدَيْهِ حِجَارَةٌ فَأَقْبَلَ الرَّجُلُ الَّذِي فِي النَّهَرِ فَإِذَا أَرَادَ أَنْ يَخْرُجَ رَمَى الرَّجُلُ بِحَجَرٍ فِي فِيهِ فَرَدَّهُ حَيْثُ كَانَ فَجَعَلَ كُلَّمَا جَاءَ لِيَخْرُجَ رَمَى فِي فِيهِ بِحَجَرٍ فَيَرْجِعُ كَمَا كَانَ فَقُلْتُ مَا هَذَا قَالَا انْطَلِقْ فَانْطَلَقْنَا حَتَّى انْتَهَيْنَا إِلَى رَوْضَةٍ خَضْرَاءَ فِيهَا شَجَرَةٌ عَظِيمَةٌ وَفِي أَصْلِهَا شَيْخٌ وَصِبْيَانٌ وَإِذَا رَجُلٌ قَرِيبٌ مِنْ الشَّجَرَةِ بَيْنَ يَدَيْهِ نَارٌ يُوقِدُهَا فَصَعِدَا بِي فِي الشَّجَرَةِ وَأَدْخَلَانِي دَارًا لَمْ أَرَ قَطُّ أَحْسَنَ مِنْهَا فِيهَا رِجَالٌ شُيُوخٌ وَشَبَابٌ وَنِسَاءٌ وَصِبْيَانٌ ثُمَّ أَخْرَجَانِي مِنْهَا فَصَعِدَا بِي الشَّجَرَةَ فَأَدْخَلَانِي دَارًا هِيَ أَحْسَنُ وَأَفْضَلُ فِيهَا شُيُوخٌ وَشَبَابٌ قُلْتُ طَوَّفْتُمَانِي اللَّيْلَةَ فَأَخْبِرَانِي عَمَّا رَأَيْتُ قَالَا نَعَمْ أَمَّا الَّذِي رَأَيْتَهُ يُشَقُّ شِدْقُهُ فَكَذَّابٌ يُحَدِّثُ بِالْكَذْبَةِ فَتُحْمَلُ عَنْهُ حَتَّى تَبْلُغَ الْآفَاقَ فَيُصْنَعُ بِهِ إِلَى يَوْمِ الْقِيَامَةِ وَالَّذِي رَأَيْتَهُ يُشْدَخُ رَأْسُهُ فَرَجُلٌ عَلَّمَهُ اللَّهُ الْقُرْآنَ فَنَامَ عَنْهُ بِاللَّيْلِ وَلَمْ يَعْمَلْ فِيهِ بِالنَّهَارِ يُفْعَلُ بِهِ إِلَى يَوْمِ الْقِيَامَةِ وَالَّذِي رَأَيْتَهُ فِي الثَّقْبِ فَهُمْ الزُّنَاةُ وَالَّذِي رَأَيْتَهُ فِي النَّهَرِ آكِلُوا الرِّبَا وَالشَّيْخُ فِي أَصْلِ الشَّجَرَةِ إِبْرَاهِيمُ عَلَيْهِ السَّلَام وَالصِّبْيَانُ حَوْلَهُ فَأَوْلَادُ النَّاسِ وَالَّذِي يُوقِدُ النَّارَ مَالِكٌ خَازِنُ النَّارِ وَالدَّارُ الْأُولَى الَّتِي دَخَلْتَ دَارُ عَامَّةِ الْمُؤْمِنِينَ وَأَمَّا هَذِهِ الدَّارُ فَدَارُ الشُّهَدَاءِ وَأَنَا جِبْرِيلُ وَهَذَا مِيكَائِيلُ فَارْفَعْ رَأْسَكَ فَرَفَعْتُ رَأْسِي فَإِذَا فَوْقِي مِثْلُ السَّحَابِ قَالَا ذَاكَ مَنْزِلُكَ قُلْتُ دَعَانِي أَدْخُلْ مَنْزِلِي قَالَا إِنَّهُ بَقِيَ لَكَ عُمُرٌ لَمْ تَسْتَكْمِلْهُ فَلَوْ اسْتَكْمَلْتَ أَتَيْتَ مَنْزِلَكَ

हमसे कहिस है [मूसा बिन इस्माइल] हमसे कहिस है [जरीर बिन हाजिम] हमसे कहिस है [अबू राजा] से [समराह बिन जुंदब] कहिन; पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के ई आदत रही कि जब उ एक नमाज पढ़ के खतम करत रहे, त उ आपन मुँह हमरे तरफ घुमा के कहत रहे, 'तुममें से किसका कल रात सपना देखा रहा'। उ - समराह बिन जुंदब - कहिन,: 'अगर केहू का सपना अहै तौ उ मनई बताई, तब उ कहिन,: 'माँ स्या-अल्लाह' -अल्लाह के इच्छा से-'। एक अउर दिन उ हमसे पूछिन: 'का तुममें से केहू सपना देखत है?'। हम जवाब दिहेन: 'कुछौ नाहीं'। उ कहिन: 'लेकिन कल रात हमका एक सपना देखा कि दुइ मनई रहे जे हमरे पास आए अऊर दुइनौ जने हमार हाथ पकड़ लिहिन अऊर हमका एक पवित्र भूमि - अल मुकद्दासाह - पर ले गए, पता चला कि वहिमा एक आदमी खड़ा रहा अऊर दूसर बैठा रहा अऊर ओकरे हाथ मा एक मुड़ा छोर वाला लोहा के छड़ पकड़े रहा - आमतौर पर कुछ लटकावे के लिए -। हमरे कुछ दोस्तन ने मूसा से कहा कि: लोहे के छड़ का मुँह के एक तरफ - दाढ़ से - व्यक्ति के तब तक डाला जात रहा जब तक कि ई ओकरे गर्दन के नाक मा घुस न जाय। फिर मुँह के दूसरी तरफ भी वही काम करौ, फिर मुँह से निकाल के फिर से अंदर रखौ वगैरह वगैरह। हम पूछेन: 'यकर का मतलब है?'। लइके जाय वाले दुइ जने कहिन: 'जा'। तौ हम दूसर जगह गयेन अऊर एक मनई के पास पहुँचेन जउन आपन पीठ गर्दन पर रखि के पड़ा रहा, जबकि एक अउर मनई ओकरे माथा पर खड़ा रहा अऊर ओकरे माथा का कुचलै के लिए एक चट्टान या एक बड़ा चट्टान पकड़े रहा। जब मारा जात रहा, तौ पत्थर मनई के सिर का कुचल देत रहा, यहिसे मनई ओका उठावै के ताईं ओकरे पास पहुँचा अऊर जब तक मनई के सिर अपनी मूल अवस्था मा वापस नाइ आ जात रहा, तब तक ऊ ई काम करब बंद नाहीं करत रहा, फिर ऊ पत्थर से ओका फिर से मारत रहा जब तक कि ऊ चकनाचूर नाइ होइ जात रहा। हम पूछेन: 'ई कौन मनई है?'। दुइनौ जवाब दिहिन: 'जा'। यहिसे हम तब तक रवाना भये जब तक कि हम एक अग्नि गड्ढा जइसन छेद तक नाहीं पहुँचेन जहाँ ऊपर संकरी अऊर नीचे चौड़ा रहा अऊर नीचे एक आग जलाई जात रही, अगर आग का पास लाया जात रहा, तौ उ - कब्जा करै वाले - उठ जात रहें अऊर जब ई बुझा जात रहा तौ कब्जा करै वाले ओनके पास लौट जात रहें, कब्जा करै वाले पुरुषन अऊर मेहरारू से मिलके बनत रहें। हम पूछेन: 'वे कौन हैं?'। दुइनौ जवाब दिहिन: 'जा'। तौ हम तब तक रवाना भए जब तक हम एक नदी के पास नाहीं पहुँचेन जेकर पानी खून रहा, नदी के बीच मा एक मनई खड़ा रहा'। कहिन, [यजीद] अऊर [वहब बिन जरीर] [जरीर बिन हाजिम] से: 'अऊर नदी के किनारे एक मनई रहा जे पत्थर पकड़े रहा। जब नदी के बीच वाला मनई ओकर सामना करत रहा अऊर नदी से बाहर निकलै का इरादा करत रहा, तौ पत्थर पकड़े वाला मनई ओकरे मुँह के ओर पत्थर तब तक फेंकत रहा जब तक कि उ नदी के बीच मा अपने मूल स्थान पर लौट न आवा, अऊर यहि तरह, हर बार जब उ नदी से बाहर निकलै चाहत रहा, तौ ओका पत्थर से फेंक दीन जात रहा ताकि उ अपने मूल स्थान पर लौट आ जाय। हम पूछेन: 'यकर का मतलब है?' दुइनौ जवाब दिहिन: 'जा'। त हम तब तक रवाना भये जब तक हम एक हरे बगीचे मा नाहीं आ गयेन, उ बड़े पेड़न से भरा रहा जबकि नीचे एक बूढ़ा आदमी अऊर एक बच्चा रहा अऊर एक मनई रहा जवन पेड़ के पास रहा जे आग पकड़े रहा, जब उ आग जलाइस तौ दुई मनई जे मोका ऊपर उठाइन मोका पेड़ पर चढ़ै खातिर लइ गें फिर दुइनौ जने मोका एक घर मा रखिन - एक गाँव - जेहिका हम पहिले कबो नाहीं देखे रहेन अऊर वहिमा बुजुर्ग मनई रहे लोग, जवान लोग, औरत अऊर बच्चा फिर उ दुइनौ मोका वहिजा से निकारिन अऊर फिर मोका फिर से उठा लिहिन। एक पेड़ पर चढ़ा, फिर मोका एक बेहतर अऊर सुंदर घर मा रखा, जेहिमा बूढ़ अऊर जवान लोग रहे। हम कहेन: 'आज रात हमका इधर-उधर ले जा अऊर बतावा कि हम पहिले का देखेन'। तौ दुइनौ जने कहिन: 'ठीक है। हुंवा हय इहाँ तक कि जेकरे मुँह मा आप लोहा छेदा देखत हई उ झूठ बोलै का पसंद करत है अऊर अगर उ हमेशा झूठ बोलत है, तौ ओका उफुक मा लइ जावा जात है अऊर फिर क़ियामत के दिन तक ओके साथे वइसने व्यवहार कीन जात है। जेकरे सिर का आपने तोड़त देखिन ऊ अइसन मनई रहा जेका अल्लाह कुरान सिखाइन रहा अऊर फिर उ एक रात सोवा रहा लेकिन दिन मा कुरान के अभ्यास नाहीं किहिस, फिर क़ियामत के दिन तक ओकरे साथे अइसने व्यवहार कीन गा रहा। और ज्वलंत भट्ठी में आप जो लोग देखते हैं वे व्यभिचारी हैं, जबकि बीच नदी में आप जो लोग देखते हैं वे सूद खाने वाले हैं', जबकि पेड़ के नीचे बूढ़ा आदमी पैगम्बर इब्राहिम 'अलेहिसलाम है, जबकि उनके आस पास के बच्चे छोटे-छोटे इंसान के बच्चे हैं। आग जलाने वाला व्यक्ति नरक का संरक्षक देवदूत है, जबकि पहले घर में आप घुसते हैं वह सब आस्थावानों का घर है, जबकि यह घर शहीदों का गाँव है और मैं जिबरील हूं और यह मिकाइल है, तो अपना माथा उठाओ। तौ हम आपन माथा उठायेन अऊर पायेन कि हमार माथा के ऊपर बादल जइसन कुछ रहा। दुइनौ जने कहिन,: 'वहि तोहार जगह है'। हम कहेन: 'हमका अपने घर मा घुसय दे'। दुइनौ जने कहिन: 'तुम्हार जीवन अबहियों बचा अहै अऊर खतम नाहीं भवा अहै अऊर जब समय खतम होइ जाई तौ तुम निश्चित रूप से अपने घर मा घुसि जइहौ'।

Hadith Corroboration :


Imam Ahmad : 19306
Imam Bukhari : 1297