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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



- Jihad dan Perang Adab dalam Peperangan Nabi membakar dan menebang kebun kurma Bani An-Nadhir di Al-Buwairah
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Nabi membakar dan menebang kebun kurma Bani An-Nadhir di Al-Buwairah
Imam Tirmidzi : 1472

حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ حَدَّثَنَا اللَّيْثُ عَنْ نَافِعٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَرَّقَ نَخْلَ بَنِي النَّضِيرِ وَقَطَعَ وَهِيَ الْبُوَيْرَةُ فَأَنْزَلَ اللَّهُ{ مَا قَطَعْتُمْ مِنْ لِينَةٍ أَوْ تَرَكْتُمُوهَا قَائِمَةً عَلَى أُصُولِهَا فَبِإِذْنِ اللَّهِ وَلِيُخْزِيَ الْفَاسِقِينَ }وَفِي الْبَاب عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ وَهَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَقَدْ ذَهَبَ قَوْمٌ مِنْ أَهْلِ الْعِلْمِ إِلَى هَذَا وَلَمْ يَرَوْا بَأْسًا بِقَطْعِ الْأَشْجَارِ وَتَخْرِيبِ الْحُصُونِ وَكَرِهَ بَعْضُهُمْ ذَلِكَ وَهُوَ قَوْلُ الْأَوْزَاعِيِّ قَالَ الْأَوْزَاعِيُّ وَنَهَى أَبُو بَكْرٍ الصِّدِّيقُ أَنْ يَقْطَعَ شَجَرًا مُثْمِرًا أَوْ يُخَرِّبَ عَامِرًا وَعَمِلَ بِذَلِكَ الْمُسْلِمُونَ بَعْدَهُ و قَالَ الشَّافِعِيُّ لَا بَأْسَ بِالتَّحْرِيقِ فِي أَرْضِ الْعَدُوِّ وَقَطْعِ الْأَشْجَارِ وَالثِّمَارِ و قَالَ أَحْمَدُ وَقَدْ تَكُونُ فِي مَوَاضِعَ لَا يَجِدُونَ مِنْهُ بُدًّا فَأَمَّا بِالْعَبَثِ فَلَا تُحَرَّقْ و قَالَ إِسْحَقُ التَّحْرِيقُ سُنَّةٌ إِذَا كَانَ أَنْكَى فِيهِمْ

हमका [कुतैबा] बतावा गा है, हमका [अल लैट्स] [नफी'] से [इब्न उमर] बतावा गा है, 'कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने बनी नधीर से संबंधित खजूर के बागान का काट के जला दिहिस, ठीक बुवैरा क्षेत्र मा। त अल्लाह ने आपन आयत प्रकट किहिन: '-तुम खजूर के पेड़ से - जवन काफिरन के हो - का काटत हौ - या जेका तुम ओकरे पेड़ पर खड़ा होइके उगै देत हौ, तौ - उ सब - अल्लाह के इजाजत से है; अऊर काहे से कि उ दुष्टन का अपमान लावै चाहत है-' -प्रश्न। अल हसीर: 5-इ अध्याय मा इब्न अब्बास से एक समान हदीस है। ई हदीस हसन प्रामाणिक है। कुछ विद्वान ई हदीस का पालन करत हैं, अऊर ओनका खजूर के पेड़न का काटै अऊर किलन का नष्ट करै के अनुमति से कौनो दिक्कत नाहीं है। हालांकि, दूसर लोग यहिके पुष्टि करत हैं, अऊर ई अल औजाई के राय है। अल औज़ाई ने कहा, 'अबू बकर ऐश शिद्दीक ने फल दे रहे या इमारतों को नष्ट कर रहे पेड़ों को काटने से मना किया, और उनके बाद के मुसलमान भी अबू बकर ऐश शिद्दीक के तरह किहिन'। इमाम शफी कहिन, 'दुश्मन के इलाका मा फल देय वाले पेड़न का जलावै अऊर काटै ठीक है'। इमाम अहमद कहिन, 'कुछ मामलन मा अइसन करब ठीक है, लेकिन अगर ई बर्बादी करत है तौ ओका जलावै ठीक नाहीं है'। इधर, इशाक कहिन, 'अगर ईका जलावै से दुश्मन का नुकसान होइ सकत है तौ ई सुन्नत है'।

Hadith Corroboration :

Imam Ahmad : 4304, 4890, 5262, 5325
Imam Bukhari : 2158, 2798, 3727, 3728, 4505
Imam Muslim : 3284, 3285, 3286
Imam Abu Dawud : 2248
Imam Tirmidzi : 1472, 3224
Imam Ibnu Majah : 2834, 2835