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Allah Membersihkan Nabi Musa 'Alaihissalam dari Tuduhan Bani Israil
Imam Tirmidzi : 3145حَدَّثَنَا عَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ حَدَّثَنَا رَوْحُ بْنُ عُبَادَةَ عَنْ عَوْفٍ عَنْ الْحَسَنِ وَمُحَمَّدٍ وَخِلَاسٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّ مُوسَى عَلَيْهِ السَّلَام كَانَ رَجُلًا حَيِيًّا سَتِيرًا مَا يُرَى مِنْ جِلْدِهِ شَيْءٌ اسْتِحْيَاءً مِنْهُ فَآذَاهُ مَنْ آذَاهُ مِنْ بَنِي إِسْرَائِيلَ فَقَالُوا مَا يَسْتَتِرُ هَذَا التَّسَتُّرَ إِلَّا مِنْ عَيْبٍ بِجِلْدِهِ إِمَّا بَرَصٌ وَإِمَّا أُدْرَةٌ وَإِمَّا آفَةٌ وَإِنَّ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ أَرَادَ أَنْ يُبَرِّئَهُ مِمَّا قَالُوا وَإِنَّ مُوسَى عَلَيْهِ السَّلَام خَلَا يَوْمًا وَحْدَهُ فَوَضَعَ ثِيَابَهُ عَلَى حَجَرٍ ثُمَّ اغْتَسَلَ فَلَمَّا فَرَغَ أَقْبَلَ إِلَى ثِيَابِهِ لِيَأْخُذَهَا وَإِنَّ الْحَجَرَ عَدَا بِثَوْبِهِ فَأَخَذَ مُوسَى عَصَاهُ فَطَلَبَ الْحَجَرَ فَجَعَلَ يَقُولُ ثَوْبِي حَجَرُ ثَوْبِي حَجَرُ حَتَّى انْتَهَى إِلَى مَلَإٍ مِنْ بَنِي إِسْرَائِيلَ فَرَأَوْهُ عُرْيَانًا أَحْسَنَ النَّاسِ خَلْقًا وَأَبْرَأَهُ مِمَّا كَانُوا يَقُولُونَ قَالَ وَقَامَ الْحَجَرُ فَأَخَذَ ثَوْبَهُ وَلَبِسَهُ وَطَفِقَ بِالْحَجَرِ ضَرْبًا بِعَصَاهُ فَوَاللَّهِ إِنَّ بِالْحَجَرِ لَنَدَبًا مِنْ أَثَرِ عَصَاهُ ثَلَاثًا أَوْ أَرْبَعًا أَوْ خَمْسًا فَذَلِكَ قَوْلُهُ تَعَالَى { يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَكُونُوا كَالَّذِينَ آذَوْا مُوسَى فَبَرَّأَهُ اللَّهُ مِمَّا قَالُوا وَكَانَ عِنْدَ اللَّهِ وَجِيهًا } قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَقَدْ رُوِيَ مِنْ غَيْرِ وَجْهٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَفِيهِ عَنْ أَنَسٍ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ
हमसे [अब्दु बिन हुमैद] ने हमसे [अल हसन] से [अउफ] से [रौह बिन उबदह], [मुहम्मद] अऊर [खिलास] से [अबू हुरैरा] से पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहा गा है कि मूसा अलैहिस सलाम बहुत शर्मीला अऊर बंद व्यक्ति रहे, शर्मिंदगी के एक भी बिट दिखाई नहीं देत रहे। तब बनी इसराइल ने उन्हें चोट पहुंचाई, उन्होंने कहा: उन्हें इस तरह का आवरण न पहनना चाहिए जब तक कि यह निश्चित न हो कि उनकी त्वचा में दोष, शायद कोई धब्बा, दाग या अन्य बीमारी है। अल्लाह अज्जा वजल्ला मूसा का ओनके बातन से मुक्त करै चाहत रहें। एक दिन मूसा अलैहिस सलाम अकेले रहे, उ आपन कपड़ा एक चट्टान पर रखिन अऊर फिर नहाइन। नहाए के बाद, मूसा ओनके कपड़ा लेवे के लिए उनके पास पहुँचा, पता चला कि पत्थर ओनके कपड़ा ले गवा फिर मूसा आपन लाठी लिहिन फिर पत्थर का खोजिन, कहिन: मोर कपड़ा, हे पत्थर, मोर कपड़ा, हे पत्थर। जब तक उ इजरायल के बच्चन के लोगन के एक समूह के पास नाहीं आवा, तब तक उ लोग ओका नंगा देखिन अऊर उ भौतिक रूप मा सबसे अच्छा इंसान रहा। अल्लाह ने ओनके बातन से ओका आजाद करावा'। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'चट्टान रुक गई तब मूसा ने अपने कपड़े लेकर पहन लिया फिर अपने लाठे से चट्टान को मारा। अल्लाह के कसम, पत्थर पर उनके लाठी से मारे से तीन, चार या पांच निशान रहे। यही अल्लाह तआला का वचन है: 'हे इमानदार लोग, मूसा का नाराज करै वालेन के तरह मत बनौ; फिर अल्लाह ओनका ओनके द्वारा कहे गए आरोपन से मुक्त कर दिहिस। अऊर उ एक अइसन मनई है जेकर अल्लाह के नजर मा सम्मानजनक पद है'। -अल अहजाब: 59- अबू ईसा ने कहा: यह हदीस सही है। ई हदीस पैगम्बर शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से अबू हुरैरा से एक अउर सनाद के माध्यम से भी सुनाई गै रही। यहि मामला मा पैगम्बर शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से अनस से एक समान हदीस है।