हदीस
Allah adalah maha penerima taubat
Imam Bukhari : 3956حَدَّثَنَا أَبُو النُّعْمَانِ حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ عَنْ أَبِي بِشْرٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا قَالَكَانَ عُمَرُ يُدْخِلُنِي مَعَ أَشْيَاخِ بَدْرٍ فَقَالَ بَعْضُهُمْ لِمَ تُدْخِلُ هَذَا الْفَتَى مَعَنَا وَلَنَا أَبْنَاءٌ مِثْلُهُ فَقَالَ إِنَّهُ مِمَّنْ قَدْ عَلِمْتُمْ قَالَ فَدَعَاهُمْ ذَاتَ يَوْمٍ وَدَعَانِي مَعَهُمْ قَالَ وَمَا رُئِيتُهُ دَعَانِي يَوْمَئِذٍ إِلَّا لِيُرِيَهُمْ مِنِّي فَقَالَ مَا تَقُولُونَ فِي{ إِذَا جَاءَ نَصْرُ اللَّهِ وَالْفَتْحُ وَرَأَيْتَ النَّاسَ يَدْخُلُونَ فِي دِينِ اللَّهِ أَفْوَاجًا }حَتَّى خَتَمَ السُّورَةَ فَقَالَ بَعْضُهُمْ أُمِرْنَا أَنْ نَحْمَدَ اللَّهَ وَنَسْتَغْفِرَهُ إِذَا نُصِرْنَا وَفُتِحَ عَلَيْنَا وَقَالَ بَعْضُهُمْ لَا نَدْرِي أَوْ لَمْ يَقُلْ بَعْضُهُمْ شَيْئًا فَقَالَ لِي يَا ابْنَ عَبَّاسٍ أَكَذَاكَ تَقُولُ قُلْتُ لَا قَالَ فَمَا تَقُولُ قُلْتُ هُوَ أَجَلُ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَعْلَمَهُ اللَّهُ لَهُ{ إِذَا جَاءَ نَصْرُ اللَّهِ وَالْفَتْحُ }فَتْحُ مَكَّةَ فَذَاكَ عَلَامَةُ أَجَلِكَ{ فَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ وَاسْتَغْفِرْهُ إِنَّهُ كَانَ تَوَّابًا }قَالَ عُمَرُ مَا أَعْلَمُ مِنْهَا إِلَّا مَا تَعْلَمُ
हमनी के बतवले बाड़े [अबू नु’मान] हमनी के बतवले बाड़े [अबू अवानाह] से [अबू बिसीर] से [सैद बिन जुबैर] से [इब्न अब्बास] रदलियाल्लाहु अनहुमा से, उमर एक बेर हमरा के बड़ लोग के जमघट में बोलवले रहले, त कुछ साथी पूछले रहले कि 'तू ए छोट लईका के काहें शामिल कईनी, हमनी के भी उनुका निहन छोट बच्चा बाड़े?' उमर जवाब दिहले; 'जानत बाड़ऽ, एह लइका के आपन 'गुण' बा।' इब्न उमर कहले, त एक दिन उमर ओ लोग के बोलवले अवुरी हमरा के अपना संगे ले गईले। जहाँ तक हमरा इयाद बा उमर ओह घरी हमरा के ना बोलवले रहले सिवाय ओह लोग के अपना ज्ञान के गुण देखावे के. तब उमर पूछले कि; 'अगर अल्लाह के मदद आ जीत आ जाव -1- आ रउरा देखब कि लोग के झुंड में अल्लाह के धर्म में प्रवेश करत बा -2- -अगर -QS अक्षर के अंत तक। अल्फाथ 1-3- के बा। कुछ साथी लोग टिप्पणी कइल; 'एह आयत के बारे में जहाँ तक हमनी के जानकारी बा, हमनी के अल्लाह के स्तुति करे के आ उनुका से माफी मांगे के आदेश दिहल गईल बा, ठीक तब जब हमनी के मदद दिहल जाला अवुरी जीत दिहल जाला'। कुछ अउरी लोग टिप्पणी कइल; 'अगर हमनी के ना मालूम रहित'। या इहाँ तक कि कमेंट भी बिल्कुल ना करीं। तब उमर हमरा से पूछले कि; 'हे इब्न अब्बास, का रउआ पिछला आयत प अयीसन टिप्पणी कईले बानी?'ना' हम जवाब देनी'। तब राउर का टिप्पणी बा? उमर से पूछीं। इब्न अब्बास जवाब दिहले; 'चिट्ठी एगो निशानी ह कि रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के मौत नजदीक बा, अल्लाह उनुका से ए आयत से कहले कि, 'अगर अल्लाह के मदद अवुरी जीत आईल बा', एकर मतलब बा मक्का प जीत अवुरी इ आपके मौत के निशानी बा - मुहम्मद -, एहसे 'अपना रब के तारीफ क के अपना के ऊपर उठाईं अवुरी माफी मांगी, सचमुच उ पश्चाताप के सबसे जादे कबूल करेवाला हवे।' उमर कहले कि, 'हमरा ए आयत के व्याख्या एकरा अलावे नईखे मालूम कि आप - इब्नु अब्बास - जवन जानतानी'।