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Allah berfirman: hambaku telah melakukan dosa lalu dia tahu bahwa ia memiliki tuhan yang mengampuni dosa dan menyiksanya, aku telah mengampuni hambaku…
Imam Muslim : 4953حَدَّثَنِي عَبْدُ الْأَعْلَى بْنُ حَمَّادٍ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ عَنْ إِسْحَقَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي طَلْحَةَ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي عَمْرَةَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِيمَا يَحْكِي عَنْ رَبِّهِ عَزَّ وَجَلَّ قَالَ أَذْنَبَ عَبْدٌ ذَنْبًا فَقَالَ اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي ذَنْبِي فَقَالَ تَبَارَكَ وَتَعَالَى أَذْنَبَ عَبْدِي ذَنْبًا فَعَلِمَ أَنَّ لَهُ رَبًّا يَغْفِرُ الذَّنْبَ وَيَأْخُذُ بِالذَّنْبِ ثُمَّ عَادَ فَأَذْنَبَ فَقَالَ أَيْ رَبِّ اغْفِرْ لِي ذَنْبِي فَقَالَ تَبَارَكَ وَتَعَالَى عَبْدِي أَذْنَبَ ذَنْبًا فَعَلِمَ أَنَّ لَهُ رَبًّا يَغْفِرُ الذَّنْبَ وَيَأْخُذُ بِالذَّنْبِ ثُمَّ عَادَ فَأَذْنَبَ فَقَالَ أَيْ رَبِّ اغْفِرْ لِي ذَنْبِي فَقَالَ تَبَارَكَ وَتَعَالَى أَذْنَبَ عَبْدِي ذَنْبًا فَعَلِمَ أَنَّ لَهُ رَبًّا يَغْفِرُ الذَّنْبَ وَيَأْخُذُ بِالذَّنْبِ اعْمَلْ مَا شِئْتَ فَقَدْ غَفَرْتُ لَكَ قَالَ عَبْدُ الْأَعْلَى لَا أَدْرِي أَقَالَ فِي الثَّالِثَةِ أَوْ الرَّابِعَةِ اعْمَلْ مَا شِئْتَ قَالَ أَبُو أَحْمَدَ حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ زَنْجُويَةَ الْقُرَشِيُّ الْقُشَيْرِيُّ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْأَعْلَى بْنُ حَمَّادٍ النَّرْسِيُّ بِهَذَا الْإِسْنَادِ حَدَّثَنِي عَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ حَدَّثَنِي أَبُو الْوَلِيدِ حَدَّثَنَا هَمَّامٌ حَدَّثَنَا إِسْحَقُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي طَلْحَةَ قَالَ كَانَ بِالْمَدِينَةِ قَاصٌّ يُقَالُ لَهُ عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ أَبِي عَمْرَةَ قَالَ فَسَمِعْتُهُ يَقُولُ سَمِعْتُ أَبَا هُرَيْرَةَ يَقُولُ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنَّ عَبْدًا أَذْنَبَ ذَنْبًا بِمَعْنَى حَدِيثِ حَمَّادِ بْنِ سَلَمَةَ وَذَكَرَ ثَلَاثَ مَرَّاتٍ أَذْنَبَ ذَنْبًا وَفِي الثَّالِثَةِ قَدْ غَفَرْتُ لِعَبْدِي فَلْيَعْمَلْ مَا شَاءَ
हमका बतावा है ['अब्दुल अ'ला बिन हम्माद] हमका [हम्मद बिन सलामा] से [इशाक बिन अब्दुल्लाह बिन अबू तल्हा] से ['अब्दुर्रहमान बिन अबू अमरा] से [अबू हुरैरा] से पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बताइस है, जवन अल्लाह तलाहु अलैहि वसल्लम से अल्लाह तलाह वहाँ कहे रहे, वहाँ रहा: एक मनई जे पाप किहिस रहा। यहिके बाद, उ प्रार्थना किहिन अऊर प्रार्थना किहिन; 'हे अल्लाह, मोर पापन का माफ करौ! ' तब अल्लाह सुभानाहु वा तआला ने कहा: 'वास्तव में, मेरा सेवक स्वीकार करत है कि उ पाप किहिस है, अऊर उ जानत है कि ओकरे पास एक भगवान है जे पाप माफ कर सकत है या पाप के लिए ओका दंडित कर सकत है'। फिर उ मनई फिर से पाप करत है अऊर उ प्रार्थना करत है; 'हे अल्लाह, मोर पापन का माफ करौ! ' त अल्लाह सुभानहु वा तआला ने कहा: 'मेरे सेवक ने पाप किया है, और वह जानता है कि उसके पास एक भगवान है जो पाप माफ करत है या पाप के लिए अपने सेवक को दंडित करत है। यहिसे, जवन कुछौ तुम चाहत हौ, करौ, काहे से कि मैं तोहका निश्चित रूप से माफ करब -अगर तुम पश्चाताप करब-'। अब्दुल अ'ला कहिन; 'मुझे नहीं पता कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने तीसरी या चौथी बार कहा: 'जैसा आप चाहें' वैसा करो'। अबू अहमद कहिन; मुहम्मद बिन ज़ंजुयाह अल कुरासी अल कुस्यारी ने हमसे 'अब्दुल अ'ला बिन हम्माद अन नरसी' का ई सनाद के साथ बतावा है। हमसे कहिस है ['अब्द बिन हुमैद] हमसे कहिस है [अबुल वालिद] हमसे कहिस है [हम्मम] हमसे कहिस है [इशाक बिन अब्दुल्लाह बिन अबू तल्हा] उ कहिन; बहुत पहिले, मदीना मा एक मनई रहा जे एक कहानी सुनावत रहा, ओका आमतौर पर [अब्दुर्रहमान बिन अबू अमराह] कहा जात रहा, उ कहिन; हम ओनका कहत सुनेन; हम [अबू हुरैराह] का कहत सुने रहेन; हम एक बार रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का कहते सुने रहेन: एक नौकर पाप करत है...-जवन हम्माद बिन सलामाह के हदीस का लफाज़ का जिक्र करै से मतलब है; - 'पाप किहे अहै,' तीन बार। अउर तीसरी बार कहिन; 'मैं - अल्लाह - अपने नौकर को माफ कर दिया है, तो आप जैसा चाहें करौ'।