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- Malaikat Malaikat Maut Pencabut nyawa Kedatangan malaikat maut pencabut nyawa kepada para Nabi Malaikat pencabut nyawa datang kepada Nabi dawud
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Malaikat pencabut nyawa datang kepada Nabi dawud
Imam Ahmad : 9063

حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ مُحَمَّدٍ يَعْنِي الْقَارِيَّ عَنْ عَمْرِو بْنِ أَبِي عَمْرٍو عَنِ الْمُطَّلِبِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ كَانَ دَاوُدُ النَّبِيُّ فِيهِ غَيْرَةٌ شَدِيدَةٌ وَكَانَ إِذَا خَرَجَ أُغْلِقَتْ الْأَبْوَابُ فَلَمْ يَدْخُلْ عَلَى أَهْلِهِ أَحَدٌ حَتَّى يَرْجِعَ قَالَ فَخَرَجَ ذَاتَ يَوْمٍ وَغُلِّقَتْ الدَّارُ فَأَقْبَلَتْ امْرَأَتُهُ تَطَّلِعُ إِلَى الدَّارِ فَإِذَا رَجُلٌ قَائِمٌ وَسَطَ الدَّارِ فَقَالَتْ لِمَنْ فِي الْبَيْتِ مِنْ أَيْنَ دَخَلَ هَذَا الرَّجُلُ الدَّارَ وَالدَّارُ مُغْلَقَةٌ وَاللَّهِ لَتُفْتَضَحُنَّ بِدَاوُدَ فَجَاءَ دَاوُدُ فَإِذَا الرَّجُلُ قَائِمٌ وَسَطَ الدَّارِ فَقَالَ لَهُ دَاوُدُ مَنْ أَنْتَ قَالَ أَنَا الَّذِي لَا أَهَابُ الْمُلُوكَ وَلَا يَمْتَنِعُ مِنِّي شَيْءٌ فَقَالَ دَاوُدُ أَنْتَ وَاللَّهِ مَلَكُ الْمَوْتِ فَمَرْحَبًا بِأَمْرِ اللَّهِ فَرَمَلَ دَاوُدُ مَكَانَهُ حَيْثُ قُبِضَتْ رُوحُهُ حَتَّى فَرَغَ مِنْ شَأْنِهِ وَطَلَعَتْ عَلَيْهِ الشَّمْسُ فَقَالَ سُلَيْمَانُ لِلطَّيْرِ أَظِلِّي عَلَى دَاوُدَ فَأَظَلَّتْ عَلَيْهِ الطَّيْرُ حَتَّى أَظْلَمَتْ عَلَيْهِمَا الْأَرْضُ فَقَالَ لَهَا سُلَيْمَانُ اقْبِضِي جَنَاحًا جَنَاحًا قَالَ أَبُو هُرَيْرَةَ يُرِينَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَيْفَ فَعَلَتْ الطَّيْرُ وَقُبِضَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَغَلَبَتْ عَلَيْهِ يَوْمَئِذٍ الْمَصْرَخِيَّةُ

हमसे कहिन है [कुतैबा] कहिन; हमसे कहिन है [याकूब बिन अब्दुर्रहमान बिन मुहम्मद] - अर्थात् अल कारी - [अमरू बिन अबी अमरू] से [अल मुथलिब] से [अबू हुरैरा] कहिन; कि रसूलल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने कहा: 'वास्तव में, पैगम्बर दाऊद को बहुत ईर्ष्या हुई, जब उ बाहर गए तो उन्होंने सब दरवाजे बंद कर दिए ताकि कोई भी उनके परिवार - उनकी पत्नी - को देख न सके जब तक कि उ घर नहीं आ गए,' उन्होंने कहा: 'त एक दिन पैगम्बर दाऊद चले गए, उनकी पत्नी ने तब घर के चारों ओर देखा, फिर अचानक एक आदमी घर के बीच में खड़ा रहा, तब उन्होंने पूछा घर मा रहे वाले मनई; 'दरवाजा बन्द रहा ई आदमी कहाँ से आवा? कसम अल्लाह दाऊद निश्चित रूप से नाराज होइहैं'। यहिके बाद पैगम्बर दाऊद आए अऊर उ मनई का अपने घर के बीच मा खड़ा पावा, तौ दाऊद ओसे पूछिस; 'तुम कउन हउ? ' आदमी जवाब दिहिस; 'मैं एक अइसन मनई हउँ जे राजा से कभी नाहीं डरत हउँ, अऊर मोका कुछौ बाधा नाहीं रख सकत है'। तौ दाऊद कहिन; 'अल्लाह के कसम, तुम मौत के दूत हौ, अल्लाह के हुकुम से स्वागत है।' तब दाउद तेजी से वहि जगह पै चला गा जहाँ ऊ मरि गा रहा, जब दाऊद मरा रहा तौ सूरज उगवा रहा, सुलैमान चिरइयन से कहिस; 'छाँव दाऊद,' तब चिरइयन ओका अइसे ढँकिन कि धरती अँधियार होइगै। सुलैमान ने चिरईयन से कहा; 'पंख दर पंख पकड़ो'।' अबू हुरैरा कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तब हमका देखाइस कि चिरई कइसे करत रहीं। अऊर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के जान लीन गै अऊर उ समय जान के नुकसान के गंभीरता होइ गै'।

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