Hadith Representative
Abdurrahman bin 'Auf menepati janjinya melindungi keluarga Umayyah bin Khalaf sampai kakinya tersabet pedang
Imam Bukhari : 2137حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ قَالَ حَدَّثَنِي يُوسُفُ بْنُ الْمَاجِشُونِ عَنْ صَالِحِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ جَدِّهِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَكَاتَبْتُ أُمَيَّةَ بْنَ خَلَفٍ كِتَابًا بِأَنْ يَحْفَظَنِي فِي صَاغِيَتِي بِمَكَّةَ وَأَحْفَظَهُ فِي صَاغِيَتِهِ بِالْمَدِينَةِ فَلَمَّا ذَكَرْتُ الرَّحْمَنَ قَالَ لَا أَعْرِفُ الرَّحْمَنَ كَاتِبْنِي بِاسْمِكَ الَّذِي كَانَ فِي الْجَاهِلِيَّةِ فَكَاتَبْتُهُ عَبْدَ عَمْرٍو فَلَمَّا كَانَ فِي يَوْمِ بَدْرٍ خَرَجْتُ إِلَى جَبَلٍ لِأُحْرِزَهُ حِينَ نَامَ النَّاسُ فَأَبْصَرَهُ بِلَالٌ فَخَرَجَ حَتَّى وَقَفَ عَلَى مَجْلِسٍ مِنْ الْأَنْصَارِ فَقَالَ أُمَيَّةُ بْنُ خَلَفٍ لَا نَجَوْتُ إِنْ نَجَا أُمَيَّةُ فَخَرَجَ مَعَهُ فَرِيقٌ مِنْ الْأَنْصَارِ فِي آثَارِنَا فَلَمَّا خَشِيتُ أَنْ يَلْحَقُونَا خَلَّفْتُ لَهُمْ ابْنَهُ لِأَشْغَلَهُمْ فَقَتَلُوهُ ثُمَّ أَبَوْا حَتَّى يَتْبَعُونَا وَكَانَ رَجُلًا ثَقِيلًا فَلَمَّا أَدْرَكُونَا قُلْتُ لَهُ ابْرُكْ فَبَرَكَ فَأَلْقَيْتُ عَلَيْهِ نَفْسِي لِأَمْنَعَهُ فَتَخَلَّلُوهُ بِالسُّيُوفِ مِنْ تَحْتِي حَتَّى قَتَلُوهُ وَأَصَابَ أَحَدُهُمْ رِجْلِي بِسَيْفِهِ وَكَانَ عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ عَوْفٍ يُرِينَا ذَلِكَ الْأَثَرَ فِي ظَهْرِ قَدَمِهِقَالَ أَبُو عَبْد اللَّهِ سَمِعَ يُوسُفُ صَالِحًا وَإِبْرَاهِيمُ أَبَاهُ
हमका बतावा गा है [अब्दुल अजीज बिन अब्दुल्ला] कहिन, ई हमका बतावा गा है [यूसुफ बिन अल माजिस्यून] से [सालिह बिन इब्राहिम बिन अब्दुर्रहमान बिन 'औफ] से [उनके पिता] से [उनके दादा, अब्दुर्रहमान बिन 'औफ रदलियाहू अनहू] से कहिन: 'मैंने उमह बिन का एक पत्र भेजा है कि उ मेरे बाद देखिहैं मक्का मा अपने परिवार अऊर अपनी संपत्ति के कामकाज अऊर मैं मदीना मा उनके परिवार अऊर उनकी संपत्ति के कामकाज मा ओनके देखभाल करब। जब हम अर-रहमान का नाम लिहेन तौ उ कहिन; 'हम नाहीं जानित अर-रहमान, आपन नांव लिखि दिहा जब अबहीं अज्ञानता मा रहे'। यहिसे हम आपन नांव 'अब्दु अमरू' लिखेन। जब बदर के युद्ध भवा तौ मैं पहाड़न मा ओनके रखवाली करै गयौं जब लोग सोवत रहें। तब बिलाल ओका देखिन, फिर निकरे जब तक अंसार लोगन के सभा मा पहुँचि गये। तब उमय्या बिन खलफ ने कहा: 'अगर उमय्या जीवित रहिहैं तौ मैं नाहीं बचब। फिर कुछ अंसार उनके साथ बाहर आए अऊर हमरे पास आए, जब हमका चिंता भै कि उ हमका ढूंढ लेइहैं, तौ हम उनके बेटवा का उनके पास लइ गयेन कि उ लोग ओके साथ व्यस्त होइ जायँ, लेकिन उ लोग ओका मार डारिन अऊर उ लोग हमसे मिले तक वापस आवै से हिचकत रहे, उ समय उ एक मोटा आदमी रहा, जब उ हमसे मिले तौ हम कहेन, ओकरे पास बतख, फिर उ आपन शरीर ओकरे ऊपर रख दिहेन, फिर उ लोग - मुसलमानन का - जब तक उइ ओका मार नाहीं दिहिन, तब तक ओनके तलवारन का मोर नीचे चलाके ओका छुरा घोंपै के कोशिश किहिन, मोर गोड़ ओनमा से एक के तलवार से मारा गा। अऊर अब्दुर्रहमान बिन औफ हमका अपने गोड़ के पीछे तलवार के घाव देखाइस। अबू अब्दुल्ला कहिन, यूसुफ सालेह का सुनिन अऊर इब्राहिम, उनके पिता भी।