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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



- Allah Asma’ul husnaa Al Bashir
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Al Bashir
Imam Ahmad : 16198

قَالَ حَدَّثَنَا زَيْدُ بْنُ الْحُبَابِ قَالَ حَدَّثَنِي حُسَيْنُ بْنُ وَاقِدٍ قَالَ حَدَّثَنِي ثَابِتٌ الْبُنَانِيُّ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُغَفَّلٍ الْمُزَنِيِّ قَالَ كُنَّا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِالْحُدَيْبِيَةِ فِي أَصْلِ الشَّجَرَةِ الَّتِي قَالَ اللَّهُ تَعَالَى فِي الْقُرْآنِ وَكَانَ يَقَعُ مِنْ أَغْصَانِ تِلْكَ الشَّجَرَةِ عَلَى ظَهْرِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَعَلِيُّ بْنُ أَبِي طَالِبٍ وَسُهَيْلُ بْنُ عَمْرٍو بَيْنَ يَدَيْهِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لِعَلِيٍّ رَضِيَ اللَّهُ تَعَالَى عَنْهُ اكْتُبْ بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ فَأَخَذَ سُهَيْلُ بْنُ عَمْرٍو بِيَدِهِ فَقَالَ مَا نَعْرِفُ بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ اكْتُبْ فِي قَضِيَّتِنَا مَا نَعْرِفُ قَالَ اكْتُبْ بِاسْمِكَ اللَّهُمَّ فَكَتَبَ هَذَا مَا صَالَحَ عَلَيْهِ مُحَمَّدٌ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَهْلَ مَكَّةَ فَأَمْسَكَ سُهَيْلُ بْنُ عَمْرٍو بِيَدِهِ وَقَالَ لَقَدْ ظَلَمْنَاكَ إِنْ كُنْتَ رَسُولَهُ اكْتُبْ فِي قَضِيَّتِنَا مَا نَعْرِفُ فَقَالَ اكْتُبْ هَذَا مَا صَالَحَ عَلَيْهِ مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ الْمُطَّلِبِ وَأَنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَكَتَبَ فَبَيْنَا نَحْنُ كَذَلِكَ إِذْ خَرَجَ عَلَيْنَا ثَلَاثُونَ شَابًّا عَلَيْهِمْ السِّلَاحُ فَثَارُوا فِي وُجُوهِنَا فَدَعَا عَلَيْهِمْ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَخَذَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ بِأَبْصَارِهِمْ فَقَدِمْنَا إِلَيْهِمْ فَأَخَذْنَاهُمْ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ هَلْ جِئْتُمْ فِي عَهْدِ أَحَدٍ أَوْ هَلْ جَعَلَ لَكُمْ أَحَدٌ أَمَانًا فَقَالُوا لَا فَخَلَّى سَبِيلَهُمْ فَأَنْزَلَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ { وَهُوَ الَّذِي كَفَّ أَيْدِيَهُمْ عَنْكُمْ وَأَيْدِيَكُمْ عَنْهُمْ بِبَطْنِ مَكَّةَ مِنْ بَعْدِ أَنْ أَظْفَرَكُمْ عَلَيْهِمْ وَكَانَ اللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرًا } قَالَ أَبُو عَبْد الرَّحْمَنِ قَالَ حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ فِي هَذَا الْحَدِيثِ عَنْ ثَابِتٍ عَنْ أَنَسٍ وَقَالَ حُسَيْنُ بْنُ وَاقِدٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُغَفَّلٍ وَهَذَا الصَّوَابُ عِنْدِي إِنْ شَاءَ اللَّهُ

-अहमद बिन हनबल रदलियाल्लाहुअनहु- कहिन; हमसे कहिन है [यजीद बिन अल हभाब] कहिन; मोका बतावा है [हुशैन बिन वाकिद] कहिन; [अब्दुल्लाह बिन मुगफ्फल अल मुजानी] से [थाबित अल बुनानी] ने कहा है; हम हुदैबिया मा रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के साथे उ पेड़ के नीचे रहेन जेकरे बारे मा अल्लाह ताआला ने कुरान मा बतावा रहा। शाखाओं के बीच रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के पीछे रहे, जबकि अली बिन अबू तालिब अऊर सुहैल बिन अमर उनके सामने रहे। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अली रदलियाल्लाहुअन्हु से कहा 'बिसमिल्लाहिराहमानिर्रहीमी लिखो, तब सुहैल बिन अमर ने हाथ पकड़ा। तब उ कहिन; हमका न जानी BISMILLAHIRRAHMAANIRRAHIIMI, जो हम समझ सकें लिखो। उन्होंने कहा : 'लिखो बिस्मिका अल्लाहुम्मा' तब लिखा, 'यह मुहम्मद रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और मक्का के जनता के बीच का समझौता है', तब सुहैल बिन अमर ने उनका हाथ पकड़ा। फिर कहिन; 'हम आपके साथ अन्याय करत अगर आप उनके दूत होते, हमरे समझौते में लिखो जो हम जानत हैं'। उ कहिन: 'ई मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह बिन अब्दुल अल मुथलिब के बीच एक समझौता है, भले ही मैं रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम हौं' तब उ लिखिन, उ समय हथियार लइके तीस जवान रहे जे हमरे ऊपर हमला किहिन, तब जवान हमरे खिलाफ विद्रोह किहिन, फिर रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ओनके लिए दुर्भाग्य किहिन। फिर अल्लाह अज्जावाजल्ला ने ओनके आँखिन का अंधा कर दिहिस, हम ओनके पास आए अऊर हम ओनका पकड़ लिहेन। फिर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'का तुम केहू के समझौता के तहत आए रहेव, या कौनो अइसन है जे तोहार सुरक्षा के गारंटी देत ​​है?' उइ जवाब दिहिन, नाहीं। फिर ओनका चलै कै इजाजत मिली। फिर अल्लाह अज्जावजल्ला ने ई आयत उतारिन, 'अऊर उहै उहै है जे अल्लाह के आपके ऊपर जीत के बाद मक्का शहर के बीच मा ओनके हाथन का -नष्ट- करै से रोकिन अऊर आपके हाथन का -नष्ट- करै से रोकिन, अऊर अल्लाह आपके काम का सर्वदर्शी है'। अबू अब्दुर्रहमान कहिन; हम्माद बिन सलामा कहिन; यहि हदीस मा। थाबित से अनस से और हुसैन बिन वाकिद ने कहा; अब्दुल्ला बिन अल मुगफ्फाल से अऊर ई उहै है जवन हम सोचित है कि अगर अल्लाह चाहे तौ सच है।

Hadith Corroboration :

Imam Ahmad : 16198, 18774, 26056