Rendahkan diri tidak menyeru ke dzat yang tuli dan bukan dzat yang jauh
Imam Ahmad : 18774
حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَهَّابِ بْنُ عَبْدِ الْمَجِيدِ الثَّقَفِيُّ أَبُو مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا خَالِدٌ الْحَذَّاءُ عَنْ أَبِي عُثْمَانَ النَّهْدِيِّ عَن أَبِي مُوسَى الْأَشْعَرِيِّ قَالَ كُنَّا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي غَزَاةٍ فَجَعَلْنَا لَا نَصْعَدُ شَرَفًا وَلَا نَعْلُو شَرَفًا وَلَا نَهْبِطُ فِي وَادٍ إِلَّا رَفَعْنَا أَصْوَاتَنَا بِالتَّكْبِيرِ قَالَ فَدَنَا مِنَّا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ أَيُّهَا النَّاسُ ارْبَعُوا عَلَى أَنْفُسِكُمْ فَإِنَّكُمْ مَا تَدْعُونَ أَصَمَّ وَلَا غَائِبًا إِنَّمَا تَدْعُونَ سَمِيعًا بَصِيرًا إِنَّ الَّذِي تَدْعُونَ أَقْرَبُ إِلَى أَحَدِكُمْ مِنْ عُنُقِ رَاحِلَتِهِ يَا عَبْدَ اللَّهِ بْنَ قَيْسٍ أَلَا أُعَلِّمُكَ كَلِمَةً مِنْ كُنُوزِ الْجَنَّةِ لَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللَّهِ
हमसे [अब्दुल वहाब बिन अब्दुल माजिद अत्स त्साकाफी अबू मुहम्मद] हमसे [खालिद अल हज़्ज़्ज़ा`] से [अबू उत्समान अन नहद] से [अबू मूसा अल अस्यारी] से कहिन है; हम एक युद्ध मा रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथे रहेन। अऊर हम ऊँच स्थान पर नाहीं चढ़त हैं अऊर न ही घाटी से उतरत हैं, जब तक कि हम तकबीर के साथ आपन आवाज नाहीं उठावत हैं। तो रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमरे पास आए और बोले: 'हे लोग नमाज पढ़त समय अऊर तकबीर करत समय आपन आवाज कम करौ, काहे से कि तुम अंधे या अदृश्य का नाहीं पुकारत हौ। सचमुच, तुम केवल उही से प्रार्थना करत हौ जे सर्वश्रवण अऊर सर्वदर्शक है। सचमुच, जेकरे पास तुम प्रार्थना करत हौ, ऊ तुममें से एक से ज्यादा नजदीक है, ऊ अपने सवार जानवर के गर्दन के पास है। हे अब्दुल्ला बिन कैस, का हम तोहका स्वर्ग के बचत मा से एक सिखावा? -अर्थात-, ला हउला वाला कुव्वाता इल्ला बिल्लाह -अल्लाह के अलावा कौनो शक्ति अऊर प्रयास नाहीं है-'।