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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



- Nabi Muhammad Sallallahu Alaihi Wasallam Sahabat Nabi Umar bin Abdul Aziz meminta mangkuk itu beberapa tahun kemudian
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Umar bin Abdul Aziz meminta mangkuk itu beberapa tahun kemudian
Imam Muslim : 3747

حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ سَهْلٍ التَّمِيمِيُّ وَأَبُو بَكْرِ بْنُ إِسْحَقَ قَالَ أَبُو بَكْرٍ أَخْبَرَنَا و قَالَ ابْنُ سَهْلٍ حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي مَرْيَمَ أَخْبَرَنَا مُحَمَّدٌ وَهُوَ ابْنُ مُطَرِّفٍ أَبُو غَسَّانَ أَخْبَرَنِي أَبُو حَازِمٍ عَنْ سَهْلِ بْنِ سَعْدٍ قَالَ ذُكِرَ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ امْرَأَةٌ مِنْ الْعَرَبِ فَأَمَرَ أَبَا أُسَيْدٍ أَنْ يُرْسِلَ إِلَيْهَا فَأَرْسَلَ إِلَيْهَا فَقَدِمَتْ فَنَزَلَتْ فِي أُجُمِ بَنِي سَاعِدَةَ فَخَرَجَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَتَّى جَاءَهَا فَدَخَلَ عَلَيْهَا فَإِذَا امْرَأَةٌ مُنَكِّسَةٌ رَأْسَهَا فَلَمَّا كَلَّمَهَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَتْ أَعُوذُ بِاللَّهِ مِنْكَ قَالَ قَدْ أَعَذْتُكِ مِنِّي فَقَالُوا لَهَا أَتَدْرِينَ مَنْ هَذَا فَقَالَتْ لَا فَقَالُوا هَذَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ جَاءَكِ لِيَخْطُبَكِ قَالَتْ أَنَا كُنْتُ أَشْقَى مِنْ ذَلِكَ قَالَ سَهْلٌ فَأَقْبَلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَوْمَئِذٍ حَتَّى جَلَسَ فِي سَقِيفَةِ بَنِي سَاعِدَةَ هُوَ وَأَصْحَابُهُ ثُمَّ قَالَ اسْقِنَا لِسَهْلٍ قَالَ فَأَخْرَجْتُ لَهُمْ هَذَا الْقَدَحَ فَأَسْقَيْتُهُمْ فِيهِ قَالَ أَبُو حَازِمٍ فَأَخْرَجَ لَنَا سَهْلٌ ذَلِكَ الْقَدَحَ فَشَرِبْنَا فِيهِ قَالَ ثُمَّ اسْتَوْهَبَهُ بَعْدَ ذَلِكَ عُمَرُ بْنُ عَبْدِ الْعَزِيزِ فَوَهَبَهُ لَهُ وَفِي رِوَايَةِ أَبِي بَكْرِ بْنِ إِسْحَقَ قَالَ اسْقِنَا يَا سَهْلُ

मोका [मुहम्मद बिन सहल अतमीमी] अऊर [अबू बकर बिन इशाक] से कहिन है, अबू बकर कहिन; हमका सूचित किहिन है, जबकि इब्न साहल कहिन; हमसे कहिन है [इब्न अबू मरियम] हमसे कहिन हैं [मुहम्मद] - अर्थात् इब्नू मुतरीफ अबू घसान - हमका [अबू हाजिम] [सहल बिन साद] से बताइन हैं, उ कहिन, 'जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम का गाँव के अरब औरत के कहानी बतावा गा रहा, तौ उ कहिन कि ओका अबू बुलावे का आदेश दिहिन। कुछ देर बाद ही ऊ औरत बनी सैदा के घरे आई अऊर रुकी। फिर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम बाहर आए और उस महिला से मिलने गये, पता चला कि महिला हमेशा अपना माथा नीचे रखती है। जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उनसे बोलने को कहा तो महिला ने कहा कि 'मैं आपसे अल्लाह का शरण लेत हौं'। उ जवाब दिहिन: 'ठीक है, हमहूँ तोहका अपने से बचाय लेब'। यहिके बाद दोस्तन ने उनसे कहा कि 'का तुम जानत हौ कि ऊ कौन रहा जे तुमसे पहिले बात करै का कहिस रहा?' औरत जवाब दिहिस, 'नहीं'। दोस्तन ने कहा, 'वह व्यक्ति रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम है, ऊ तोहका प्रपोज करै आवा रहा'। औरत कहिस, 'तब हमहूँ अशुभन मा से एक हई'। सहल ने कहा कि उस समय रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम आए और अपने साथियों के साथ बनी सैदा वार्ड में बैठ गए। तब साहल से कहिन- 'हमका पियौ'। सहल कहिन, 'तब हम उनके लिए ई कटोरा निकालेन अऊर ओनका एकर उपयोग कइके ओनका पेय दिहेन'। अबू हाजिम ने कहा, 'तब साहल ने हमरे लिए कटोरा निकाला और हमने सीधे पी लिया'। अबू हाजिम कहिन- 'कुछ साल बाद उमर बिन अब्दुल अजीज कटोरा मांगिन। फिर कटोरा आखिरकार ओका दइ दीन गा'। और अबू बकर बिन इशाक के इतिहास में कहा गया है कि 'उन्होंने कहा: 'हे साहल, हमका एक पेय परोसौ!'।

Hadith Corroboration :


Imam Bukhari : 5206
Imam Muslim : 3747