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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Tiga Golongan Penghuni Surga dan lima golongan penghuni neraka
Imam Muslim : 5109

حَدَّثَنِي أَبُو غَسَّانَ الْمِسْمَعِيُّ وَمُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى وَمُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارِ بْنِ عُثْمَانَ وَاللَّفْظُ لِأَبِي غَسَّانَ وَابْنِ الْمُثَنَّى قَالَا حَدَّثَنَا مُعَاذُ بْنُ هِشَامٍ حَدَّثَنِي أَبِي عَنْ قَتَادَةَ عَنْ مُطَرِّفِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الشِّخِّيرِ عَنْ عِيَاضِ بْنِ حِمَارٍ الْمُجَاشِعِيِّ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ ذَاتَ يَوْمٍ فِي خُطْبَتِهِ أَلَا إِنَّ رَبِّي أَمَرَنِي أَنْ أُعَلِّمَكُمْ مَا جَهِلْتُمْ مِمَّا عَلَّمَنِي يَوْمِي هَذَا كُلُّ مَالٍ نَحَلْتُهُ عَبْدًا حَلَالٌ وَإِنِّي خَلَقْتُ عِبَادِي حُنَفَاءَ كُلَّهُمْ وَإِنَّهُمْ أَتَتْهُمْ الشَّيَاطِينُ فَاجْتَالَتْهُمْ عَنْ دِينِهِمْ وَحَرَّمَتْ عَلَيْهِمْ مَا أَحْلَلْتُ لَهُمْ وَأَمَرَتْهُمْ أَنْ يُشْرِكُوا بِي مَا لَمْ أُنْزِلْ بِهِ سُلْطَانًا وَإِنَّ اللَّهَ نَظَرَ إِلَى أَهْلِ الْأَرْضِ فَمَقَتَهُمْ عَرَبَهُمْ وَعَجَمَهُمْ إِلَّا بَقَايَا مِنْ أَهْلِ الْكِتَابِ وَقَالَ إِنَّمَا بَعَثْتُكَ لِأَبْتَلِيَكَ وَأَبْتَلِيَ بِكَ وَأَنْزَلْتُ عَلَيْكَ كِتَابًا لَا يَغْسِلُهُ الْمَاءُ تَقْرَؤُهُ نَائِمًا وَيَقْظَانَ وَإِنَّ اللَّهَ أَمَرَنِي أَنْ أُحَرِّقَ قُرَيْشًا فَقُلْتُ رَبِّ إِذًا يَثْلَغُوا رَأْسِي فَيَدَعُوهُ خُبْزَةً قَالَ اسْتَخْرِجْهُمْ كَمَا اسْتَخْرَجُوكَ وَاغْزُهُمْ نُغْزِكَ وَأَنْفِقْ فَسَنُنْفِقَ عَلَيْكَ وَابْعَثْ جَيْشًا نَبْعَثْ خَمْسَةً مِثْلَهُ وَقَاتِلْ بِمَنْ أَطَاعَكَ مَنْ عَصَاكَ قَالَ وَأَهْلُ الْجَنَّةِ ثَلَاثَةٌ ذُو سُلْطَانٍ مُقْسِطٌ مُتَصَدِّقٌ مُوَفَّقٌ وَرَجُلٌ رَحِيمٌ رَقِيقُ الْقَلْبِ لِكُلِّ ذِي قُرْبَى وَمُسْلِمٍ وَعَفِيفٌ مُتَعَفِّفٌ ذُو عِيَالٍ قَالَ وَأَهْلُ النَّارِ خَمْسَةٌ الضَّعِيفُ الَّذِي لَا زَبْرَ لَهُ الَّذِينَ هُمْ فِيكُمْ تَبَعًا لَا يَبْتَغُونَ أَهْلًا وَلَا مَالًا وَالْخَائِنُ الَّذِي لَا يَخْفَى لَهُ طَمَعٌ وَإِنْ دَقَّ إِلَّا خَانَهُ وَرَجُلٌ لَا يُصْبِحُ وَلَا يُمْسِي إِلَّا وَهُوَ يُخَادِعُكَ عَنْ أَهْلِكَ وَمَالِكَ وَذَكَرَ الْبُخْلَ أَوْ الْكَذِبَ وَالشِّنْظِيرُ الْفَحَّاشُ وَلَمْ يَذْكُرْ أَبُو غَسَّانَ فِي حَدِيثِهِ وَأَنْفِقْ فَسَنُنْفِقَ عَلَيْكَ و حَدَّثَنَاه مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى الْعَنَزِيُّ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ أَبِي عَدِيٍّ عَنْ سَعِيدٍ عَنْ قَتَادَةَ بِهَذَا الْإِسْنَادِ وَلَمْ يَذْكُرْ فِي حَدِيثِهِ كُلُّ مَالٍ نَحَلْتُهُ عَبْدًا حَلَالٌ حَدَّثَنِي عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ بِشْرٍ الْعَبْدِيُّ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ عَنْ هِشَامٍ صَاحِبِ الدَّسْتَوَائِيِّ حَدَّثَنَا قَتَادَةُ عَنْ مُطَرِّفٍ عَنْ عِيَاضِ بْنِ حِمَارٍ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ خَطَبَ ذَاتَ يَوْمٍ وَسَاقَ الْحَدِيثَ وَقَالَ فِي آخِرِهِ قَالَ يَحْيَى قَالَ شُعْبَةُ عَنْ قَتَادَةَ قَالَ سَمِعْتُ مُطَرِّفًا فِي هَذَا الْحَدِيثِ و حَدَّثَنِي أَبُو عَمَّارٍ حُسَيْنُ بْنُ حُرَيْثٍ حَدَّثَنَا الْفَضْلُ بْنُ مُوسَى عَنْ الْحُسَيْنِ عَنْ مَطَرٍ حَدَّثَنِي قَتَادَةُ عَنْ مُطَرِّفِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الشِّخِّيرِ عَنْ عِيَاضِ بْنِ حِمَارٍ أَخِي بَنِي مُجَاشِعٍ قَالَ قَامَ فِينَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ذَاتَ يَوْمٍ خَطِيبًا فَقَالَ إِنَّ اللَّهَ أَمَرَنِي وَسَاقَ الْحَدِيثَ بِمِثْلِ حَدِيثِ هِشَامٍ عَنْ قَتَادَةَ وَزَادَ فِيهِ وَإِنَّ اللَّهَ أَوْحَى إِلَيَّ أَنْ تَوَاضَعُوا حَتَّى لَا يَفْخَرَ أَحَدٌ عَلَى أَحَدٍ وَلَا يَبْغِ أَحَدٌ عَلَى أَحَدٍ وَقَالَ فِي حَدِيثِهِ وَهُمْ فِيكُمْ تَبَعًا لَا يَبْغُونَ أَهْلًا وَلَا مَالًا فَقُلْتُ فَيَكُونُ ذَلِكَ يَا أَبَا عَبْدِ اللَّهِ قَالَ نَعَمْ وَاللَّهِ لَقَدْ أَدْرَكْتُهُمْ فِي الْجَاهِلِيَّةِ وَإِنَّ الرَّجُلَ لَيَرْعَى عَلَى الْحَيِّ مَا بِهِ إِلَّا وَلِيدَتُهُمْ يَطَؤُهَا

हमरा [अबू गस्सन अल मिसमाई], [मुहम्मद बिन अल मुत्सन्ना] आ [मुहम्मद बिन बस्यार बिन उस्मान], गस्सन आ इब्न अल मुत्सन्ना के ग्रंथ कहने छथि, जाहि मे दुनू मे लिखल अछि: हमरा सभ केँ [मुअदज बिन हिशाम] हमरा [हमर पिता] केँ [कतदह] सँ [मुथर्रिफ बिन अब्दुल्लाह बिन असी सँ कहने छथि | स्याखिर] [इयाद बिन हिमार अल मुजासीई] स रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सलाम एक दिन अपन प्रवचन मे कहलनि: 'सत्ते, हमर रब्ब हमरा आज्ञा देलनि जे हम अहाँ केँ ओ सब सिखाबी जे अहाँ नहि जनैत छी, जे आइ हमरा सिखबैत छथि: 'हम अपन नौकर केँ जतेक धन दैत छी से हलाल अछि, सचमुच हम अपन नौकर केँ धर्मक अवस्था मे बनौने रही, हुनका सभक दर्शन कयल गेल छल।' शैतान आ अपन धर्म सँ भगा देल गेल, शैतान जे हम ओकरा सभ केँ वैध बनेने रही से मना क' देलक आ ओकरा सभ केँ हमरा संग एहन साझीदारक संगति करबाक आदेश देलक, जिनका पर हम शक्ति नहि प्रकट केने छी'। सचमुच, अल्लाह धरती के निवासी दिस तकलनि आ तखन अल्लाह हुनका सब स घृणा केलनि, अरब आ अजम दुनू, सिवाय किताब के लोक के अवशेष के, ओ कहलनि: 'सत्ते, हम अहाँ के अहाँ के परखय लेल पठेने छलहुं आ अहाँ के संग हम परखलहुं, हम अहाँ के एकटा एहन किताब उतारने छलहुं जे पानि सं भीजल नहिं अछि, अहाँ एकरा सुतल आ जागल पढ़लहुं'. सचमुच अल्लाह हमरा कुरैश जरेबाक आदेश देलनि आ तखन हम कहलियनि: 'हे प्रभु, तखन हमर माथ तोड़ि क' मशरूम बन' देत'। ओ कहलनि: 'जहिना ओ सभ अहाँ सभ केँ भगा देलक, हुनका सभ सँ लड़ू आ हम सभ अहाँक मदद करब, दान करब आ हम सभ हुनका सभक स्थान पर राखब, सेना पठाउ आ हम सभ हुनका सभ जकाँ पाँच बेर पठा देब, अहाँक आज्ञा नहि माननिहार सभ सँ लड़ब'। ओ आगू बजलाह- ‘स्वर्गक तीनटा निवासी छथि; सत्ता के मालिक जे सरल, उदार आ सहायक हो, दयालु, हर रिश्तेदार के प्रति कोमल दिल के व्यक्ति आ मुसलमान जे अपन बहुत ध्यान रखैत छथि आ आश्रित सेहो छथि' | ओ आगू बजलाह - नरक मे पाँचटा निवासी छथि; कमजोर लोक जिनका लग ताकत नहि छनि, अर्थात अहाँ सभक बीचक अनुयायी, ओ परिवार आ धनक खोज नहि करैत छथि, गद्दार जिनकर लोभ स्पष्ट नहि होइतो स्पष्ट नहि होइत छनि जाबत धरि ओ निश्चित रूप सँ हुनका संग विश्वासघात नहि करैत छथि, एहन लोक जे अहाँ केँ सदिखन भोरे-साँझ मे अहाँक परिवार आ अहाँक संपत्तिक संग ठकैत छथि'। ओ झूठ, झूठ आ अधलाह नैतिकता केँ आवाज देलक। अबू गस्सन अपन हदीस मे ई नहि कहैत छथि : दान करू आ हम एकर स्थान बदलि देब। हमरा सब के कहल गेल अछि [मुहम्मद बिन अल मुत्सन्ना अल अनाजी] हमरा सब के [मुहम्मद बिन अबू आदि] के [सईद] स [कतदाह] स एहि सनाद के संग कहने छथि, हदीस में ओ ई नहि कहने छथि: 'हम अपन नौकर के जे सब धन दैत छी, ओ सब हलाल अछि'। हमरा कहलक अछि [अब्दुररहमान बिन बिसीर अल अब्दी] हमरा सभकेँ [हिसियाम] सँ [याह्या बिन सईद], अद दस्तुवा’इ केर एकटा मित्र, हमरा सभ केँ [कतदाह] [मुथरीफ] सँ [इयाद बिन हिमार] सँ बतेने छथि जखन एक दिन अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसलाम प्रवचन देलनि, ओ हदीस केर जिक्र केलनि आ अंत मे ओ उल्लेख कयलनि: याह्या कहलनि: शु'बा कहलनि: कतादा सँ कहलनि: हम एहि हदीस मे मुथर्रिफ सुनलहुँ। हमरा कहलक अछि [अबू अम्मर हुसैन बिन हुरैत] हमरा सभकेँ [अल फढ़ल बिन मूसा] [अल हुसैन]सँ [मथर]सँ हमरा [कतादह] [मुथरीफ बिन अब्दुल्लाह बिन असी स्याखिर]सँ [इयाद बिन हिमार]सँ बनु मुजासीसँ बतेने अछि, ओ कहलनि: रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सलाम प्रचार करैत ठाढ़ भ’ गेलाह एक दिन हमरा सब के बीच में आ ओ कहलनि: 'सत्ते, अल्लाह हमरा आज्ञा देलनि' ओ एकटा हदीस के जिक्र केलनि जेना कदात सं हिस्यम के हदीस, हदीस में ओ जोड़लनि: 'आ अल्लाह हमरा पर खुलासा केलनि जे अहाँ सब एक दोसरा के नम्र करू जाहि सं कियो दोसर पर गर्व नहिं करय आ ताकि कियो दोसर पर क्रूर नहिं हो'. ओ -इयाद- अपन हदीस मे कहने छथि : आ ओ सभ अहाँ सभक बीच अनुयायी छथि, ओ सभ परिवार वा धनक खोज नहि करैत छथि' | हम पुछलियनि: हे अबू अब्दुल्लाह, एहन अछि की? ओ उत्तर देलनि : हँ अल्लाहक कसम अज्ञानताक काल मे हमरा सभ सँ भेंट भेल छल , कोनो गाम मे कियो चरबाह क ’ रहल छल , ओतय ओकर महिला दासी छोड़ि कियो नहि छल , ओकरा संग सेक्स केने छल ।

Hadith Corroboration :

Imam Ahmad : 17616, 17617, 17618
Imam Muslim : 5109