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Puasa Ramadhan yang dilanjutkan dengan 6 hari Syawal seperti puasa setahun penuh
Imam Tirmidzi : 690حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ مَنِيعٍ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ حَدَّثَنَا سَعْدُ بْنُ سَعِيدٍ عَنْ عُمَرَ بْنِ ثَابِتٍ عَنْ أَبِي أَيُّوبَ قَالَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ صَامَ رَمَضَانَ ثُمَّ أَتْبَعَهُ سِتًّا مِنْ شَوَّالٍ فَذَلِكَ صِيَامُ الدَّهْرِوَفِي الْبَاب عَنْ جَابِرٍ وَأَبِي هُرَيْرَةَ وَثَوْبَانَ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ أَبِي أَيُّوبَ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَقَدْ اسْتَحَبَّ قَوْمٌ صِيَامَ سِتَّةِ أَيَّامٍ مِنْ شَوَّالٍ بِهَذَا الْحَدِيثِ قَالَ ابْنُ الْمُبَارَكِ هُوَ حَسَنٌ هُوَ مِثْلُ صِيَامِ ثَلَاثَةِ أَيَّامٍ مِنْ كُلِّ شَهْرٍ قَالَ ابْنُ الْمُبَارَكِ وَيُرْوَى فِي بَعْضِ الْحَدِيثِ وَيُلْحَقُ هَذَا الصِّيَامُ بِرَمَضَانَ وَاخْتَارَ ابْنُ الْمُبَارَكِ أَنْ تَكُونَ سِتَّةَ أَيَّامٍ فِي أَوَّلِ الشَّهْرِ وَقَدْ رُوِيَ عَنْ ابْنِ الْمُبَارَكِ أَنَّهُ قَالَ إِنْ صَامَ سِتَّةَ أَيَّامٍ مِنْ شَوَّالٍ مُتَفَرِّقًا فَهُوَ جَائِزٌ قَالَ وَقَدْ رَوَى عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ مُحَمَّدٍ عَنْ صَفْوَانَ بْنِ سُلَيْمٍ وَسَعْدِ بْنِ سَعِيدٍ هَذَا الْحَدِيثَ عَنْ عُمَرَ بْنِ ثَابِتٍ عَنْ أَبِي أَيُّوبَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ هَذَا وَرَوَى شُعْبَةُ عَنْ وَرْقَاءَ بْنِ عُمَرَ عَنْ سَعْدِ بْنِ سَعِيدٍ هَذَا الْحَدِيثَ وَسَعْدُ بْنُ سَعِيدٍ هُوَ أَخُو يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ الْأَنْصَارِيِّ وَقَدْ تَكَلَّمَ بَعْضُ أَهْلِ الْحَدِيثِ فِي سَعْدِ بْنِ سَعِيدٍ مِنْ قِبَلِ حِفْظِهِ حَدَّثَنَا هَنَّادٌ قَالَ أَخْبَرَنَا الْحُسَيْنُ بْنُ عَلِيٍّ الْجُعْفِيُّ عَنْ إِسْرَائِيلَ أَبِي مُوسَى عَنْ الْحَسَنِ الْبَصْرِيِّ قَالَ كَانَ إِذَا ذُكِرَ عِنْدَهُ صِيَامُ سِتَّةِ أَيَّامٍ مِنْ شَوَّالٍ فَيَقُولُ وَاللَّهِ لَقَدْ رَضِيَ اللَّهُ بِصِيَامِ هَذَا الشَّهْرِ عَنْ السَّنَةِ كُلِّهَا
हमसे कहिन है [अहमद बिन मणि'] हमसे कहिन है [अबू मुआविया] हमसे कहिन है [सद बिन सईद] से [उमर बिन थाबित] से [अबू अय्यूब] उ कहिन, रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'जे रमजान मा रोजा रखत है अऊर ओकरे बाद शौल के दिन मा छह महीना रोजा रखत है, तब उहै रोजा रखत है एक पूरा साल'। यहि अध्याय मा - जाबीर, अबू हुरैरा अऊर त्सौबन से एक - पेंट - इतिहास भी है। अबू ईसा ने कहा, अबू अय्यूब का हदीस हसन प्रामाणिक हदीस है। कुछ विद्वान ई हदीस के आधार पर श्वाल के महीना मा छह दिन तक रोजा रखै का पसंद करत हैं। इब्न अल मुबारक कहिन, ई राय अच्छा है, जइसे कि हर महीना के बीच मा तीन दिन रोजा रखब, इब्न अल मुबारक जारी रखिन, ई कई हदीस मा रिवायित कीन गा है, कि ई रोजा रमदलान रोजा का निरंतरता है, इब्न मुबारक ने महीना के शुरुआत मा छह दिन रोजा रखै का चुना अऊर पसंद किहिन, तौ कुछौ गलत नाहीं है लेकिन अगर आप छह दिन रोजा रखै चाहत हैं अनुक्रम से बाहर। -रावी- ने कहा, ['अब्दुल अजीज बिन मुहम्मद] ने [शफवान बिन सुलेम] से ई हदीस सुनाई है, जबकि [सअद बिन सैद] ने [उमर बिन थाबित] से [अबू अय्यूब] से पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से सुनाई है। इसी तरह, [स्यूबाह] ने [वर्का बिन उमर] से [साद बिन सैद] से ई हदीस सुनाई अऊर साद बिन सैद उनकर भाई याह्या बिन सैद अल अंसारी रहे, हदीस विद्वानन ने साद बिन सैद के रटै के मामले मा आलोचना किहिन। हसन ने हमसे कहा हन्नाद ने हमसे हसन बिन अली अल जुफी इजरायल से अबू मूसा से हसन अल बशरी से कहा है, उ कहिन, अगर उनका बतावा गा कि उ शौल के महीना मा छह दिन रोजा रखिन तौ उ कहिन, अल्लाह के कसम, वास्तव मा अल्लाह श्वाल के महीना मा छह दिन के रोजा रखै से खुश होइगा है, जे एक साल के उपवास के तुलना मा है।