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Doa menjelang tidur: ALLAHUMMA ASLAMTU ALLAHUMMA ASALAMTU NAFSII ILAIKA ...
Imam Abu Dawud : 4389حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ حَدَّثَنَا الْمُعْتَمِرُ قَالَ سَمِعْتُ مَنْصُورًا يُحَدِّثُ عَنْ سَعْدِ بْنِ عُبَيْدَةَ قَالَ حَدَّثَنِي الْبَرَاءُ بْنُ عَازِبٍ قَالَقَالَ لِي رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا أَتَيْتَ مَضْجَعَكَ فَتَوَضَّأْ وُضُوءَكَ لِلصَّلَاةِ ثُمَّ اضْطَجِعْ عَلَى شِقِّكَ الْأَيْمَنِ وَقُلْ اللَّهُمَّ أَسْلَمْتُ وَجْهِي إِلَيْكَ وَفَوَّضْتُ أَمْرِي إِلَيْكَ وَأَلْجَأْتُ ظَهْرِي إِلَيْكَ رَهْبَةً وَرَغْبَةً إِلَيْكَ لَا مَلْجَأَ وَلَا مَنْجَى مِنْكَ إِلَّا إِلَيْكَ آمَنْتُ بِكِتَابِكَ الَّذِي أَنْزَلْتَ وَنَبِيِّكَ الَّذِي أَرْسَلْتَ قَالَ فَإِنْ مِتَّ مِتَّ عَلَى الْفِطْرَةِ وَاجْعَلْهُنَّ آخِرَ مَا تَقُولُ قَالَ الْبَرَاءُ فَقُلْتُ أَسْتَذْكِرُهُنَّ فَقُلْتُ وَبِرَسُولِكَ الَّذِي أَرْسَلْتَ قَالَ لَا وَنَبِيِّكَ الَّذِي أَرْسَلْتَحَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ حَدَّثَنَا يَحْيَى عَنْ فِطْرِ بْنِ خَلِيفَةَ قَالَ سَمِعْتُ سَعْدَ بْنَ عُبَيْدَةَ قَالَ سَمِعْتُ الْبَرَاءَ بْنَ عَازِبٍ قَالَ قَالَ لِي رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا أَوَيْتَ إِلَى فِرَاشِكَ وَأَنْتَ طَاهِرٌ فَتَوَسَّدْ يَمِينَكَ ثُمَّ ذَكَرَ نَحْوَهُ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الْمَلِكِ الْغَزَّالُ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يُوسُفَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ الْأَعْمَشِ وَمَنْصُورٍ عَنْ سَعْدِ بْنِ عُبَيْدَةَ عَنْ الْبَرَاءِ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِهَذَا قَالَ سُفْيَانُ قَالَ أَحَدُهُمَا إِذَا أَتَيْتَ فِرَاشَكَ طَاهِرًا وَقَالَ الْآخَرُ تَوَضَّأْ وُضُوءَكَ لِلصَّلَاةِ وَسَاقَ مَعْنَى مُعْتَمِرٍ
हमसे कहिन [मुसद्दाद] कहिन, हमसे कहिन [अल मुतमीर] उ कहिन; हम [मंसूर] का [सद बिन उबैदा] से बतावत सुने रहेन, उ कहिन; ने मुझसे कहा है [अल बरा बिन अजीब] उ कहिन, 'रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मुझसे कहा: 'अगर तुम सोना चाहत हौ, तौ वजू करौ जइसे तुम नमाज के लिए वजू करत हौ। फिर दाहिने तरफ सो जा, अऊर पढ़ा: 'हे अल्लाह, हे मेरे प्रभु, मैं अपने आप का तोहरे समर्पित करत हउँ अऊर मैं आपन मामला तोहरे हवाले करत हउँ, अऊर मैं आपन शरीर तोहरे समर्पित करत हउँ, अस्वीकार होए के पूरा डर अऊर स्वीकार कीन जाय के उम्मीद के साथ। तुमसे शरण लेवे अऊर खुद का बचावै के लिए तुमरे सिवाय कौनो जगह नाहीं है। मैं तोहार किताब मा विश्वास करत हउँ जेका तू अपने नबी से प्रकट किहे रहेव जेका तू भेजे रहेव-'। तब उ कहिन: 'अगर तुम मर जाओ, तौ तुम फितरह के ऊपर एक शुद्ध अवस्था मा मर जाओ, अऊर तुम जवन कहत हौ ओकर अंत होइ'। अल बारा ने कहा, 'मैंने कहा, 'मैंने तब कहा कि सब प्रार्थनाओं का जिक्र किया जाय'। हम कहिन, 'अऊर अपने दूत के साथे जेका तुम भेजे हौ'। उ कहिन: 'नहीं, -लेकिन कहौ- 'अऊर अपने नबी के साथे जेका हम भेजे हई''। हमसे कहिन है [मुसद्दाद] कहिन, हमसे [यह्या] कहिन हैं [फिथर बिन खलीफा] से उ कहिन; हम सुनेन [स'द बिन उबैदा] उ कहिन; हम [अल बारा बिन अजीब] का कहत सुने रहेन, 'रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमसे कहिन: 'अगर तुम शुद्ध अवस्था मा सोवत हौ, तौ आपन दाहिना हाथ तकिया बनावा'। फिर उ हदीस का जिक्र किहिन। हमसे कहिन [मुहम्मद बिन अब्दुल मलिक अल गज्जल] कहिन, हमसे कहिन [मुहम्मद बिन यूसुफ] कहिन, हमसे [सुफयान] [अल अमासी] से अऊर [मंसूर] से [सद बिन उबैदा] से [अल बारा] पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से उहै हदीसल्लम से कहिन। सुफयान ने कहा, 'दुनों में से एक - अल अमासी और मंसूर के बीच - ने कहा, 'अगर आप अपने बिस्तर पर शुद्ध अवस्था में आते हैं...' जबकि दूसरा ने कहा, 'नमाज के लिए अपने वजू के तरह वजू बनाओ...त हदीस का उल्लेख एकदम सही है'।