Doa menjelang tidur: ALLAHUMMA ASLAMTU ALLAHUMMA ASALAMTU NAFSII ILAIKA ...
Imam Muslim : 4885حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى حَدَّثَنَا أَبُو دَاوُدَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ ح و حَدَّثَنَا ابْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ وَأَبُو دَاوُدَ قَالَا حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ عَمْرِو بْنِ مُرَّةَ قَالَ سَمِعْتُ سَعْدَ بْنَ عُبَيْدَةَ يُحَدِّثُ عَنْ الْبَرَاءِ بْنِ عَازِبٍ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَمَرَ رَجُلًا إِذَا أَخَذَ مَضْجَعَهُ مِنْ اللَّيْلِ أَنْ يَقُولَ اللَّهُمَّ أَسْلَمْتُ نَفْسِي إِلَيْكَ وَوَجَّهْتُ وَجْهِي إِلَيْكَ وَأَلْجَأْتُ ظَهْرِي إِلَيْكَ وَفَوَّضْتُ أَمْرِي إِلَيْكَ رَغْبَةً وَرَهْبَةً إِلَيْكَ لَا مَلْجَأَ وَلَا مَنْجَا مِنْكَ إِلَّا إِلَيْكَ آمَنْتُ بِكِتَابِكَ الَّذِي أَنْزَلْتَ وَبِرَسُولِكَ الَّذِي أَرْسَلْتَ فَإِنْ مَاتَ مَاتَ عَلَى الْفِطْرَةِ وَلَمْ يَذْكُرْ ابْنُ بَشَّارٍ فِي حَدِيثِهِ مِنْ اللَّيْلِ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى أَخْبَرَنَا أَبُو الْأَحْوَصِ عَنْ أَبِي إِسْحَقَ عَنْ الْبَرَاءِ بْنِ عَازِبٍ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لِرَجُلٍ يَا فُلَانُ إِذَا أَوَيْتَ إِلَى فِرَاشِكَ بِمِثْلِ حَدِيثِ عَمْرِو بْنِ مُرَّةَ غَيْرَ أَنَّهُ قَالَ وَبِنَبِيِّكَ الَّذِي أَرْسَلْتَ فَإِنْ مُتَّ مِنْ لَيْلَتِكَ مُتَّ عَلَى الْفِطْرَةِ وَإِنْ أَصْبَحْتَ أَصَبْتَ خَيْرًا حَدَّثَنَا ابْنُ الْمُثَنَّى وَابْنُ بَشَّارٍ قَالَا حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ أَبِي إِسْحَقَ أَنَّهُ سَمِعَ الْبَرَاءَ بْنَ عَازِبٍ يَقُولُا أَمَرَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَجُلًا بِمِثْلِهِ وَلَمْ يَذْكُرْ وَإِنْ أَصْبَحْتَ أَصَبْتَ خَيْرًا
हमसे कहिस है [मुहम्मद बिन अल मुत्सन्ना] हमसे कहिस है [अबू दाऊद] हमसे कहिस है [स्यूबाह] वइसने ई दूसर मार्ग से बतावा गा है, अऊर हमसे कहिस है [इब्न बसिस्यार] हमसे कहिस है [अब्दुर्रहमान] अऊर [अबू दाऊद] उ दुइनौ कहिन; हमका [स्यूबाह] [अमरू बिन मुर्रा] से बताइस है, उ कहिन; हम [स'द बिन उबैदा] का [अल बर्रा' बिन अजीब] से बतावत सुने रहेन कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बार जब उ सोवै जात रहेन तौ केहू से कहिन कि; 'अल्लूहुम्मा असलमतु नफसीई इलाइका, वाजजहतू वाझी इलाइका, वा-अलजा'तु झोहरी इलाइका, वफाव्वधु अमरीइ इलाइका रोघबतन वारोहबतन इलाइका, ला मालजा'आ वाला मलमान इलाइका, BIKITAABIKALLADZII ANZALTA WABIROSUULIKALLADZII ARSALTA 'हे ऐलाह हे मोर प्रभु, मैं तोहरे सामने समर्पण करत हउँ, मैं आपन कामकाज तोहरे सामने व्याकुल आशा के साथ समर्पित करत हउँ, काहे से कि तोहरे सजा से सुरक्षित कौनो शरण अऊर जगह नाहीं है सिवाय तोहरे शरण के। मैं तोहार किताब मा विश्वास करत हउँ जेका तू प्रकट किहे हउ अऊर मैं तोहरे दूत मा विश्वास करत हउ जेका तू भेजे हउ'। अगर ऊ रात मरि जात है, तौ आत्म-शुद्धता मा मरि जात है -फित्राह-। हालांकि [इब्न बस्यार] अपने हदीस मा लफाज़ का जिक्र नाहीं करत हैं; 'रात मा'। हमसे कहिन है [यह्या बिन यह्या] हमसे [अबुल अह्वाश] से [अबू इशाक] से [अल बर्रा' बिन 'अजीब] कहिन हैं; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने किसी से कहा: अरे फलाना, जब तुम सोना चाहत हो - अमरू बिन मुर्रा के हदीस के अनुसार - लेकिन उ लफाज़ का इस्तेमाल किहिन; अऊर हम तोहरे नबी मा बिसवास करत हई जेका तू भेजे अहा'। अगर तुम उ रात मर जइहौ, तौ तुम आत्म-शुद्धता मा मरि जइहौ -फित्राह-। 'अऊर जब तुम सुबह फिर से उठौ, तब तुमका भलाई मिली है'। हमसे [इब्न अल मुत्सना] अऊर [इब्न बसिस्यार] से कहा गा है कि उ दुइनौ कहिन; हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन जाफर] हमसे [स्यूबाह] [अबू इशाक] से कहिन है कि उ [अल बर्रा' बिन अजीब] का कहत सुने रहे; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने किसी से कहा, -एक समान हदीस के साथ।- लेकिन उ वाक्य का जिक्र नाहीं किहिन; 'अऊर जब तुम सुबह फिर से उठौ, तब तुमका भलाई मिली है'।