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Hak jamuan bertamu adalah maksimal tiga hari
Imam Tirmidzi : 1891حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُمَرَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ ابْنِ عَجْلَانَ عَنْ سَعِيدٍ الْمَقْبُرِيِّ عَنْ أَبِي شُرَيْحٍ الْكَعْبِيِّأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ الضِّيَافَةُ ثَلَاثَةُ أَيَّامٍ وَجَائِزَتُهُ يَوْمٌ وَلَيْلَةٌ وَمَا أُنْفِقَ عَلَيْهِ بَعْدَ ذَلِكَ فَهُوَ صَدَقَةٌ وَلَا يَحِلُّ لَهُ أَنْ يَثْوِيَ عِنْدَهُ حَتَّى يُحْرِجَهُوَفِي الْبَاب عَنْ عَائِشَةَ وَأَبِي هُرَيْرَةَ وَقَدْ رَوَاهُ مَالِكُ بْنُ أَنَسٍ وَاللَّيْثُ بْنُ سَعْدٍ عَنْ سَعِيدٍ الْمَقْبُرِيِّ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَأَبُو شُرَيْحٍ الْخُزَاعِيُّ هُوَ الْكَعْبِيُّ وَهُوَ الْعَدَوِيُّ اسْمُهُ خُوَيْلِدُ بْنُ عَمْرٍو وَمَعْنَى قَوْلِهِ لَا يَثْوِي عِنْدَهُ يَعْنِي الضَّيْفَ لَا يُقِيمُ عِنْدَهُ حَتَّى يَشْتَدَّ عَلَى صَاحِبِ الْمَنْزِلِ وَالْحَرَجُ هُوَ الضِّيقُ إِنَّمَا قَوْلُهُ حَتَّى يُحْرِجَهُ يَقُولُ حَتَّى يُضَيِّقَ عَلَيْهِ
हमसे [इब्नू अबू उमर] बतावा गा है, हमका [सुफयान] से [इब्नू अजलान] से [सैद अल मकबुरी] से [अबू सूरैह अल काबी] से बतावा गा है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'दौरा - सीमा - तीन दिन है, जबकि शरीयत के अनुसार दौरा के लंबाई एक दिन अऊर रात है। अऊर वहिके बाद जउन ओका दीन जात है, ऊ भिक्षा के लायक है। अऊर जब तक ऊ शाहिबुल बैत -घर के मालिक- का परेशानी न दे तब तक ओकरे लिए एक घर मा रात बितावै का हलाल नाहीं है'। हदीस ऐसिया अऊर अबू हुरैरा से भी रिवायत अहै। [मलिक बिन अनस] अऊर [अल लैट्स बिन सद] ने [सैद अल मकबुरी] से ई वर्णन किहिन है। अबू ईसा कहिन; ई एक प्रामाणिक हसन हदीस है। अबू सूरैह अल क'बी अल अदावी हैं, उनका नाम खुवैलिद बिन अमर है। उनके हिसाब से उनके शब्दन का मतलब: 'ला यत्स्वी' ई है कि मेहमानन का रात भर रुकै से शाहिबुल बैत का परेशानी न करै का चाही। अल हरज का मतलब है संकीर्णता या परेशानी। उनके वचन: 'हट्टा युहरिजाहू' का अर्थ है: जब तक उ ओका परेशानी न दे।