Kelembutan dan kesabaran Nabi mendengar keluhan orang
Imam Ahmad : 13535حَدَّثَنَا عَفَّانُ حَدَّثَنَا حَمَّادٌ عَنْ ثَابِتٍ عَنْ أَنَسٍ أَنَّ امْرَأَةً كَانَ فِي عَقْلِهَا شَيْءٌ فَقَالَتْ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّ لِي حَاجَةً فَقَالَ يَا أُمَّ فُلَانٍ انْظُرِي إِلَى أَيِّ الطَّرِيقِ شِئْتِ فَقَامَ مَعَهَا يُنَاجِيهَا حَتَّى قَضَتْ حَاجَتَهَا
हमसे [अफ्फान] बतावा गा है [हम्मद] से [थाबित] से [अनास] से एक औरत रही जेकर दिमाग बिल्कुल सही नाहीं रहा अऊर कहिस; हे अल्लाह के रसूल, मोहि एक जरूरत है। तब -रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम- ने कहा: 'हे उम्म फुलान, तुम जवन रास्ता चाहत हौ, वही राह पर चलौ' तब -रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम- उनके साथ खड़ा होइके उनके साथ तब तक बात किहिन जब तक कि -औरत- का काम खतम नाइ होइ गवा।