प्रतिनिधि हदीस
इमाम अबू दाऊद : 1987
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ حَدَّثَنَا أَبُو خَالِدٍ الْأَحْمَرُ عَنْ عَمْرِو بْنِ قَيْسٍ عَنْ أَبِي إِسْحَقَ عَنْ صِلَةَ قَالَكُنَّا عِنْدَ عَمَّارٍ فِي الْيَوْمِ الَّذِي يُشَكُّ فِيهِ فَأَتَى بِشَاةٍ فَتَنَحَّى بَعْضُ الْقَوْمِ فَقَالَ عَمَّارٌ مَنْ صَامَ هَذَا الْيَوْمَ فَقَدْ عَصَى أَبَا الْقَاسِمِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ
हमें [मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह बिन नुमैर] ने बताया है, हमें [अबू खालिद अल अहमर] ने [अम्र बिन क़ैस] से [अबू इसहाक] से, [शिला] से बताया है, उन्होंने कहा; हम एक शक के दिन [अम्मार] के साथ थे, फिर वह एक बकरा ले आया और कुछ लोग अलग हो गए। फिर अम्मार ने कहा; जो कोई भी इस दिन रोज़ा रखता है, उसने सचमुच अबू अल कासिम (पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की नाफ़रमानी की है।