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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Malaikat jibril mengajar tentang enam dasar iman, lima dasar islam, dan ihsan
Imam Ahmad : 16541

حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ أَخْبَرَنَا شُعَيْبٌ قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ أَبِي حُسَيْنٍ حَدَّثَنَا شَهْرُ بْنُ حَوْشَبٍ عَنْ عَامِرٍ أَوْ أَبِي عَامِرٍ أَوْ أَبِي مَالِكٍ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَيْنَمَا هُوَ جَالِسٌ فِي مَجْلِسٍ فِيهِ أَصْحَابُهُ جَاءَهُ جِبْرِيلُ عَلَيْهِ السَّلَام فِي غَيْرِ صُورَتِهِ يَحْسِبُهُ رَجُلًا مِنْ الْمُسْلِمِينَ فَسَلَّمَ عَلَيْهِ فَرَدَّ عَلَيْهِ السَّلَامَ ثُمَّ وَضَعَ جِبْرِيلُ يَدَهُ عَلَى رُكْبَتَيْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَقَالَ لَهُ يَا رَسُولَ اللَّهِ مَا الْإِسْلَامُ فَقَالَ أَنْ تُسْلِمَ وَجْهَكَ لِلَّهِ وَأَنْ تَشْهَدَ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ وَتُقِيمَ الصَّلَاةَ وَتُؤْتِيَ الزَّكَاةَ قَالَ فَإِذَا فَعَلْتُ ذَلِكَ فَقَدْ أَسْلَمْتُ قَالَ نَعَمْ ثُمَّ قَالَ مَا الْإِيمَانُ قَالَ أَنْ تُؤْمِنَ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ وَالْمَلَائِكَةِ وَالْكِتَابِ وَالنَّبِيِّينَ وَالْمَوْتِ وَالْحَيَاةِ بَعْدَ الْمَوْتِ وَالْجَنَّةِ وَالنَّارِ وَالْحِسَابِ وَالْمِيزَانِ وَالْقَدَرِ كُلِّهِ خَيْرِهِ وَشَرِّهِ قَالَ فَإِذَا فَعَلْتُ ذَلِكَ فَقَدْ آمَنْتُ قَالَ نَعَمْ ثُمَّ قَالَ مَا الْإِحْسَانُ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ أَنْ تَعْبُدَ اللَّهَ كَأَنَّكَ تَرَاهُ فَإِنَّكَ إِنْ كُنْتَ لَا تَرَاهُ فَهُوَ يَرَاكَ قَالَ فَإِذَا فَعَلْتُ ذَلِكَ فَقَدْ أَحْسَنْتُ قَالَ نَعَمْ وَنَسْمَعُ رَجْعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِلَيْهِ وَلَا يُرَى الَّذِي يُكَلِّمُهُ وَلَا يُسْمَعُ كَلَامُهُ قَالَ فَمَتَى السَّاعَةُ يَا رَسُولَ اللَّهِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سُبْحَانَ اللَّهِ خَمْسٌ مِنْ الْغَيْبِ لَا يَعْلَمُهَا إِلَّا اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ { إِنَّ اللَّهَ عِنْدَهُ عِلْمُ السَّاعَةِ وَيُنَزِّلُ الْغَيْثَ وَيَعْلَمُ مَا فِي الْأَرْحَامِ وَمَا تَدْرِي نَفْسٌ مَاذَا تَكْسِبُ غَدًا وَمَا تَدْرِي نَفْسٌ بِأَيِّ أَرْضٍ تَمُوتُ إِنَّ اللَّهَ عَلِيمٌ خَبِيرٌ } فَقَالَ السَّائِلُ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنْ شِئْتَ حَدَّثْتُكَ بِعَلَامَتَيْنِ تَكُونَانِ قَبْلَهَا فَقَالَ حَدِّثْنِي فَقَالَ إِذَا رَأَيْتَ الْأَمَةَ تَلِدُ رَبَّهَا وَيَطُولُ أَهْلُ الْبُنْيَانِ بِالْبُنْيَانِ وَعَادَ الْعَالَةُ الْحُفَاةُ رُءُوسَ النَّاسِ قَالَ وَمَنْ أُولَئِكَ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ الْعَرِيبُ قَالَ ثُمَّ وَلَّى فَلَمَّا لَمْ نَرَ طَرِيقَهُ بَعْدُ قَالَ سُبْحَانَ اللَّهِ ثَلَاثًا هَذَا جِبْرِيلُ جَاءَ لِيُعَلِّمَ النَّاسَ دِينَهُمْ وَالَّذِي نَفْسُ مُحَمَّدٍ بِيَدِهِ مَا جَاءَنِي قَطُّ إِلَّا وَأَنَا أَعْرِفُهُ إِلَّا أَنْ تَكُونَ هَذِهِ الْمَرَّةُ حَدَّثَنَا أَبُو النَّضْرِ قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْحَمِيدِ قَالَ حَدَّثَنِي شَهْرُ بْنُ حَوْشَبٍ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ نَهَى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ أَصْنَافِ النِّسَاءِ وَذَكَرَ الْحَدِيثَ وَذَكَرَ مُلْصِقًا بِهِ قَالَ جَلَسَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَجْلِسًا فَأَتَاهُ جِبْرِيلُ عَلَيْهِ السَّلَام فَجَلَسَ بَيْنَ يَدَيْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَذَكَرَ الْحَدِيثَ وَقَالَ فِيهِ إِنْ شِئْتَ حَدَّثْتُكَ بِمَعَالِمَ لَهَا دُونَ ذَلِكَ قَالَ أَجَلْ يَا رَسُولَ اللَّهِ فَحَدِّثْنِي قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا رَأَيْتَ الْأَمَةَ وَلَدَتْ رَبَّتَهَا فَذَكَرَ الْحَدِيثَ

हमरा सब के कहलक अछि [अबू अल यमन] हमरा सब के कहलक अछि [स्युआइब] कहलनि; हमरा सब के कहलक अछि [अब्दुल्लाह बिन अबू हुसैन] हमरा सब के [शहर बिन हौस्याब] के [अमीर] या [अबू अमीर] या [अबू मलिक] स कहने छथि, पैगम्बर सल्लल्लाहुअलैहिवसल्लम, जखन ओ अपन साथी सब के उपस्थिति में मजलिस में बैसल छलाह, त जिब्रिल अलैहिस्सलम अपन मूल रूप में नै आयल छलाह जेकरा ओ मुसलमान स एकटा आदमी बुझैत छलाह, तखन ओ कहलनि हुनका नमस्कार। ओ जवाब देलनि, जिब्रिल नबी सल्लल्लाहु अलैहिवसल्लम के दू ठेहुन पर हाथ राखि देलखिन्ह, फेर हुनका सं पूछलखिन्ह जे हे अल्लाह के रसूलुल्लाह इस्लाम की अछि? ओ जवाब देलनि जे अहाँ अपन मुँह अल्लाह के समक्ष राखू आ गवाही दैत छी जे अल्लाह के अलावा कोनो देवता नहि छथि आ मुहम्मद हुनकर गुलाम आ रसूलुल्लाह छथि। अहाँ नमाज करू आ जकात दैत छी। -जिब्रिल अलैहिस्सलम- कहलक; 'जँ हम एहन केने छी त' हम इस्लाम स्वीकार क' लेने छी' ओ उत्तर देलनि, 'हँ', तखन ओ पुछलनि, 'ईमान की होइत छैक?' ओ उत्तर देलनि, 'अहाँ अल्लाह, अंतिम दिन, फरिश्ता, किताब, नबी, मृत्यु आ मृत्युक बादक जीवन, स्वर्ग, नरक, हिसाब-किताब, तराजू आ सभ भाग्य, अधलाह आ अधलाह, पर विश्वास करैत छी।' -जिब्रिल अलैहिस्सलम- कहलक; 'जँ हम एहन करब त' हमरा विश्वास अछि'। ओ उत्तर देलनि, 'हँ'। तखन पुछलखिन, 'इहसान की होइत छैक? हे अल्लाह के रसूलुल्लाह' ओ जवाब देलखिन, 'अहाँ अल्लाह के एना पूजा करैत छी जेना हुनका देखैत छी, जँ अहाँ से नहि क' सकैत छी तखन ओ अहाँ के देखि रहल छथि' | -जिब्रिल 'अलैहिस्सलम- कहलक; 'जँ हम से करब त' हम इहसान क' लेने छी'। ओ उत्तर देलनि, 'हँ'। आरू हम्में रसुलुल्लाह सल्लल्लाहुअलैहिवसल्लम केरऽ जवाब सुनलऽ छेलियै आरू हम्में नै देखै छेलियै कि कोय हुनका बोलै लेली आमंत्रित करी रहलऽ छै, आरू हुनकऽ आवाज भी नै सुनलऽ जाब॑ सकलऽ छेलै । -जिब्रिल अलैहिस्सलम- कहलक; 'कयामतक दिन कहिया होयत? हे अल्लाह के रसूलुल्लाह,’ रसुलुल्लाह शल्लल्लाहुअलैहिवसल्लम कहलनि: ‘महिमा अल्लाह के हो, पांच अनदेखल बात जे अल्लाह अज्जवाजल्ला के अलावा कियो नहि जनैत अछि। क़यामत के दिन के ज्ञान अल्लाह के ही पता छै, बरसात करै छै, कोख में की छै से पता छै, आ आत्मा के नै पता छै कि काल्ह की होतै। आ ने आत्मा केँ बुझल छैक जे ओ कतय मरि जायत। सचमुच अल्लाह सर्वज्ञ, सर्वज्ञ छथि'। तखन पुछनिहार कहलक; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, जँ अहाँ चाहब त' हम अहाँ केँ दू टा संकेत बता देब जे पहिने होयत,' तखन ओ कहलनि: 'हमरा बताउ!' ओ उत्तर देलनि, 'जँ अहाँ कोनो दास केँ अपन मालिक केँ जन्म दैत देखैत छी, तखन बहुत लोक भवन केँ ऊपर उठौने अछि, आ एकटा गरीब आ जूताहीन व्यक्ति अछि जे लोकक नेता बनि जाइत अछि,' -'अमीर, अबू 'अमीर वा अबू मलिक रदलियाल्लाहुअनहुम- कहलनि; 'ओ व्यक्ति के अछि, हे अल्लाह के रसूलुल्लाह?' तखन ओ चलि गेलाह, जखन हम सभ हुनका दिस नहि तकैत रही तखन ओ कहलनि: 'अल्लाह केर महिमा,' तीन बेर, 'ई जिब्रिल 'सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हुनका पर छथि जे लोक केँ ओकर धर्म सिखाब' लेल आयल छथि।' जिनकर हाथ मे मुहम्मदक आत्मा छनि, हुनका द्वारा, जाबत धरि हमरा दोसर बात नहि बुझल रहैत, ओ हमरा लग नहि आबि सकैत छलाह'। हमरा सब के कहल गेल अछि [अबू नडलर] कहलनि; हमरा सभकेँ कहलक अछि [अब्दुल हामिद] कहलनि; हमरा [सिहर बिन हौस्याब] [इब्न अब्बास] स कहलक अछि; रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहिवसल्लम एक बेर विभिन्न तरहक महिला के विवाह करय पर रोक लगा देने छलाह, फेर हदीस के पूरा जिक्र केलनि आ ओ कहलनि जे जिब्रिल के ठेहुन रसुलुल्लाह शल्लल्लाहुअलैहिवसल्लम के ठेहुन सं जुड़ल छल -ओ अगिला बेर कहलनि-, 'रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहिवसल्लम एकटा बैसार मे बैसल तखन जिब्रिली अलैहिस्सलम आबि गेलाह, बैसल छलाह रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहिवसल्लम के सामने, आरू वू हदीस के पूरा जिक्र करी क॑ जोड़लकै, ‘अहाँ चाहै छियै त॑ हम्में एकरा अलावा दुनिया के अंत के संकेत के बारे म॑ भी बताबै । -जिब्रिल अलैहिस्सलम- कहलक; 'हँ। हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, बताइए'। रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहिवसल्लम कहलनि जे, जँ अहाँ कोनो दास केँ अपन मालिक केँ जन्म दैत देखैत छी त’ हदीसक पूरा जिक्र करू’।

Hadith Corroboration :

Imam Ahmad : 49, 60, 77, 418, 444, 497, 2024, 2183, 2437, 2775, 3477, 3561, 3572, 3584, 3721, 3954, 4032, 4536, 4887, 4975, 5770, 5902, 6309, 6555, 7620, 8040, 8042, 8472, 9137, 9301, 11047, 14180, 15617, 16541, 16851, 19585, 20261, 20354, 20479, 20678, 21908, 22046, 22756, 24444
Imam Bukhari : 981, 4261, 4405, 4477, 6831, 6876
Imam Abu Dawud : 4405, 4420, 4425
Imam Tirmidzi : 3314, 3452
Imam Darimi : 2573