Hadith Representative
Tidak ada fara' dan atirah
Imam Tirmidzi : 1432حَدَّثَنَا مَحْمُودُ بْنُ غَيْلَانَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ ابْنِ الْمُسَيَّبِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا فَرَعَ وَلَا عَتِيرَةَ وَالْفَرَعُ أَوَّلُ النِّتَاجِ كَانَ يُنْتَجُ لَهُمْ فَيَذْبَحُونَهُقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ نُبَيْشَةَ وَمِخْنَفِ بْنِ سُلَيْمٍ وَأَبِي الْعُشَرَاءِ عَنْ أَبِيهِ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَالْعَتِيرَةُ ذَبِيحَةٌ كَانُوا يَذْبَحُونَهَا فِي رَجَبٍ يُعَظِّمُونَ شَهْرَ رَجَبٍ لِأَنَّهُ أَوَّلُ شَهْرٍ مِنْ أَشْهُرِ الْحُرُمِ وَأَشْهُرِ الْحُرُمِ رَجَبٌ وَذُو الْقَعْدَةِ وَذُو الْحِجَّةِ وَالْمُحَرَّمُ وَأَشْهُرُ الْحَجِّ شَوَّالٌ وَذُو الْقَعْدَةِ وَعَشْرٌ مِنْ ذِي الْحِجَّةِ كَذَلِكَ رُوِيَ عَنْ بَعْضِ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَغَيْرِهِمْ فِي أَشْهُرِ الْحَجِّ
हमसे कहिन [महमुद बिन घैलान] कहिन, हमसे कहिन [अब्दुर्राजाक] कहिन, हमसे कहिन [ममर] से [अज जुहरी] से [इब्नुल मुसय्यब] से [अबू हुरैरा] उ कहिन, 'रसूलल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'कोई फरारा या अबरात नाहीं है'। फरा' पैला बछड़ा पैदा होय, तब वध करैं'॥ उ कहिन; 'इ अध्याय मा नुबैस्या, मिखनफ बिन सुलेम अऊर अबुल 'उस्यारा, अपने पिता से' से समान हदीस हैं। अबू ईसा कहिन; 'ई हदीस हसन प्रामाणिक है। जबकि अतिराह से का मतलब है उ बलिदान जवन उ महीना का सम्मान करै के लिए रजब के महीना मा वध करत हैं। काहे से कि रजब हराम महीना के पहिला महीना होत है। हराम महीना खुद रजब, ढुल कादा, ढुल हिज्जा अऊर मोहर्रम हैं। इ बीच, हज के महीना श्वाल, दज़ुल कादाह अऊर दस दिन दज़ुल हिज्जा हैं। हज के महीना के बारे मा पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम अऊर ओनके अलावा कुछ साथियन से ई बात रिवायत कीन गै रही।