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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
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- Shalat Wajib dan Sunnah Keutamaan shalat dan perintah shalat Nanti datang penguasa mengakhirkan shalat maka shalatlah tepat waktunya
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Nanti datang penguasa mengakhirkan shalat maka shalatlah tepat waktunya
Imam Nasa'i : 770

أَخْبَرَنَا زِيَادُ بْنُ أَيُّوبَ قَالَ حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ ابْنُ عُلَيَّةَ قَالَ حَدَّثَنَا أَيُّوبُ عَنْ أَبِي الْعَالِيَةِ الْبَرَّاءِ قَالَأَخَّرَ زِيَادٌ الصَّلَاةَ فَأَتَانِي ابْنُ صَامِتٍ فَأَلْقَيْتُ لَهُ كُرْسِيًّا فَجَلَسَ عَلَيْهِ فَذَكَرْتُ لَهُ صُنْعَ زِيَادٍ فَعَضَّ عَلَى شَفَتَيْهِ وَضَرَبَ عَلَى فَخِذِي وَقَالَ إنِّي سَأَلْتُ أَبَا ذَرٍّ كَمَا سَأَلْتَنِي فَضَرَبَ فَخِذِي كَمَا ضَرَبْتُ فَخْذَكَ وَقَالَ إِنِّي سَأَلْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَمَا سَأَلْتَنِي فَضَرَبَ فَخِذِي كَمَا ضَرَبْتُ فَخِذَكَ فَقَالَ عَلَيْهِ الصَّلَاة وَالسَّلَامُ صَلِّ الصَّلَاةَ لِوَقْتِهَا فَإِنْ أَدْرَكْتَ مَعَهُمْ فَصَلِّ وَلَا تَقُلْ إِنِّي صَلَّيْتُ فَلَا أُصَلِّي

हमका [जियाद बिन अय्यूब] रिपोर्ट किहिन हैं, उ कहिन; हमका [इस्माइल बिन उलेय्याह] सूचित किहिन हैं, उ कहिन; हमका [अय्यूब] [अबू अल आलिया अल बर्रा] से बताइस है, उ कहिन; 'जियाद ने अपनी नमाज समाप्त की, तब [इब्न शमित] मेरे पास आए। फिर हम ओका एक कुर्सी पर बैठै का निमंत्रण दिहेन। अऊर उ बइठ गवा। फिर हम तुरंत अबरी के हरकत के बारे मा बतायेन। फिर उ आपन दुइनौ होंठ काटिन अऊर मोर जांघ मा मारिस, अऊर कहिन, 'मैं एक बार [अबू ज़ार] से पूछे रहेन कि तुम मोसे का पूछे रहेव, अऊर उ -अबू ज़ार- मोर जांघ मा वइसने मारिस जइसे हम तोहरे जांघ मा मारे रहेन। उ - अबू ज़ार - ने कहा, 'मैंने एक बार रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से पूछा कि तुम मुझसे क्या पूछा था, फिर उन्होंने सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मेरी जांघ मा मारा जैसे मैं तुम्हारी जांघ मारा ! तब उन्होंने शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहा कि सही समय पर नमाज पढ़ो। अगर आप खुद का उनके साथ प्रार्थना करत पावत हैं -दुष्ट शासक/इमाम-, तौ उनके साथ प्रार्थना करा अऊर ई न कहौ कि 'मैं प्रार्थना किहे हौं तौ मैं अब नमाज नाहीं करब'।

Hadith Corroboration :

Imam Ahmad : 15127, 15137, 16685, 17430, 17485, 20344, 20361, 20453, 20515, 21012, 21625, 21629, 21722
Imam Muslim : 830, 1031
Imam Abu Dawud : 368, 369
Imam Nasa'i : 770, 850
Imam Ibnu Majah : 1246, 1247