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Ruqyah dengan Al-Fatihah merupakan ruqyah yang paling mujarab
Imam Tirmidzi : 1989حَدَّثَنَا هَنَّادٌ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ جَعْفَرِ بْنِ إِيَاسٍ عَنْ أَبِي نَضْرَةَ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ قَالَبَعَثَنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي سَرِيَّةٍ فَنَزَلْنَا بِقَوْمٍ فَسَأَلْنَاهُمْ الْقِرَى فَلَمْ يَقْرُونَا فَلُدِغَ سَيِّدُهُمْ فَأَتَوْنَا فَقَالُوا هَلْ فِيكُمْ مَنْ يَرْقِي مِنْ الْعَقْرَبِ قُلْتُ نَعَمْ أَنَا وَلَكِنْ لَا أَرْقِيهِ حَتَّى تُعْطُونَا غَنَمًا قَالَ فَأَنَا أُعْطِيكُمْ ثَلَاثِينَ شَاةً فَقَبِلْنَا فَقَرَأْتُ عَلَيْهِ الْحَمْدُ لِلَّهِ سَبْعَ مَرَّاتٍ فَبَرَأَ وَقَبَضْنَا الْغَنَمَ قَالَ فَعَرَضَ فِي أَنْفُسِنَا مِنْهَا شَيْءٌ فَقُلْنَا لَا تَعْجَلُوا حَتَّى تَأْتُوا رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ فَلَمَّا قَدِمْنَا عَلَيْهِ ذَكَرْتُ لَهُ الَّذِي صَنَعْتُ قَالَ وَمَا عَلِمْتَ أَنَّهَا رُقْيَةٌ اقْبِضُوا الْغَنَمَ وَاضْرِبُوا لِي مَعَكُمْ بِسَهْمٍقَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ وَأَبُو نَضْرَةَ اسْمُهُ الْمُنْذِرُ بْنُ مَالِكِ بْنِ قُطَعَةَ وَرَخَّصَ الشَّافِعِيُّ لِلْمُعَلِّمِ أَنْ يَأْخُذَ عَلَى تَعْلِيمِ الْقُرْآنِ أَجْرًا وَيَرَى لَهُ أَنْ يَشْتَرِطَ عَلَى ذَلِكَ وَاحْتَجَّ بِهَذَا الْحَدِيثِ وَجَعْفَرُ بْنُ إِيَاسٍ هُوَ جَعْفَرُ بْنُ أَبِي وَحْشِيَّةَ وَهُوَ أَبُو بِشْرٍ وَرَوَى شُعْبَةُ وَأَبُو عَوَانَةَ وَغَيْرُ وَاحِدٍ عَنْ أَبِي الْمُتَوَكِّلِ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ هَذَا الْحَدِيثَ
हमसे [हन्नाद] बताइस है, हमसे [अबू मुआविया] से [अल अमासी] से [जाफर बिन इयास] से [अबू नदलाह] से [सैद बिन अल खुद्री] से कहिस है, उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बार मोका एक सरियाह मा भेजिन। फिर हम एक खास लोगन के पास रुकेन अऊर मनोरंजन करै का कहेन, लेकिन उ लोग भोजन प्रदान नाहीं करै चाहत रहें। तब उनके नेता का डंक लाग, तौ हम तुरतै उनके लगे गयेन। उन्होंने पूछा कि तुम्हारे बीच कोई ऐसा है जो बिच्छू के डंक से रुकिया कर सके? हम कहेन, 'हाँ, हम आदमी हई। लेकिन जब तक तुम हमका बकरी नाहीं देब तब तक हम रुकिया नाहीं करब'। ऊ कहिस, 'तीन बकरी देब'। त हम सहमत होइ गयेन, अऊर हम सात बार 'अल हम्दुलिल्लाह' पढ़ के रुकिया करै लागेन, जब तक कि उ जाग नाहीं गवा अऊर हम तुरंत बकरी लइ लिहेन। मुला हमरे मन मा तीनौ बकरियन के बारे मा एक तरह कै संका पैदा भै। त हम कहेन, 'इका खाए मा जल्दबाजी न करौ, जब तक तुम रसूल सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम से न मिल जाओ'। जब हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम से मिलेन, त हम तुरंत ओनका बतायेन कि हम का किहेन। फिर कहिन: 'का तुम नाहीं जानत हौ कि ई सही मा रुकिया है? बकरी लइ ल्या, अऊर मोका एक हिस्सा दइ द्या'। अबू ईसा कहिन; ई एक हसन हदीस है। अबू नदलाह का नाम अल मुंडज़िर बिन मलिक बिन कुथाआह है। ऐश शफी एक मुअल्लिम का कुरान पढ़ावै के लिए वेतन लेय के अनुमति देत है। अऊर उनके अनुसार, उ अइसन शर्त प्रदान कर सकत है अऊर उ इ हदीस से बहस करत है। जाफर बिन इयास जाफर बिन अबू वह्सिय्याह हैं, अर्थात् अबू बिसिर। [स्यू'बाह] अऊर [अबू 'अवाना] के साथ-साथ एक से अधिक रावी ने [अबू अल मुतवक्कल] से [अबू सैद] से ई हदीस सुनाई है।