Imam Ahmad : 3370
حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ أَنْبَأَنَا مُغِيرَةُ عَنْ أَبِي رَزِينٍ عَنْ ابْنِ مَسْعُودٍ قَالَ قَرَأْتُ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْ سُورَةِ النِّسَاءِ فَلَمَّا بَلَغْتُ هَذِهِ الْآيَةَ { فَكَيْفَ إِذَا جِئْنَا مِنْ كُلِّ أُمَّةٍ بِشَهِيدٍ وَجِئْنَا بِكَ عَلَى هَؤُلَاءِ شَهِيدًا } قَالَ فَفَاضَتْ عَيْنَاهُ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ
हमसे [हुसैम] [अबू रज़िन] से [इब्न मसूद] से हमका [मुघिराह] से रिपोर्ट किहिन रहैं, उ कहिन; मैं रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम को अन निसा का पत्र पढ़ रहा था, जब मैं इस श्लोक पर आया: -तो काफिरों का क्या होगा, अगर हम हर समुदाय से एक गवाह - एक दूत - लाएँगे और हम तुमको - मुहम्मद - उनके लिए गवाह के रूप में - आपके लोग के रूप में - लाएँगे, उन्होंने कहा; तब आँसू बहाए शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ॥