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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Rasulullah apabila bertakbir maka beliau mengangkat tangannya sejajar dengan pundaknya
Imam Tirmidzi : 3345

حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ عَلِيٍّ الْخَلَّالُ حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ دَاوُدَ الْهَاشِمِيُّ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ مُوسَى بْنِ عُقْبَةَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الْفَضْلِ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْأَعْرَجِ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي رَافِعٍ عَنْ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍعَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ كَانَ إِذَا قَامَ إِلَى الصَّلَاةِ الْمَكْتُوبَةِ رَفَعَ يَدَيْهِ حَذْوَ مَنْكِبَيْهِ وَيَصْنَعُ ذَلِكَ أَيْضًا إِذَا قَضَى قِرَاءَتَهُ وَأَرَادَ أَنْ يَرْكَعَ وَيَصْنَعُهَا إِذَا رَفَعَ رَأْسَهُ مِنْ الرُّكُوعِ وَلَا يَرْفَعُ يَدَيْهِ فِي شَيْءٍ مِنْ صَلَاتِهِ وَهُوَ قَاعِدٌ فَإِذَا قَامَ مِنْ سَجْدَتَيْنِ رَفَعَ يَدَيْهِ كَذَلِكَ فَكَبَّرَ وَيَقُولُ حِينَ يَفْتَتِحُ الصَّلَاةَ بَعْدَ التَّكْبِيرِ وَجَّهْتُ وَجْهِيَ لِلَّذِي فَطَرَ السَّمَوَاتِ وَالْأَرْضَ حَنِيفًا وَمَا أَنَا مِنْ الْمُشْرِكِينَ إِنَّ صَلَاتِي وَنُسُكِي وَمَحْيَايَ وَمَمَاتِي لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ لَا شَرِيكَ لَهُ وَبِذَلِكَ أُمِرْتُ وَأَنَا مِنْ الْمُسْلِمِينَ اللَّهُمَّ أَنْتَ الْمَلِكُ لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ سُبْحَانَكَ أَنْتَ رَبِّي وَأَنَا عَبْدُكَ ظَلَمْتُ نَفْسِي وَاعْتَرَفْتُ بِذَنْبِي فَاغْفِرْ لِي ذُنُوبِي جَمِيعًا إِنَّهُ لَا يَغْفِرُ الذُّنُوبَ إِلَّا أَنْتَ وَاهْدِنِي لِأَحْسَنِ الْأَخْلَاقِ لَا يَهْدِي لِأَحْسَنِهَا إِلَّا أَنْتَ وَاصْرِفْ عَنِّي سَيِّئَهَا لَا يَصْرِفُ عَنِّي سَيِّئَهَا إِلَّا أَنْتَ لَبَّيْكَ وَسَعْدَيْكَ أَنَا بِكَ وَإِلَيْكَ وَلَا مَنْجَا وَلَا مَلْجَأَ إِلَّا إِلَيْكَ أَسْتَغْفِرُكَ وَأَتُوبُ إِلَيْكَ ثُمَّ يَقْرَأُ فَإِذَا رَكَعَ كَانَ كَلَامُهُ فِي رُكُوعِهِ أَنْ يَقُولَ اللَّهُمَّ لَكَ رَكَعْتُ وَبِكَ آمَنْتُ وَلَكَ أَسْلَمْتُ وَأَنْتَ رَبِّي خَشَعَ سَمْعِي وَبَصَرِي وَمُخِّي وَعَظْمِي لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ فَإِذَا رَفَعَ رَأْسَهُ مِنْ الرُّكُوعِ قَالَ سَمِعَ اللَّهُ لِمَنْ حَمِدَهُ ثُمَّ يُتْبِعُهَا اللَّهُمَّ رَبَّنَا وَلَكَ الْحَمْدُ مِلْءَ السَّمَوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمِلْءَ مَا شِئْتَ مِنْ شَيْءٍ بَعْدُ فَإِذَا سَجَدَ قَالَ فِي سُجُودِهِ اللَّهُمَّ لَكَ سَجَدْتُ وَبِكَ آمَنْتُ وَلَكَ أَسْلَمْتُ وَأَنْتَ رَبِّي سَجَدَ وَجْهِي لِلَّذِي خَلَقَهُ وَشَقَّ سَمْعَهُ وَبَصَرَهُ تَبَارَكَ اللَّهُ أَحْسَنُ الْخَالِقِينَ وَيَقُولُ عِنْدَ انْصِرَافِهِ مِنْ الصَّلَاةِ اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي مَا قَدَّمْتُ وَمَا أَخَّرْتُ وَمَا أَسْرَرْتُ وَمَا أَعْلَنْتُ أَنْتَ إِلَهِي لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَقَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَالْعَمَلُ عَلَى هَذَا عِنْدَ الشَّافِعِيِّ وَبَعْضُ أَصْحَابِنَا وَأَحْمَدُ لَا يَرَاهُ و قَالَ بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْ أَهْلِ الْكُوفَةِ وَغَيْرِهِمْ يَقُولُ هَذَا فِي صَلَاةِ التَّطَوُّعِ وَلَا يَقُولُهُ فِي الْمَكْتُوبَةِ سَمِعْت أَبَا إِسْمَعِيلَ يَعْنِي التِّرْمِذِيَّ مُحَمَّدَ بْنَ إِسْمَعِيلَ بْنِ يُوسُفَ يَقُولُ سَمِعْتُ سُلَيْمَانَ بْنَ دَاوُدَ الْهَاشِمِيَّ يَقُولُ وَذَكَرَ هَذَا الْحَدِيثَ فَقَالَ هَذَا عِنْدَنَا مِثْلُ حَدِيثِ الزُّهْرِيِّ عَنْ سَالِمٍ عَنْ أَبِيهِ

कांई उण आपां नै बतायो है [अल हसन बिन अली अल खल्लाल] आपां नै बतायो है [सुलेमान बिन दाउद अल हसीमी] आपां नै बतायो है [अब्दुर रहमान बिन अबू अज जिनाद]? [मूसा बिन उकबा] सूं? [अब्दुल्लाह बिन अल फदल] सूं? [अब्दुर रहमान अल अ'राज] सूं? ['उबैदुल्लाह बिन अबू रफी'] सूं? [अली बिन अबू तालिब] सूं रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम सूं कैयो कै जद वै फर्ज नमाज पढ़ण सारू उठिया तो वै आपरा हाथां नै आपरै कंधा रै समानांतर उठाया, अर जद वै आपरी पढ़ाई पूरी कर ली अर प्रणाम करण नै त्यार हा, अर जद वै प्रणाम करण सूं आपरो माथो उठायो तो वै आ ई करियो। अर जद बो बैठ्यो हो जणा बो प्रार्थना रै वास्तै आपरा हाथ कोनी उठाया। जद बो दो सजदा सूं उठ्यो तो बो दोनूं हाथ उठार तकबीर बोल्यो। तकबीर रै बाद नमाज री शुरुआत करतां बगत बां कैयो- वज्जाहतू वाझिया लिल्लाज़ी फथरास समावति वाल अर्धा वा मां आना मीनल मुस्यरीकीं। इन्ना शलाति वा नुसुकी वा मह्याया वा ममाती लिल्लाही रब्बील 'आलमीना ला स्यारीकलाहु वा बिदजालीका उमिर्तु वा आना मीनल मुस्लिमीं। अल्लाहुम्मा अंतल मलिकु ला इलाहा इल्ला अन्ता सुभानका, अन्ता रब्बी, वा अना 'अबदुका, झलामतु नफसी वा'तराफ्तू बिदजानबी फघफिर एलआईआई डज़ुनूबीई जमीआन इन्नाहु ला याघुज़ुनफिउन वुअन लियाहसानिल अखलाकी, ला याहदी लियाहसानिहा इल्ला अन्ता वाशरीफ 'अन्नी सय्याहा, ला यश्रीफू 'अन्नी सययहा इल्ला अन्ता, लब्बैका वा सा'दैका अना बीका वा इलायवा वामाना लाजा-लाजा इल्ला इलाइका। अस्ताघफिरुका वा अतुबु इलैक'। -मैं आपरो मुंडो उण री तरफ मोड़ूं जिण आकास अर धरती नै बणायो है अर मैं शर्क करण आळा लोगां मांय सूं कोनी हूं। साची, म्हारी प्रार्थना, म्हारो बलिदान अर म्हारो जीवन-मरण अल्लाह रै वास्तै है, जगत रा स्वामी, उणरै वास्तै कोई साथी कोनी है अर इण वास्तै म्हनैं हुकम दियो गयो है अर म्हैं उण लोगां मांय सूं एक हूं जका अधीन है। हे अल्लाह, थूं राजा है, थारै सिवाय कोई भगवान कोनी है, थारी महिमा, थूं म्हारो भगवान है, अर मैं थारो सेवक हूं। म्हैं खुद माथै अन्याय करियो है अर म्हैं आपरा पापां नै कबूल कर लियो है, इण वास्तै म्हारा सगळा पापां नै माफ कर दो, क्यूंकै साची में थारै अलावा कोई भी पापां नै माफ नीं कर सकै। अर म्हनै आच्छी नैतिकता राखण सारू मार्गदर्शन दो, थारै अलावा कोई भी म्हनै आच्छी नैतिकता राखण सारू मार्गदर्शन कोनी दे सकै। मैं थारी बुलावा नै पूरा करूं, थारी मदद मांगूं अर थारै मांय शरण लेऊं, अर थारै सिवाय कोई सुरक्षित अर शरण री जगां कोनी है। मैं थारै सूं माफी मांगूं अर थारै सूं पश्चाताप करूं। फेर बो चिट्ठी पढ़ी अर जद बो झुक्यो तो झुकबा रै मांय बां रा सबद हा: अल्लाहुम्मा लाका राका'तु वा बीका आमंतु, वा लाका अस्लमतु, वा अंता रब्बी खस्या'आ सम'ई फ्रॉम वा बशरी, वा मुख्ख्खिल्लाम, अमिल्ला 'आलमीन'। अर जद बो झुकबा सूं आपरो माथो उठायो तो बो पढ़्यो: 'समीअल्लाहु लिमान हमीदाह'। -अल्लाह बां री तारीफ करण आळा री सुणै है-। फेर बां इणरै साथै इण सबदां नै भी लिख्यो: अल्लाहुम्मा रब्बाना वालकल हमदू मिल-अस समावति वाल अर्धी वा मिल-आ मा सी`ता मिन स्याई-इन बा'दू ' -हे, अल्लाह म्हारा प्रभु, थारी स्तुति आकाश अर धरती री तरै भरी हुवै अर इणरै बाद थूं जितरी भरी हुवैला-। अर जद बो सजदा करियो, तो आपरै सजदा रै मांय बो बोल्यो: अल्लाहुम्मा लका सजदतु वा बीका आमंतु वा लाका असलमतु, वा अंतरा रब्बी, सजादा वाझी लिल्लाडजी खलाकाहू वा स्याका सामहू वा तलाहुलाहुलाहुलाहुलाहुलाहुलाहुलाकाहू। -हे अल्लाह, मैं थारै सामी सजदा करूं हूं, अर थारै माथै मैं विश्वास करूं हूं, अर थारै सामी मैं समर्पण करूं हूं, अर थूं म्हारो भगवान है। म्हारो चेहरो उण रै साम्हीं प्रणाम करै है जिणनै ओ बणायो है अर इणरी श्रवण अर दृष्टि नै खोलै है। अल्लाह घणो पवित्र है, सृष्टिकर्तावां मांय सूं सबसूं चोखो-। अर जद बो नमाज सूं मुड़ग्यो तो बो बोल्यो: 'अल्लाहुम्मघ्फिर ली मां कद्दामतु वा मां अखखरतु वा मां असरार्तु वा मां अ'लंतु, अन्ता इलाही, ला इलाहा इल्ला अन्ता'। -हे अल्लाह, म्हैं जिका पाप करिया है अर जिका म्हैं टाळ दिया है, जिका म्हैं छुपाया है अर जिका म्हैं प्रकट करिया है, बां नै माफ कर। थै मैं म्हारो भगवान हूं, थारै सिवाय कोई भगवान कोनी है जिको पूजा करण जोग है। अबू ईसा कह्यो; यो हदीस एक सही हसन हदीस है। अर आ हदीस अश स्याफी अर म्हारा केई दोस्तां री राय रै मुजब अमल करी जावै है, जदकै अहमद री आ राय कोनी है। कूफा रै रैवासियां ​​मांय सूं अर बां रै अलावा केई विद्वानां री राय है; आ बात सुन्नत री नमाज मांय मिलै है अर बां इणनै सुन्नत री नमाज मांय नीं पढ़ी। मैं अबू इस्माइल नै अत तिरमिधि मुहम्मद बिन इस्माइल बिन यूसुफ नै कैता सुण्यो; मैं सुलेमान बिन दाउद अल हसीमी नै कैता सुण्यो, अर बां इण हदीस रो जिक्र करियो अर कैयो; म्हारै विचार सूं, ओ अज जुहरी री हदीस री तरै है? सलीम सूं बांरै पिता सूं।

Hadith Corroboration :

Imam Ahmad : 691, 764
Imam Muslim : 1290
Imam Abu Dawud : 649
Imam Tirmidzi : 3343, 3344, 3345
Imam Nasa'i : 887, 888
Imam Darimi : 1210