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Berbukalah pertengahan sya'ban, puasalah dua hari sebagai ganti
Imam Bukhari : 1847حَدَّثَنَا الصَّلْتُ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا مَهْدِيٌّ عَنْ غَيْلَانَ ح و حَدَّثَنَا أَبُو النُّعْمَانِ حَدَّثَنَا مَهْدِيُّ بْنُ مَيْمُونٍ حَدَّثَنَا غَيْلَانُ بْنُ جَرِيرٍ عَنْ مُطَرِّفٍ عَنْ عِمْرَانَ بْنِ حُصَيْنٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَاعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ سَأَلَهُ أَوْ سَأَلَ رَجُلًا وَعِمْرَانُ يَسْمَعُ فَقَالَ يَا أَبَا فُلَانٍ أَمَا صُمْتَ سَرَرَ هَذَا الشَّهْرِ قَالَ أَظُنُّهُ قَالَ يَعْنِي رَمَضَانَ قَالَ الرَّجُلُ لَا يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ فَإِذَا أَفْطَرْتَ فَصُمْ يَوْمَيْنِلَمْ يَقُلْ الصَّلْتُ أَظُنُّهُ يَعْنِي رَمَضَانَ قَالَ أَبُو عَبْد اللَّهِ وَقَالَ ثَابِتٌ عَنْ مُطَرِّفٍ عَنْ عِمْرَانَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْ سَرَرِ شَعْبَانَ
हमरा सब के कहलक अछि [एश-शाल्ट बिन मुहम्मद] हमरा सब के [गायलन] के [महदी] के कहने अछि | आरू ई भी रिवायत छै, हमरा सब क॑ बतैन॑ छै [अबू अन-नु’मान] न॑ हमरा सब क॑ बतैन॑ छै [महदीय बिन मयमुन] न॑ हमरा सब क॑ [गैलन बिन जरीर] क॑ [मुथरीब] स॑ [‘इमरान बिन हुशैन रदलियाहु अन्हुमा] स॑ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स॑ बतैलकै कि हुनी पूछलकै या वू ककरो स॑ पूछलकै जेकरा स॑ इमरान न॑ सुनलकै, वू सल्लल्लाहु अलैहिहि वसाल्लम बजलाह - हे फल्लाँक पिता, की अहाँ एहि मासक अंतिम दिन मे उपवास करैत छी?' 'इमरान कहलकै; हमरा आशंका अछि जे हुनकर जे कहबाक छल से रमजानक मास छल । जे व्यक्ति स पूछल गेल छल ओ जवाब देलक: 'नहि, हे अल्लाह के रसूलुल्लाह'। ओ कहलनि: 'जँ अहाँ व्रत तोड़ब -व्रत नहि- तखन दू दिन धरि -आन दिन- उपवास करय पड़त।' [ऐश-शाल्ट] नहि कहलक; 'हम मानैत छी, रमजान मास'। अबू अब्दुल्लाह अल बुखारी न॑ कहलकै,, आरू कहलकै, [त्सबीत] स॑ [मुथर्रिब] स॑ [इमरान] स॑ पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स॑: ‘शाबान के महीना के अंतिम दिनऽ म॑’ ।