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Allah melaknat orang yang melaknat orang tuanya, melaknat orang yang menyembelih untuk selain Allah, melaknat orang yang menyembunyikan penjahat dan melaknat orang yang memindah batas tanah
Imam Nasa'i : 4346أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى وَهُوَ ابْنُ زَكَرِيَّا بْنِ أَبِي زَائِدَةَ عَنْ ابْنِ حَيَّانَ يَعْنِي مَنْصُورًا عَنْ عَامِرِ بْنِ وَاثِلَةَ قَالَسَأَلَ رَجُلٌ عَلِيًّا هَلْ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُسِرُّ إِلَيْكَ بِشَيْءٍ دُونَ النَّاسِ فَغَضِبَ عَلِيٌّ حَتَّى احْمَرَّ وَجْهُهُ وَقَالَ مَا كَانَ يُسِرُّ إِلَيَّ شَيْئًا دُونَ النَّاسِ غَيْرَ أَنَّهُ حَدَّثَنِي بِأَرْبَعِ كَلِمَاتٍ وَأَنَا وَهُوَ فِي الْبَيْتِ فَقَالَ لَعَنَ اللَّهُ مَنْ لَعَنَ وَالِدَهُ وَلَعَنَ اللَّهُ مَنْ ذَبَحَ لِغَيْرِ اللَّهِ وَلَعَنَ اللَّهُ مَنْ آوَى مُحْدِثًا وَلَعَنَ اللَّهُ مَنْ غَيَّرَ مَنَارَ الْأَرْضِ
हमका [कुतैबा] सूचित कइके, उ कहिन; हमका [यह्या अर्थात् जकारिया बिन अबू जैदा] [इब्न हयायान अर्थात् मंसूर] से [अमीर बिन वत्सिलाह] से बताइस है, उ कहिन; केहू [अली] से पूछिस रहा; क्या रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कभी आपसे बिना किसी और के कुछ गुप्त रखा है? तब अली गुस्सा भए जब तक कि उनकर चेहरा लाल न होइ गवा, अऊर कहिन; ऊ बिना केहू अउर के मुझसे कभौं कुछौ गुप्त नाहीं रखिस, यहिके अलावा ऊ मोसे चार शब्द कहिस रहा, ऊ अऊर हम घर मा रहेन। उ कहिन: 'अल्लाह ओनका लानत है जे अपने माता-पिता का गाली देत है, अल्लाह ओनका लानत है जे अल्लाह के अलावा अउर के लिए वध करत है अऊर अल्लाह ओनका लानत है जे बुराई करै वालेन के रक्षा करत है, अऊर अल्लाह ओनका लानत है जे जमीन पर दांव बदलत है'।