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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



Imam Ahmad : 2535

حَدَّثَنَا يُونُسُ حَدَّثَنَا الْبَرَاءُ يَعْنِي ابْنَ عَبْدِ اللَّهِ الْغَنَوِيَّ عَنْ أَبِي نَضْرَةَ قَالَ كَانَ ابْنُ عَبَّاسٍ عَلَى مِنْبَرِ أَهْلِ الْبَصْرَةِ فَسَمِعْتُهُ يَقُولُ إِنَّ نَبِيَّ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يَتَعَوَّذُ فِي دُبُرِ صَلَاتِهِ مِنْ أَرْبَعٍ يَقُولُ أَعُوذُ بِاللَّهِ مِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ وَأَعُوذُ بِاللَّهِ مِنْ عَذَابِ النَّارِ وَأَعُوذُ بِاللَّهِ مِنْ الْفِتَنِ مَا ظَهَرَ مِنْهَا وَمَا بَطَنَ وَأَعُوذُ بِاللَّهِ مِنْ فِتْنَةِ الْأَعْوَرِ الْكَذَّابِ

हमनी के बतवले बा [यूनुस] हमनी के [अल बर्रा`] अर्थात इब्न अब्दुल्लाह अल घनावी, [अबू नदलाह] से कहले बाड़े; [इब्न अब्बास] एक बेर बसरा के लोग के मंच पर खड़ा रहले, हम उनुका के कहत सुनले रहनी; 'वास्तव में नबीयूल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमेशा नमाज के अंत में चार चीज़ से रक्षा के मांग करत रहले, उ कहले कि 'अउदज़ू बिल्लाही मिन अज्जाबिल कबरी वा अ'उदज़ू बिल्लाही मिन 'अज्जाबिन नारी वा अ'उदज़ू बिल्लाही मिनाल फितानी मा झाहारा मिन्हा वामा बथाना वा आऊदज़ू बिल्लाही।' मिन फिटनाती अ'वार अल कदजाब -हम कब्र के सजा से अल्लाह के शरण लेत बानी, नरक के सजा से अल्लाह से शरण लेत बानी, सब लउके वाला आ छिपल निंदा से अल्लाह से शरण लेत बानी आ आन्हर आ झूठा लोग के निंदा से अल्लाह से शरण लेत बानी -दज्जाल--'।