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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



Orang yang tidak syirik maka dia pasti masuk surga, meskipun berzina dan mencuri
Imam Muslim : 1654

حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى وَأَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَابْنُ نُمَيْرٍ وَأَبُو كُرَيْبٍ كُلُّهُمْ عَنْ أَبِي مُعَاوِيَةَ قَالَ يَحْيَى أَخْبَرَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ زَيْدِ بْنِ وَهْبٍ عَنْ أَبِي ذَرٍّ قَالَ كُنْتُ أَمْشِي مَعَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي حَرَّةِ الْمَدِينَةِ عِشَاءً وَنَحْنُ نَنْظُرُ إِلَى أُحُدٍ فَقَالَ لِي رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَا أَبَا ذَرٍّ قَالَ قُلْتُ لَبَّيْكَ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ مَا أُحِبُّ أَنَّ أُحُدًا ذَاكَ عِنْدِي ذَهَبٌ أَمْسَى ثَالِثَةً عِنْدِي مِنْهُ دِينَارٌ إِلَّا دِينَارًا أَرْصُدُهُ لِدَيْنٍ إِلَّا أَنْ أَقُولَ بِهِ فِي عِبَادِ اللَّهِ هَكَذَا حَثَا بَيْنَ يَدَيْهِ وَهَكَذَا عَنْ يَمِينِهِ وَهَكَذَا عَنْ شِمَالِهِ قَالَ ثُمَّ مَشَيْنَا فَقَالَ يَا أَبَا ذَرٍّ قَالَ قُلْتُ لَبَّيْكَ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ إِنَّ الْأَكْثَرِينَ هُمْ الْأَقَلُّونَ يَوْمَ الْقِيَامَةِ إِلَّا مَنْ قَالَ هَكَذَا وَهَكَذَا وَهَكَذَا مِثْلَ مَا صَنَعَ فِي الْمَرَّةِ الْأُولَى قَالَ ثُمَّ مَشَيْنَا قَالَ يَا أَبَا ذَرٍّ كَمَا أَنْتَ حَتَّى آتِيَكَ قَالَ فَانْطَلَقَ حَتَّى تَوَارَى عَنِّي قَالَ سَمِعْتُ لَغَطًا وَسَمِعْتُ صَوْتًا قَالَ فَقُلْتُ لَعَلَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عُرِضَ لَهُ قَالَ فَهَمَمْتُ أَنْ أَتَّبِعَهُ قَالَ ثُمَّ ذَكَرْتُ قَوْلَهُ لَا تَبْرَحْ حَتَّى آتِيَكَ قَالَ فَانْتَظَرْتُهُ فَلَمَّا جَاءَ ذَكَرْتُ لَهُ الَّذِي سَمِعْتُ قَالَ فَقَالَ ذَاكَ جِبْرِيلُ أَتَانِي فَقَالَ مَنْ مَاتَ مِنْ أُمَّتِكَ لَا يُشْرِكُ بِاللَّهِ شَيْئًا دَخَلَ الْجَنَّةَ قَالَ قُلْتُ وَإِنْ زَنَى وَإِنْ سَرَقَ قَالَ وَإِنْ زَنَى وَإِنْ سَرَقَ

हमनी के बतवले बा [याह्या बिन याह्या] आ [अबू बकर बिन अबी स्याइबा] आ [इब्न नुमैर] आ [अबू कुरैब] सभे [अबू मुअविया] से - [याह्या] कहले- हमनी के [अबू मुअविया] [अल अमासी] से [जैद बिन वहब] से [अबू दजारर] से बतवले बाड़े उ कहले; एक दिन साँझ के हम रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथे करिया चट्टानी जमीन पर टहलनी जबकि हम उहुद के पहाड़ी के ओर देखत रहनी। अचानक रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमरा के बोलवले अवुरी कहले कि हे अबू ज़ार। हम जवाब देनी कि हँ, हे अल्लाह के रसूलुल्लाह’। उ कहले कि उहुद के पहाड़ी हमरा खाती सोना बन गईल त हमरा खुशी ना होईत, जदी तीसरा दिन सोना के हाथ में अभी भी एक दिनार रहित, एक दिनार के छोड़ के जवन हम कर्जा चुकावे के तैयारी कईले रहनी। बाकिर हम अल्लाह के सेवकन के बोलावब, आ हम ओह लोग से कहब - जबले ऊ ओह लोग के आगे, दाहिना आ बाईं ओर फेंकत बाड़े, जइसे कि ऊ ओह लोग के बँटवारा करत होखसु -’ एही बीच हमनी का चलत रहनी जा, फेर ऊ हमरा के फेर से बोलवले: ‘हे अबू ज़ार!’ हम जवाब देनी कि हँ, हे अल्लाह के रसूलुल्लाह’। उ कहले कि, 'जे धन से धनी बाड़े, उ बाद में कयामत के दिन गरीब हो जईहे, सिवाय उ लोग के जवन कहतारे कि: इ, इ -अपना धन के बांटल, जईसे कि शुरुआती नबी कईले रहले-'। तब अबू ज़ार आगे कहले; एही बीच हमनी के चलत रहनी जा, त अचानक उ हमरा के फेर से बोलवले: 'हे अबू ज़ार, इहाँ रह, जब तक हम वापस ना आ जाईब'। फेर ऊ तबले चल गइल जबले ऊ हमरा नजर से गायब ना हो गइल. कुछ देर ना बीतल कि एगो हल्ला सुनाई पड़ल, शायद नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के परेशानी होखत रहे, हमरा लागल। आ हमार भी इरादा रहे कि हम उनुका पीछे चल जाईं। लेकिन उनकर आदेश याद आ गईल, जब तक हम वापस ना आ जाईब तब तक कतहू मत जाईं। एह से हम बस उनुकर इंतजार करब। जब उ पहुंचले त हम सुनल हल्ला के बारे में बतवनी। त उ कहले कि, उ जिब्राईल हवे, उ हमरा लगे आईल रहले। जिब्रिल कहले कि, 'रउरा लोग में से जे भी बिना अल्लाह के साथी कईले कवनो चीज़ के संगे मर जाई, उ जरूर स्वर्ग में प्रवेश करी।' नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पूछले कि भले ही उ व्यभिचार करे अवुरी चोरी करे? जिब्रिल जवाब दिहले, 'हँ, भले ऊ व्यभिचार कर के चोरी कर लेव'।

हदीस :

Imam Ahmad : 17568, 20462, 21427, 22423
Imam Bukhari : 1161, 2983, 5797, 6933
Imam Muslim : 137, 1654, 1655
Imam Tirmidzi : 2568