Imam Abu Dawud : 3151
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا اللَّيْثُ عَنْ يَحْيَى عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ يَحْيَى بْنِ حَبَّانَ عَنْ لُؤْلُؤَةَ عَنْ أَبِي صِرْمَةَ قَالَ غَيْرَ قُتَيْبَةَ فِي هَذَا الْحَدِيثِ عَنْ أَبِي صِرْمَةَ صَاحِبِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ قَالَ مَنْ ضَارَّ أَضَرَّ اللَّهُ بِهِ وَمَنْ شَاقَّ شَاقَّ اللَّهُ عَلَيْهِ
हमसे कहिन है [कुतैबा बिन सईद] हमसे [अल लैट्स] से [यह्या] से [मुहम्मद बिन यह्याया बिन हब्बान] से [लुलुआ] से [अबू शिरमाह] से कहिन हैं - एकरे अलावा कुतैबा ने शिरमाह से ई हदीस का जिक्र किहिन हैं - पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसलल्लाम के एक दोस्त, पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि से, कहिन: 'जे दूसरन का नुकसान - बुराई - पहुँचावत है तौ अल्लाह ओनके ऊपर बुराई करिहैं, अऊर जे दूसरन के लिए कठिनाई करिहैं, अल्लाह खुद के लिए कठिनाई करिहैं।'