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Ciri kaum khawarij: membaca al-qur'an tetapi keluar dari islam
Imam Abu Dawud : 4136حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ كَثِيرٍ أَخْبَرَنَا سُفْيَانُ عَنْ أَبِيهِ عَنْ ابْنِ أَبِي نُعْمٍ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ قَالَبَعَثَ عَلِيٌّ عَلَيْهِ السَّلَام إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِذُهَيْبَةٍ فِي تُرْبَتِهَا فَقَسَّمَهَا بَيْنَ أَرْبَعَةٍ بَيْنَ الْأَقْرَعِ بْنِ حَابِسٍ الْحَنْظَلِيِّ ثُمَّ الْمُجَاشِعِيِّ وَبَيْنَ عُيَيْنَةَ بْنِ بَدْرٍ الْفَزَارِيِّ وَبَيْنَ زَيْدِ الْخَيْلِ الطَّائِيِّ ثُمَّ أَحَدِ بَنِي نَبْهَانَ وَبَيْنَ عَلْقَمَةَ بْنِ عُلَاثَةَ الْعَامِرِيِّ ثُمَّ أَحَدِ بَنِي كِلَابٍ قَالَ فَغَضِبَتْ قُرَيْشٌ وَالْأَنْصَارُ وَقَالَتْ يُعْطِي صَنَادِيدَ أَهْلِ نَجْدٍ وَيَدَعُنَا فَقَالَ إِنَّمَا أَتَأَلَّفُهُمْ قَالَ فَأَقْبَلَ رَجُلٌ غَائِرُ الْعَيْنَيْنِ مُشْرِفُ الْوَجْنَتَيْنِ نَاتِئُ الْجَبِينِ كَثُّ اللِّحْيَةِ مَحْلُوقٌ قَالَ اتَّقِ اللَّهَ يَا مُحَمَّدُ فَقَالَ مَنْ يُطِيعُ اللَّهَ إِذَا عَصَيْتُهُ أَيَأْمَنُنِي اللَّهُ عَلَى أَهْلِ الْأَرْضِ وَلَا تَأْمَنُونِي قَالَ فَسَأَلَ رَجُلٌ قَتْلَهُ أَحْسِبُهُ خَالِدَ بْنَ الْوَلِيدِ قَالَ فَمَنَعَهُ قَالَ فَلَمَّا وَلَّى قَالَ إِنَّ مِنْ ضِئْضِئِ هَذَا أَوْ فِي عَقِبِ هَذَا قَوْمًا يَقْرَءُونَ الْقُرْآنَ لَا يُجَاوِزُ حَنَاجِرَهُمْ يَمْرُقُونَ مِنْ الْإِسْلَامِ مُرُوقَ السَّهْمِ مِنْ الرَّمِيَّةِ يَقْتُلُونَ أَهْلَ الْإِسْلَامِ وَيَدَعُونَ أَهْلَ الْأَوْثَانِ لَئِنْ أَنَا أَدْرَكْتُهُمْ قَتَلْتُهُمْ قَتْلَ عَادٍ
हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन कथिर] कहिन हैं, हमसे कहिन हैं [सुफयान] से [अपने पिता] से [इब्न अबू नूम] से [अबू सईद अल खुदरी] उ कहिन, 'अली रदलियाअल्लाहु अन्हू ने पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम सोना भेजा रहा जवन अबहियों धूल से गंदा रहा। फिर उ चार मनई का बांटिन; अर्थात् अल अकरा' बिन हबीस अल हंझली, अल मुजस्यी, उयैना बिन बदर अल फजारी अऊर जैद अल खैल अथ थाई। फिर बानी नाभान के लोगन में से एक, अलकामह बिन उलात्साह अल अमीरी अऊर बानू किलाब के केहू के पास'। सैद अल खुदरी ने कहा, 'कुरैश अऊर अंसार लोग तब नाराज होइ गए, उ कहिन, 'उनका ई नजद के लोगन का दिहिस अऊर हमका अकेला छोड़ दिहिस'। उ इ भी कहिन: 'मैंने केवल ओनके दिलन का नरम करावा'। सैद कहिन, 'तब एक आदमी धँसी आँखिन, चौड़ा माथा, लंबी दाढ़ी अऊर मुंडन मुँह के साथ आवा। ऊ आदमी बोला, 'हे मुहम्मद अल्लाह से डरो!' उन्होंने कहा: 'अगर मैं अवज्ञा करूँ तो अल्लाह का कौन मानता है! का अल्लाह ने मुझ पर भरोसा नाहीं किहिन कि हम आपन जनादेश धरती के लोगन तक पहुँचाब, जबकि तुम मुझ पर भरोसा नाहीं करत हौ'। सैद कहिन, 'तब एक मनई रहा जे मनई का मारे के अनुमति माँगिस, अऊर हमका लागत है कि ऊ मनई खालिद बिन अल वालिद रहा। लेकिन उ मना कइ दिहिन'। सैद ने कहा, 'जब ई व्यक्ति गुजर गवा रहा, तौ उ कहिन: 'वास्तव मा ई व्यक्ति के वंशजन से एक अइसन लोग उभरिहैं जे कुरान पढ़िहैं लेकिन अपने गले से आगे नाहीं जइहैं। उइ इस्लाम से बाहर आइन जइसे धनुष से तीर निकलत है। उइ मुसलमानन का मारिन लेकिन मूर्तिपूजकन के साथे दयालु रहे। अगर हम ओनका पा लेब, त हम ओनका वइसने मार देब जइसे उ लोग एड लोगन का मारिन - पैगम्बर हुद के लोगन का।