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Perempuan memakai minyak wangi keluar ke masjid, tidak diterima shalatnya hingga mandi
Imam Ibnu Majah : 3992حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ عَنْ عَاصِمٍ عَنْ مَوْلَى أَبِي رُهْمٍ وَاسْمُهُ عُبَيْدٌأَنَّ أَبَا هُرَيْرَةَ لَقِيَ امْرَأَةً مُتَطَيِّبَةً تُرِيدُ الْمَسْجِدَ فَقَالَ يَا أَمَةَ الْجَبَّارِ أَيْنَ تُرِيدِينَ قَالَتْ الْمَسْجِدَ قَالَ وَلَهُ تَطَيَّبْتِ قَالَتْ نَعَمْ قَالَ فَإِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ أَيُّمَا امْرَأَةٍ تَطَيَّبَتْ ثُمَّ خَرَجَتْ إِلَى الْمَسْجِدِ لَمْ تُقْبَلْ لَهَا صَلَاةٌ حَتَّى تَغْتَسِلَ
हमसे कहा गा है [अबू बकर बिन अबू स्याबा] हमसे [सुफयान बिन उयैना] से [अशिम] अबू रुहम के पूर्व दास ['उबैद] से कहिन है कि [अबू हुरैरा] एक बार एक औरत के पास से गुजरी जे इत्र पहिन के मस्जिद जाय चाहत रही, तौ उ नौकर जबर से पूछिस कि तुम कहाँ हौ। जात अहै?' औरत जवाब दिहिस, 'मस्जिद मा'। अबू हुरैरा ने कहा, 'अल्लाह के लिए भी तुम इत्र पहनते हो?' औरत जवाब दिहिस, हाँ'। अबू हुरैरा ने कहा, 'वास्तव में, मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का कहते सुना है: 'कोई औरत जो इत्र का उपयोग करत है अऊर फिर मस्जिद के लिए बाहर जात है, तब तक ओकर नमाज स्वीकार नाहीं कीन जाई जब तक कि उ पहिले नहा न लेई'।