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Nabi menerima jizyah dari penduduk Najran
Imam Abu Dawud : 2644حَدَّثَنَا مُصَرِّفُ بْنُ عَمْرٍو الْيَامِيُّ حَدَّثَنَا يُونُسُ يَعْنِي ابْنَ بُكَيْرٍ حَدَّثَنَا أَسْبَاطُ بْنُ نَصْرٍ الْهَمْدَانِيُّ عَنْ إِسْمَعِيلَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْقُرَشِيِّ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَصَالَحَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَهْلَ نَجْرَانَ عَلَى أَلْفَيْ حُلَّةٍ النِّصْفُ فِي صَفَرٍ وَالْبَقِيَّةُ فِي رَجَبٍ يُؤَدُّونَهَا إِلَى الْمُسْلِمِينَ وَعَوَرِ ثَلَاثِينَ دِرْعًا وَثَلَاثِينَ فَرَسًا وَثَلَاثِينَ بَعِيرًا وَثَلَاثِينَ مِنْ كُلِّ صِنْفٍ مِنْ أَصْنَافِ السِّلَاحِ يَغْزُونَ بِهَا وَالْمُسْلِمُونَ ضَامِنُونَ لَهَا حَتَّى يَرُدُّوهَا عَلَيْهِمْ إِنْ كَانَ بِالْيَمَنِ كَيْدٌ أَوْ غَدْرَةٌ عَلَى أَنْ لَا تُهْدَمَ لَهُمْ بَيْعَةٌ وَلَا يُخْرَجَ لَهُمْ قَسٌّ وَلَا يُفْتَنُوا عَنْ دِينِهِمْ مَا لَمْ يُحْدِثُوا حَدَثًا أَوْ يَأْكُلُوا الرِّبَاقَالَ إِسْمَعِيلُ فَقَدْ أَكَلُوا الرِّبَا قَالَ أَبُو دَاوُد إِذَا نَقَضُوا بَعْضَ مَا اشْتُرِطَ عَلَيْهِمْ فَقَدْ أَحْدَثُوا
ई हमसे [मुशर्रिफ बिन अमर अल यामी] बताइस है, ई हमसे [यूनुस बिन बुकैर] बताइस है, ई हमसे [असबथ बिन नशर अल हमदानी], [इस्माइल बिन अब्दुर्रहमान अल कुरासी] से, [इब्नू अब्बास] से कहिस है, उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने नजरन के लोगन से ई शर्त पर मेल मिलाप किहिन है कि उई दुई हजार कपड़ा दें, जेहिमा से आधा शफर के महीना मा अऊर बाकी रजब के महीना मा, उई मुसलमानन का देइहैं। 'अवर' के साथ-साथ, उइ तीस सूट कवच, तीस ऊँट अऊर हर प्रकार के हथियार के तीस भुगतान किहिन जेहिसे उइ लड़त रहें। अऊर मुसलमान गारंटी देत हैं - ताकि अगर यमन मा धोखा अऊर विश्वासघात होइ तौ उ मुसलमानन का देइ - कि ओनके पूजा स्थलन का नष्ट न कीन जाई अऊर ओनके पुजारियन का निष्कासित न कीन जाई अऊर जब तक उ लोग कौनो घटना न करिहैं या सूदखोरी के सामान का सेवन न करिहैं, तब तक ओनके धर्म मा बदनामी न होइहैं। इस्माइल कहिन; वाकई उइ सूदखोरी खाए हैं। अबू दाउद कहिन; अगर उइ कुछ रद्द कइ देत हैं जवन ओनसे माँगा गा रहा है तौ उइ वाकई मा एक मामला बनाइन हैं।