प्रतिनिधि हदीस
इमाम नसाई : 1700
أَخْبَرَنَا زَكَرِيَّا بْنُ يَحْيَى قَالَ حَدَّثَنَا إِسْحَقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ قَالَ حَدَّثَنَا مُعَاذُ بْنُ هِشَامٍ قَالَ حَدَّثَنِي أَبِي عَنْ قَتَادَةَ عَنْ زُرَارَةَ بْنِ أَوْفَى عَنْ سَعْدِ بْنِ هِشَامٍ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا أَوْتَرَ بِتِسْعِ رَكَعَاتٍ لَمْ يَقْعُدْ إِلَّا فِي الثَّامِنَةِ فَيَحْمَدُ اللَّهَ وَيَذْكُرُهُ وَيَدْعُو ثُمَّ يَنْهَضُ وَلَا يُسَلِّمُ ثُمَّ يُصَلِّي التَّاسِعَةَ فَيَجْلِسُ فَيَذْكُرُ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ وَيَدْعُو ثُمَّ يُسَلِّمُ تَسْلِيمَةً يُسْمِعُنَا ثُمَّ يُصَلِّي رَكْعَتَيْنِ وَهُوَ جَالِسٌ فَلَمَّا كَبِرَ وَضَعُفَ أَوْتَرَ بِسَبْعِ رَكَعَاتٍ لَا يَقْعُدُ إِلَّا فِي السَّادِسَةِ ثُمَّ يَنْهَضُ وَلَا يُسَلِّمُ فَيُصَلِّي السَّابِعَةَ ثُمَّ يُسَلِّمُ تَسْلِيمَةً ثُمَّ يُصَلِّي رَكْعَتَيْنِ وَهُوَ جَالِسٌ
उन्होंने कहा कि हमें सूचित किया है [ज़कारिया बिन यह्या]; उन्होंने कहा कि हमें बताया है [इसहाक बिन इब्राहीम]; उन्होंने कहा कि हमें बताया है [मुअजज़ बिन हिशाम]; उन्होंने कहा कि [मेरे पिता] ने मुझे [क़तादा] से [ज़ुरारा बिन औफ़ा] से [साद बिन हिशाम] से ['ऐस्या] से बताया है; "जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने नौ रकअत की वित्र की नमाज़ पढ़ी, तो उन्होंने आठवीं रकअत को छोड़कर बिना बैठे ही इसे पढ़ा। फिर उन्होंने अल्लाह की तारीफ़ की, ज़िक्र किया और उनसे दुआ की। फिर वे बिना सलाम किए (आठवीं रकअत में) उठ गए। फिर नौवीं रकअत पढ़ी, फिर बैठ गए और अल्लाह अज़्ज़ा व जल्ला का ज़िक्र किया। उसके बाद उन्होंने नमाज़ पढ़ी और ऐसा सलाम कहा जिसे हम सुन सकें। फिर उन्होंने बैठकर दो रकअत पढ़ीं। जब वे बूढ़े और कमज़ोर हो गए, तो उन्होंने सात रकअत वित्र पढ़ीं, वे छठी रकअत के अलावा नहीं बैठे, फिर वे फिर से उठे और सातवीं रकअत जारी रखने के लिए सलाम नहीं कहा। उसके बाद उन्होंने बैठकर दो रकअत पढ़ीं।"