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Doa dalam tahiyyat - 4: ALLAAHUMMA INNII AS-ALUKA BIANNA LAKAL HAMDU LAA ILAAHA ILLAA ANTA, Al MANNAANU …
Imam Nasa'i : 1283أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ قَالَ حَدَّثَنَا خَلَفُ بْنُ خَلِيفَةَ عَنْ حَفْصِ بْنِ أَخِي أَنَسٍ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَكُنْتُ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ جَالِسًا يَعْنِي وَرَجُلٌ قَائِمٌ يُصَلِّي فَلَمَّا رَكَعَ وَسَجَدَ وَتَشَهَّدَ دَعَا فَقَالَ فِي دُعَائِهِ اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ بِأَنَّ لَكَ الْحَمْدَ لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ الْمَنَّانُ بَدِيعُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ يَا ذَا الْجَلَالِ وَالْإِكْرَامِ يَا حَيُّ يَا قَيُّومُ إِنِّي أَسْأَلُكَ فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لِأَصْحَابِهِ تَدْرُونَ بِمَا دَعَا قَالُوا اللَّهُ وَرَسُولُهُ أَعْلَمُ قَالَ وَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ لَقَدْ دَعَا اللَّهَ بِاسْمِهِ الْعَظِيمِ الَّذِي إِذَا دُعِيَ بِهِ أَجَابَ وَإِذَا سُئِلَ بِهِ أَعْطَى
हमका [कुतैबा] से रिपोर्ट कइके उ कहिन; हमका [खलफ बिन खलीफा] [हफ्श] अनस के भतीजे से बताइस है, [अनस बिन मलिक] से उ कहिन; 'मैं एक बार रसूलुल्लाह शलल्लाह अलैहि व सल्लम के साथ बैठा रहा, अऊर एक आदमी रहा जवन नमाज पढ़त रहा। प्रणाम, सजदा अऊर तस्यहुद के बाद उ फिर प्रार्थना किहिन। उ ई कहिके आपन प्रार्थना किहिन; 'हे अल्लाह, मैं आपसे पूरी तारीफ के साथ आपसे माँगत हउँ, आपके अलावा अउर केहू अइसन नाहीं है जेका पूजा करै का अधिकार है, जे परम कृपालु अऊर आकाश अऊर धरती के रचयिता है। हे महिमा अऊर महिमा का सार। हे सर्वशक्तिमान, सर्वशक्तिमान जीव, तुमसे माँगत हौं। तब पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपने साथियों से कहा: 'का तुम जानत हौ कि उ का से नमाज पढ़त रहें? ' उइ जवाब दिहिन, 'अल्लाह अऊर उनके रसूल बेहतर जानत हैं'। फिर उ कहिन: 'उनके हाथन मा मोर आत्मा है, उ अपने महान नाम का उपयोग कइके अल्लाह से आपन नमाज अर्पित किहिन। अगर केहू उ नाम से नमाज पढ़त है, तौ अल्लाह ओका प्रदान करत है अऊर अगर केहू उ नाम से कुछ माँगत है, तौ उ देत है'।