Beliau meminta Abu Bakar ash-Shiddiq untuk menjadi imam shalat menggantikannya
Imam Ahmad : 24579
حَدَّثَنَا وَكِيعٌ قَالَ حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ عَنْ إِبْرَاهِيمَ عَنِ الْأَسْوَدِ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْ لَمَّا مَرِضَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَرَضَهُ الَّذِي مَاتَ فِيهِ جَاءَهُ بِلَالٌ يُؤْذِنُهُ بِالصَّلَاةِ فَقَالَ مُرُوا أَبَا بَكْرٍ فَلْيُصَلِّ بِالنَّاسِ قُلْنَا يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّ أَبَا بَكْرٍ رَجُلٌ أَسِيفٌ قَالَ الْأَعْمَشُ رَقِيقٌ وَمَتَى يَقُومُ مَقَامَكَ يَبْكِي فَلَا يَسْتَطِيعُ فَلَوْ أَمَرْتَ عُمَرَ قَالَ مُرُوا أَبَا بَكْرٍ فَلْيُصَلِّ بِالنَّاسِ قُلْنَا يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّ أَبَا بَكْرٍ رَجُلٌ أَسِيفٌ وَمَتَى يَقُومُ مَقَامَكَ يَبْكِي فَلَا يَسْتَطِيعُ فَلَوْ أَمَرْتَ عُمَرَ يُصَلِّي بِالنَّاسِ قَالَ مُرُوا أَبَا بَكْرٍ يُصَلِّي بِالنَّاسِ فَإِنَّكُنَّ صَوَاحِبُ يُوسُفَ فَأَرْسَلْنَا إِلَى أَبِي فَصَلَّى بِالنَّاسِ فَوَجَدَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْ نَفْسِهِ خِفَّةً فَخَرَجَ يُهَادَى بَيْنَ رَجُلَيْنِ وَرِجْلَاهُ تَخُطَّانِ فِي الْأَرْضِ فَلَمَّا أَحَسَّ بِهِ أَبُو بَكْرٍ ذَهَبَ يَتَأَخَّرُ فَأَوْمَأَ إِلَيْهِ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَيْ مَكَانَكَ فَجَاءَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَتَّى جَلَسَ إِلَى جَنْبِ أَبِي بَكْرٍ وَكَانَ أَبُو بَكْرٍ يَأْتَمُّ بِالنَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَالنَّاسُ يَأْتَمُّونَ بِأَبِي بَكْرٍ
हमसे [वाकी'] कहिके उ कहिन; हमका [अल अमासी] से [इब्राहिम] से [अल असवाद] से [ऐस्याह] से कहिन है; जब रसूलुल्लाह शल्लल्लाहुअलेहि वसल्लम बीमार रहे जेकरे कारण उनकर मृत्यु होइ गै, तौ बिलाल नमाज के लिए अज़ान देय के लिए उनसे मिले आए, उ कहिन: 'अबू बकर का आदेश दओ कि उ लोग के साथ नमाज पढ़ें'। हम कहेन; 'हे अल्लाह के रसूल! दरअसल, अबू बकर एक अइसन मनई रहे जेके ऊपर आसानी से दया आवत रही'। अमासी ने बतावा; 'वह एक अइसन मनई है जे आसानी से रोवत है, जब भी उ आपके जगह पर खड़ा होई तौ उ निश्चित रूप से रोई अऊर उ रोय में सक्षम नाहीं होई। आप उमर का आदेश देय के बारे मा का लागत है'। उन्होंने कहा : 'अबू बकर को पुजारी बनने का आदेश दो'। हम कहेन; 'हे आयशा! दरअसल, अबू बकर एक अइसन मनई रहे जे आसानी से रोवत रहे, जब भी उ आपके जगह खड़ा होत रहे त उ निश्चित रूप से रोवत रहे एहसे उ नाहीं रो सकत रहा। का होई अगर तुम उमर का अपने साथ नमाज पढ़ै का आदेश देब'। उन्होंने कहा: 'अबू बकर को जनता के साथ नमाज पढ़ने का आदेश दो। सचमुच तुम यूसुफ के दोस्तन के तरह हौ। फिर उ मोका अपने पिता के पास भेजिन ताकि उ लोगन के साथे प्रार्थना कर सकै'। फिर पैगम्बर सल्लल्लाह व सल्लम का खुद का थोड़ा हल्का महसूस भवा, उ अपने दुइनौ गोड़न पर कदम रखिन अऊर दुइनौ धरती के साथ घसीटत रहे। जब अबू बकर का पता चला, तौ उ आपन नमाज कुछ हद तक रोक लिहिन। फिर पैगम्बर सल्लल्लाहुअलेहि वसल्लम ने उनसे इशारा किया कि जहाँ आप थे वहाँ चुप रहे। फिर पैगम्बर सल्लल्लाहुअलेहि वसल्लम. तब तक आवा जब तक कि उ अबू बकर के बगल मा नाहीं बैठा। अबू बकर पैगम्बर सल्लल्लाहुअलेहि व सल्लम के अनुसरण किहिन अऊर लोग अबू बकर के अनुसरण किहिन।
Hadith Corroboration :
Imam Ahmad : 1689, 1951, 3184, 4894, 12557, 12620, 12727, 18869, 21982, 22932, 23506, 24095, 24096, 24097, 24483, 24579, 24690, 24753, 24918, 24942, 25118
Imam Bukhari : 624, 637, 638, 640, 641, 642, 646, 671, 672, 675, 3133, 6759
Imam Muslim : 629, 633, 634, 635, 636, 637, 638
Imam Tirmidzi : 3605
Imam Nasa'i : 769, 788, 824
Imam Ibnu Majah : 824, 1222, 1223
Imam Malik : 282, 374
Imam Darimi : 82, 1229