Beliau meminta Abu Bakar ash-Shiddiq untuk menjadi imam shalat menggantikannya
Imam Bukhari : 672
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ إِبْرَاهِيمَ عَنْ الْأَسْوَدِ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْلَمَّا ثَقُلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ جَاءَ بِلَالٌ يُوذِنُهُ بِالصَّلَاةِ فَقَالَ مُرُوا أَبَا بَكْرٍ أَنْ يُصَلِّيَ بِالنَّاسِ فَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّ أَبَا بَكْرٍ رَجُلٌ أَسِيفٌ وَإِنَّهُ مَتَى مَا يَقُمْ مَقَامَكَ لَا يُسْمِعُ النَّاسَ فَلَوْ أَمَرْتَ عُمَرَ فَقَالَ مُرُوا أَبَا بَكْرٍ يُصَلِّي بِالنَّاسِ فَقُلْتُ لِحَفْصَةَ قُولِي لَهُ إِنَّ أَبَا بَكْرٍ رَجُلٌ أَسِيفٌ وَإِنَّهُ مَتَى يَقُمْ مَقَامَكَ لَا يُسْمِعُ النَّاسَ فَلَوْ أَمَرْتَ عُمَرَ قَالَ إِنَّكُنَّ لَأَنْتُنَّ صَوَاحِبُ يُوسُفَ مُرُوا أَبَا بَكْرٍ أَنْ يُصَلِّيَ بِالنَّاسِ فَلَمَّا دَخَلَ فِي الصَّلَاةِ وَجَدَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي نَفْسِهِ خِفَّةً فَقَامَ يُهَادَى بَيْنَ رَجُلَيْنِ وَرِجْلَاهُ يَخُطَّانِ فِي الْأَرْضِ حَتَّى دَخَلَ الْمَسْجِدَ فَلَمَّا سَمِعَ أَبُو بَكْرٍ حِسَّهُ ذَهَبَ أَبُو بَكْرٍ يَتَأَخَّرُ فَأَوْمَأَ إِلَيْهِ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَجَاءَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَتَّى جَلَسَ عَنْ يَسَارِ أَبِي بَكْرٍ فَكَانَ أَبُو بَكْرٍ يُصَلِّي قَائِمًا وَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُصَلِّي قَاعِدًا يَقْتَدِي أَبُو بَكْرٍ بِصَلَاةِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَالنَّاسُ مُقْتَدُونَ بِصَلَاةِ أَبِي بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ
हमका बतावा गा है [कुतैबा बिन सईद] कहिन, हमका [अबू मुआविया] द्वारा [अल अमासी] से [इब्राहिन] से [अल असवाद] से [ऐस्या] से बतावा गा है, 'जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बीमारी अउर खराब होइ गै, तौ बिलाल ओनसे प्रार्थना करै आए कि समय बनि गा रहा। फिर उ कहिन: 'तुम अबू बकर का जनता के साथे जमात नमाज का नेतृत्व करै का आदेश देत हौ'। तब हम कहेन, 'हे अल्लाह के रसूल, वाकई अबू बकर एक सौम्य मनई रहे, अगर उ आपके जगह लेत, तौ लोग ओनके आवाज नाहीं सुन पावत। अगर तुम उमर का भेजौ तौ अच्छा होई। त उ कहिन: 'अबू बकर से कहौ कि उ लोगन के साथे नमाज का नेतृत्व करै'। फिर मैंने हफशाह से कहा कि कहो कि अबू बकर कोमल आदमी है, अगर स्वामी का स्थान ले ले तो फिर अपनी पढ़ाई आवाज को जनता तक नहीं पहुंचा पाएगा। अच्छा होत कि मालिक उमर का भेज देत, काहे से कि अबू बकर आसानी से रोवत रहें -नमाज के दौरान-। यहि कारन से, उमर से जनता के नमाज के नेतृत्व करै का कहब अच्छा होई। तौ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) कहिन: 'वास्तव मा तुम यूसुफ के पत्नियन के तरह हौ। अबू बकर से कहिए जनता के साथ नमाज पढ़ें'। फिर जब अबू बकर नमाज पढ़ै लाग रहैं, तौ उनकर शरीर अच्छा लागत रहै, तौ उ दुइ मनई के साथे घर से बाहर निकरिन। औ मानो हम ओका चलत देखित है, अपने गोड़न का जमीन पर घसीटत है, जब तक कि ऊ मस्जिद मा घुस नाहीं गवा। जब अबू बकर का उनके आगमन के बारे मा पता चला, तौ उ पीछे हटै चाहत रहें। लेकिन रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उन्हें एक संकेत दिया। फिर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पहुँचे अऊर उ अबू बकर के बाईं ओर बैठे। अबू बकर खड़े होके नमाज पढ़त रहें जबकि रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम बइठ के नमाज पढ़त रहें, अबू बकर रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के नमाज का पालन करत रहें, अऊर लोग अबू बकर के नमाज का पालन करत रहें।
Hadith Corroboration :
Imam Ahmad : 1689, 1951, 3184, 4894, 12557, 12620, 12727, 18869, 21982, 22932, 23506, 24095, 24096, 24097, 24483, 24579, 24690, 24753, 24918, 24942, 25118
Imam Bukhari : 624, 637, 638, 640, 641, 642, 646, 671, 672, 675, 3133, 6759
Imam Muslim : 629, 633, 634, 635, 636, 637, 638
Imam Tirmidzi : 3605
Imam Nasa'i : 769, 788, 824
Imam Ibnu Majah : 824, 1222, 1223
Imam Malik : 282, 374
Imam Darimi : 82, 1229