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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Al Jabbar

Imam Ahmad : 1525

حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ نُمَيْرٍ وَيَعْلَى قَالَا حَدَّثَنَا مُوسَى يَعْنِي الْجُهَنِيَّ عَنْ مُصْعَبِ بْنِ سَعْدٍ عَنْ أَبِيهِ قَالَ جَاءَ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَعْرَابِيٌّ فَقَالَ يَا نَبِيَّ اللَّهِ عَلِّمْنِي كَلَامًا أَقُولُهُ قَالَ قُلْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ اللَّهُ أَكْبَرُ كَبِيرًا وَالْحَمْدُ لِلَّهِ كَثِيرًا سُبْحَانَ اللَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ لَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللَّهِ الْعَزِيزِ الْحَكِيمِ قَالَ هَؤُلَاءِ لِرَبِّي عَزَّ وَجَلَّ فَمَا لِي قَالَ قُلْ اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي وَارْحَمْنِي وَاهْدِنِي وَارْزُقْنِي قَالَ ابْنُ نُمَيْرٍ قَالَ مُوسَى أَمَّا عَافِنِي فَأَنَا أَتَوَهَّمُ وَمَا أَدْرِي

हमसे [अब्दुल्लाह बिन नुमीर] अऊर [या'ला] कहिन; हमसे [मूसा] अर्थात् अल जुहानी, [मुशब बिन सद] से [अपने पिता] से कहिन हैं; एक बेडौइन अरब रहा जे पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मिला अऊर कहिस; 'हे नबीयूल्लाह, मोका एक वाक्य सिखावा कि मैं -कभी भी- कह सकूँ!' उ कहिन: 'पढ़ौ: ला इलाहा इल्लाहु वहदाहू ला स्यारीका लाहु, अल्लाहु अकबर कबीरा, वल्हमदु लिल्लाही कत्सिरा वा सुभानल्लाही रब्बील 'अलामीन, ला हौला वाला क्व्वाता इल्लाहिल इल्लाहिम अजीज ईश्वर पूजा का सिवाय कौनो लायक नाहीं है एक अल्लाह, ओकरे लिए कौनो साथी नाहीं है, अल्लाह सबसे बड़ा अऊर सर्वोच्च है। सब तारीफ अकेले अल्लाह के लिए है, अऊर महिमा अल्लाह के लिए है, दुनिया के रब्ब। सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ अल्लाह के अलावा कौनो शक्ति अऊर ताकत नाहीं है - पांच बार'। बेडौइन कहिन; 'यही सब मेरे रब्ब अज्जा वा जल्ला के लिए है, कौन सा मेरे लिए है?' उ जवाब दिहिन; 'पढ़ौ: अल्लाहुम्मघफिरली वरहमनी वहदिनी वारजुकनी -हे अल्लाह! मोहि माफ करौ, मुझ पर दया करौ, मोहि मार्गदर्शन दौ अऊर मोहि रोजी रोटी दौ।-' इब्न नुमीर ने कहा; मूसा कहिन; लफाझ 'वा'अफिनी -मुझे स्वास्थ्य दे-'। मैं अबहियों अनिश्चित हउँ अऊर मैं पक्का नाहीं जानत हउँ।

Hadith Corroboration :

Imam Ahmad : 1347, 1478, 1525, 1908, 1992, 2168, 3452, 9301, 20365, 20520
Imam Bukhari : 3100, 3191, 6876
Imam Muslim : 259, 301, 4862
Imam Abu Dawud : 4518
Imam Tirmidzi : 2347, 3231, 3232, 3357
Imam Nasa'i : 1000
Imam Ibnu Majah : 1340