Rasulullah tidak melihat Allah, beliau hanya melihat cahaya, beliau tidak bisa melihat Rabb-Nya
Imam Muslim : 259
حَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ عَنْ دَاوُدَ عَنْ الشَّعْبِيِّ عَنْ مَسْرُوقٍ قَالَ كُنْتُ مُتَّكِئًا عِنْدَ عَائِشَةَ فَقَالَتْ يَا أَبَا عَائِشَةَ ثَلَاثٌ مَنْ تَكَلَّمَ بِوَاحِدَةٍ مِنْهُنَّ فَقَدْ أَعْظَمَ عَلَى اللَّهِ الْفِرْيَةَ قُلْتُ مَا هُنَّ قَالَتْ مَنْ زَعَمَ أَنَّ مُحَمَّدًا صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَأَى رَبَّهُ فَقَدْ أَعْظَمَ عَلَى اللَّهِ الْفِرْيَةَ قَالَ وَكُنْتُ مُتَّكِئًا فَجَلَسْتُ فَقُلْتُ يَا أُمَّ الْمُؤْمِنِينَ أَنْظِرِينِي وَلَا تَعْجَلِينِي أَلَمْ يَقُلْ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ { وَلَقَدْ رَآهُ بِالْأُفُقِ الْمُبِينِ } { وَلَقَدْ رَآهُ نَزْلَةً أُخْرَى } فَقَالَتْ أَنَا أَوَّلُ هَذِهِ الْأُمَّةِ سَأَلَ عَنْ ذَلِكَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ إِنَّمَا هُوَ جِبْرِيلُ لَمْ أَرَهُ عَلَى صُورَتِهِ الَّتِي خُلِقَ عَلَيْهَا غَيْرَ هَاتَيْنِ الْمَرَّتَيْنِ رَأَيْتُهُ مُنْهَبِطًا مِنْ السَّمَاءِ سَادًّا عِظَمُ خَلْقِهِ مَا بَيْنَ السَّمَاءِ إِلَى الْأَرْضِ فَقَالَتْ أَوَ لَمْ تَسْمَعْ أَنَّ اللَّهَ يَقُولُ { لَا تُدْرِكُهُ الْأَبْصَارُ وَهُوَ يُدْرِكُ الْأَبْصَارَ وَهُوَ اللَّطِيفُ الْخَبِيرُ } أَوَ لَمْ تَسْمَعْ أَنَّ اللَّهَ يَقُولُ { وَمَا كَانَ لِبَشَرٍ أَنْ يُكَلِّمَهُ اللَّهُ إِلَّا وَحْيًا أَوْ مِنْ وَرَاءِ حِجَابٍ أَوْ يُرْسِلَ رَسُولًا فَيُوحِيَ بِإِذْنِهِ مَا يَشَاءُ إِنَّهُ عَلِيٌّ حَكِيمٌ } قَالَتْ وَمَنْ زَعَمَ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَتَمَ شَيْئًا مِنْ كِتَابِ اللَّهِ فَقَدْ أَعْظَمَ عَلَى اللَّهِ الْفِرْيَةَ وَاللَّهُ يَقُولُ { يَا أَيُّهَا الرَّسُولُ بَلِّغْ مَا أُنْزِلَ إِلَيْكَ مِنْ رَبِّكَ وَإِنْ لَمْ تَفْعَلْ فَمَا بَلَّغْتَ رِسَالَتَهُ } قَالَتْ وَمَنْ زَعَمَ أَنَّهُ يُخْبِرُ بِمَا يَكُونُ فِي غَدٍ فَقَدْ أَعْظَمَ عَلَى اللَّهِ الْفِرْيَةَ وَاللَّهُ يَقُولُ { قُلْ لَا يَعْلَمُ مَنْ فِي السَّمَوَاتِ وَالْأَرْضِ الْغَيْبَ إِلَّا اللَّهُ } و حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَهَّابِ حَدَّثَنَا دَاوُدُ بِهَذَا الْإِسْنَادِ نَحْوَ حَدِيثِ ابْنِ عُلَيَّةَ وَزَادَ قَالَتْ وَلَوْ كَانَ مُحَمَّدٌ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَاتِمًا شَيْئًا مِمَّا أُنْزِلَ عَلَيْهِ لَكَتَمَ هَذِهِ الْآيَةَ { وَإِذْ تَقُولُ لِلَّذِي أَنْعَمَ اللَّهُ عَلَيْهِ وَأَنْعَمْتَ عَلَيْهِ أَمْسِكْ عَلَيْكَ زَوْجَكَ وَاتَّقِ اللَّهَ وَتُخْفِي فِي نَفْسِكَ مَا اللَّهُ مُبْدِيهِ وَتَخْشَى النَّاسَ وَاللَّهُ أَحَقُّ أَنْ تَخْشَاهُ } حَدَّثَنَا ابْنُ نُمَيْرٍ حَدَّثَنَا أَبِي حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ عَنْ الشَّعْبِيِّ عَنْ مَسْرُوقٍ قَالَ سَأَلْتُ عَائِشَةَ هَلْ رَأَى مُحَمَّدٌ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَبَّهُ فَقَالَتْ سُبْحَانَ اللَّهِ لَقَدْ قَفَّ شَعَرِي لِمَا قُلْتَ وَسَاقَ الْحَدِيثَ بِقِصَّتِهِ وَحَدِيثُ دَاوُدَ أَتَمُّ وَأَطْوَلُ
अऊर हमसे कहिस है [जुहैर बिन हरब] हमसे [इस्माइल बिन इब्राहिम] से [दाऊद] से [अश-श'बी] से [मसरूक] कहिस है, 'जब मैं [ऐस्या] के बगल मा झुक के बैठा रहा, तब उ कहिस, 'हे अबू ऐस्या -मसरूक-! तीन चीज हैं, जे एक के बारे मा बात करत है, ओकर मतलब है कि उ अल्लाह के खिलाफ बहुत बड़ा झूठ बोलिस है'। हम पूछेन, 'ई तीनौ चीज का अहैं? ' ऐसिया ने जवाब दिया, 'पहिले, जे ई दावा करत है कि मुहम्मद शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपने प्रभु का देखा है तो उ वास्तव में अल्लाह के खिलाफ अपने झूठ का बड़ा कर दिहिस है'। मैं पीछे झुके बैठा रहा था, तो ठीक से बैठने लगा, फिर कहा कि हे उम्मुल मुकमिनिन! मोका एक टेम्पो दइ द्या, अऊर मोका जल्दबाजी न करौ, -पहिले मोर बात सुनौ-, का अल्लाह नाहीं कहिन: '-अऊर वास्तव मा मुहम्मद ने जिबरील का -अपने असली रूप मा- दूसर समय देखिन-' -प्रश्न। अल तकविर: 23-। अऊर अल्लाह का वचन फिर से: '-अऊर वास्तव मा मुहम्मद ने एक बार फिर से 'उनका' अपने मूल रूप मा देखिन है-' -प्रश्न। एक नजम: 13-। तौ ऐसिया जवाब दिहिन, 'रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम से पूछै वाला पहिला मनई मैं रहेंव। इन लोगन के बीच से ई मामला के बारे मा। उ कहिन: 'उ आयत मा 'उ' से का मतलब है जिबरील है - अल्लाह नाहीं -, हम जिबरील का अपने मूल रूप मा दुइ बार के अलावा कभौं नाहीं देखेन, यानी जब उ आकाश से उतरे रहें, जवन कि स्वर्ग अऊर धरती के बीच के जगह का भरै के लिए बहुत बड़ा रहा'। तब ऐसियाह फिर कहिन, 'का तुमने कभी नाहीं सुना है कि अल्लाह: '-उनका आँखिन से नाहीं देखा जा सकत है, जबकि उ सब आँखिन के सार का देख सकत हैं अऊर जान सकत हैं, अऊर उ सबसे नम्र हैं, ज्ञान मा सबसे गहरा हैं-' -प्रश्न। अल अन'म: 103-। या, का आपने अल्लाह के शब्दन का कभी नाहीं सुना है: '-अऊर ई एक मनुष्य के लिए उचित नाहीं है, कि अल्लाह ओका एक रहस्योद्घाटन के रूप मा - एक सपना देख के - या एक दीवार के पीछे से - सिर्फ एक आवाज सुन के - या एक दूत - एक स्वर्गदूत - भेज के, ओका बोलै के लिए आमंत्रित करै, तब दूत ओका अल्लाह के इजाजत के साथ कुछ इजाजत देत है। सचमुच, अल्लाह सबसे ऊंचा, सबसे बुद्धिमान है-'। -प्रश्न ऐश शूरा: 51-। फिर ऐस्या ने फिर कहा, 'जो कोई दावा करत है कि रसूलल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अल्लाह के किताब का एक हिस्सा छुपाया है, तो वास्तव में उ अल्लाह के खिलाफ झूठ उठाया है, जैसा कि अल्लाह कहते हैं: '-हे रसूलल्लाह, कुछ ऐसा बताओ जो आप पर अवलोकित किया गया है, और अगर आप ऐसा नहीं करते हैं, तो आपने उसका संदेश नहीं पहुंचाया है -Q-'। अल मैदा: 67-। तब ऐस्याह ने कहा कि 'जो कोई दावा करत है कि ऊ कल होए वाली नियति के बारे मा बतावै में सक्षम है, तो ऊ सही मायने मा अल्लाह के खिलाफ झूठ उठाइस है। अल्लाह कहत हैं: '-कहो -हे मुहम्मद-, अल्लाह के अलावा आकाश अऊर धरती के कौनो भी प्राणी अलौकिक का नाहीं जानत है-'। -प्रश्न एक नामल: 65-। अऊर हमसे कहिस है [मुहम्मद बिन अल-मुत्सना] हमसे कहिस है [अब्दुल वहाब] हमसे [दाऊद] इ सनाद के साथ बताइस है जइसे कि इब्न उलेया के हदीस, अऊर उ इहो कहिन, 'आइशा कहिन, 'अगर मुहम्मद अपने ऊपर प्रकट कीन गा कुछ रहस्योद्घाटन का छुपावत, तौ उ ई आलोच छुपावत: - अऊर आप कहत हैं,- व्यक्ति जेकरे ऊपर अल्लाह ने एहसान किहिन हैं अऊर आप -भी- ओनके ऊपर एहसान किहिन हैं, 'अपनी पत्नी का लगातार संयमित रखौ अऊर अल्लाह से डरौ', जब आप अपने दिल मा कुछ अइसन छुपावत हौ जेका अल्लाह प्रकट करिहैं, अऊर आप लोगन से डरत हौ, जबकि अल्लाह उहै है जेकरे पास आपके लिए डरय का अधिक अधिकार है-' -प्रश्न। अल-अहजाब: 37-। हमसे कहिस है [इब्न नुमीर] हमसे कहिस है [मेरे पिता] हमसे कहिस है [इस्माइल] से [अश-शाबी] से [मसरूक] उ कहिन, 'मैंने [ऐस्याह] से पूछा, 'का मुहम्मद सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने अपने रब्ब का देखा? ' उ जवाब दिहिन, 'अल्लाह के महिमा, आपके पहिले कहे शब्दन के कारण मोर रीढ़ के बाल काँप रहे हैं'। फिर उ कहानी के साथ हदीस प्रस्तुत किहिन। अऊर दाऊद के हदीस ज्यादा सही अऊर लंबा है'।