Imam Darimi : 2937
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرٍ عَنْ وَكِيعٍ قَالَ إِذَا كَانَا أَخَوَيْنِ فَادَّعَى أَحَدُهُمَا أَخًا وَأَنْكَرَهُ الْآخَرُ قَالَ كَانَ ابْنُ أَبِي لَيْلَى يَقُولُ هِيَ مِنْ سِتَّةٍ لِلَّذِي لَمْ يَدَّعِ ثَلَاثَةٌ وَلِلْمُدَّعِي سَهْمَانِ وَلِلْمُدَّعَى سَهْمٌ
हमका [अबू बकर] का [वाकी] से बताय के कहिन; अगर दुइ भाई हैं, तौ ओनमा से एक भाई होवे का दावा करत है अऊर दूसर भाई होवे का दावा नाहीं करत है, [इब्न अबू लैला] कहिन; छह से अपनी विरासत का बंटवारा। कबूल न करै वाले का तीन हिस्सा, मानै वाले का दुई हिस्सा अउर मानै वाले का एक हिस्सा मिलत हवै।