Shalat syuruq dua rakaat, mendapatkan pahala seperti pahala haji dan umrah
Imam Tirmidzi : 1537حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا مُعَاذُ بْنُ هِشَامٍ حَدَّثَنِي أَبِي عَنْ قَتَادَةَ عَنْ النُّعْمَانِ بْنِ مُقَرِّنٍ قَالَغَزَوْتُ مَعَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَكَانَ إِذَا طَلَعَ الْفَجْرُ أَمْسَكَ حَتَّى تَطْلُعَ الشَّمْسُ فَإِذَا طَلَعَتْ قَاتَلَ فَإِذَا انْتَصَفَ النَّهَارُ أَمْسَكَ حَتَّى تَزُولَ الشَّمْسُ فَإِذَا زَالَتْ الشَّمْسُ قَاتَلَ حَتَّى الْعَصْرِ ثُمَّ أَمْسَكَ حَتَّى يُصَلِّيَ الْعَصْرَ ثُمَّ يُقَاتِلُ قَالَ وَكَانَ يُقَالُ عِنْدَ ذَلِكَ تَهِيجُ رِيَاحُ النَّصْرِ وَيَدْعُو الْمُؤْمِنُونَ لِجُيُوشِهِمْ فِي صَلَاتِهِمْقَالَ أَبُو عِيسَى وَقَدْ رُوِيَ هَذَا الْحَدِيثُ عَنْ النُّعْمَانِ بْنِ مُقَرِّنٍ بِإِسْنَادٍ أَوْصَلَ مِنْ هَذَا وَقَتَادَةُ لَمْ يُدْرِكْ النُّعْمَانَ بْنَ مُقَرِّنٍ وَمَاتَ النُّعْمَانُ بْنُ مُقَرِّنٍ فِي خِلَافَةِ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ
हमका बतावा गा है [मुहम्मद बिन बसिस्यार] कहिन, हमसे बतावा गा है [मुआज़ बिन हिशम] कहिन, ई हमका [मेरे पिता] से [कतादाह] से [अन नुमान बिन मुकारिन] बतावा गा है, उ कहिन, 'मैं एक बार पैगम्बर सल्लाहु अलैहि वसल्लम से लड़े रहेन, तौ जब भोर उ उठिन - तब तक उ भोर नाहीं भए - गुलाब। अऊर जब सूरज उग जात है तौ ऊ हमला करत है, जब दुपहरिया आवत है तौ ऊ तब तक रुक जात है जब तक कि सूरज पश्चिम के ओर झुक जात है, जब सूरज झुक जात है तौ ऊ फिर से हमला करत है जब तक कि असर का समय न आ जात है, फिर ऊ तब तक रुक जात है जब तक कि ऊ असर नमाज पूरा न कर लेत है, अऊर वहिके बाद ऊ फिर से हमला करत है'। नुमान ने कहा, 'तब उ समय कहा गा रहा, 'जीत के हवा चली है, अऊर आस्तिक लोग अपनी प्रार्थना मा अपनी सेना के लिए प्रार्थना करत हैं'। अबू ईसा ने कहा, 'यह हदीस अन नूमान बिन मुकरीन से एक और सनाद के साथ रिवायित हुई है जो इस सनाद से अधिक निरंतर है। अऊर कतादाह अन नुमान बिन मुकरिन से कभी नाहीं मिले रहे, काहे से कि नुमान उमर इब्नुल खठथब के शासनकाल मा मर गए रहे।