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Ali RA. melaknat yang melaknat orang tuanya dan memindah batas tanah
Imam Muslim : 3657حَدَّثَنَا زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ وَسُرَيْجُ بْنُ يُونُسَ كِلَاهُمَا عَنْ مَرْوَانَ قَالَ زُهَيْرٌ حَدَّثَنَا مَرْوَانُ بْنُ مُعَاوِيَةَ الْفَزَارِيُّ حَدَّثَنَا مَنْصُورُ بْنُ حَيَّانَ حَدَّثَنَا أَبُو الطُّفَيْلِ عَامِرُ بْنُ وَاثِلَةَ قَالَ كُنْتُ عِنْدَ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ فَأَتَاهُ رَجُلٌ فَقَالَ مَا كَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُسِرُّ إِلَيْكَ قَالَ فَغَضِبَ وَقَالَ مَا كَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُسِرُّ إِلَيَّ شَيْئًا يَكْتُمُهُ النَّاسَ غَيْرَ أَنَّهُ قَدْ حَدَّثَنِي بِكَلِمَاتٍ أَرْبَعٍ قَالَ فَقَالَ مَا هُنَّ يَا أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ قَالَ قَالَ لَعَنَ اللَّهُ مَنْ لَعَنَ وَالِدَهُ وَلَعَنَ اللَّهُ مَنْ ذَبَحَ لِغَيْرِ اللَّهِ وَلَعَنَ اللَّهُ مَنْ آوَى مُحْدِثًا وَلَعَنَ اللَّهُ مَنْ غَيَّرَ مَنَارَ الْأَرْضِ
हमका [जुहैर बिन हरब] अऊर [सूरैज बिन यूनुस] दुइनौ का [मरवान] से बतावै के बाद, [जुहैर] कहिन; हमसे कहिन है [मरवान बिन मुआवियाह अल फजारी] हमसे कहिन हैं [मंसूर बिन हयान] हमसे कहिन हैं [अबू अत थुफैल अमीर बिन वस्तिला] उ कहिन, 'मैं [अली बिन अबू तालिब] के बगल मा रहा, अचानक एक आदमी ओनसे मिले आवा अऊर कहिस, 'का पैगम्बर सल्लल्लाह अलैम ने हमेशा एक रहस्य नाहीं बतावा रहा - मनुष्य -?' अबू थुफैल कहिन, 'अली नाराज होइके कहिन, 'नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मोरे पास कौनो राज नाहीं पहुँचावा अऊर न ही मनुष्यन तक पहुँचावा, सिवाय यहिके कि उ एक बार मोरे पास चार बातें पहुँचाइन'। अबू थुफैल ने कहा कि आदमी ने पूछा कि चार बात क्या है हे अमीरुल मुकमिनिन ? अबू थुफैल ने जारी रखा, 'अली ने तब जवाब दिया, 'अल्लाह ओनका सराप देत है जे अपने माता-पिता का सराप देत है, ओनका सराप देत है जे अल्लाह के अलावा वध करत है, ओनका सराप देत है जे अपराधियन का आश्रय देत है अऊर ओनका सराप देत है जे जमीन के सीमा हिलावत है'।