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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



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हदीस खोज परिणाम :
कुल हदीस : 1
प्रतिनिधि हदीस
इमाम इब्नु माजा : 1795

حَدَّثَنَا بَكْرُ بْنُ خَلَفٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ كَثِيرٍ حَدَّثَنَا ابْنُ شِهَابٍ عَنْ سَالِمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ أَبِيهِعَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ أَقْرَأَنِي سَالِمٌ كِتَابًا كَتَبَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي الصَّدَقَاتِ قَبْلَ أَنْ يَتَوَفَّاهُ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ فَوَجَدْتُ فِيهِ فِي أَرْبَعِينَ شَاةً شَاةٌ إِلَى عِشْرِينَ وَمِائَةٍ فَإِذَا زَادَتْ وَاحِدَةً فَفِيهَا شَاتَانِ إِلَى مِائَتَيْنِ فَإِنْ زَادَتْ وَاحِدَةً فَفِيهَا ثَلَاثُ شِيَاهٍ إِلَى ثَلَاثِ مِائَةٍ فَإِذَا كَثُرَتْ فَفِي كُلِّ مِائَةٍ شَاةٌ وَوَجَدْتُ فِيهِ لَا يُجْمَعُ بَيْنَ مُتَفَرِّقٍ وَلَا يُفَرَّقُ بَيْنَ مُجْتَمِعٍ وَوَجَدْتُ فِيهِ لَا يُؤْخَذُ فِي الصَّدَقَةِ تَيْسٌ وَلَا هَرِمَةٌ وَلَا ذَاتُ عَوَارٍ

हमसे कहा है [बक्र बिन खलफ] ने कहा, हमसे कहा है [अब्दुर्रहमान बिन महदी] ने कहा, हमसे कहा है [सुलेमान बिन कथिर] ने कहा, हमसे कहा है [इब्न शिहाब] ने [सलीम बिन अब्दुल्लाह] से [अपने पिता] रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से, उन्होंने कहा, "सलीम ने एक बार मुझे रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम द्वारा लिखी गई खैरात के बारे में एक किताब पढ़कर सुनाई, इससे पहले कि अल्लाह अज़्ज़ा व जल्ला गुज़र गए। फिर मैंने उसमें पाया कि हर चालीस बकरों से लेकर एक सौ बीस बकरियों तक, ज़कात एक बकरी से दो सौ तक है, फिर ज़कात दो बकरियों की है। अगर ज़कात एक से तीन सौ तक बढ़ जाती है, तो ज़कात तीन बकरियों की है (ज़कात के अधीन नहीं) या दो भागीदारों से ज़कात इकट्ठा करना (जब तक कि प्रत्येक व्यक्ति द्वारा भुगतान की गई राशि कम न हो जाए)। और मैंने इसमें यह भी पाया कि ज़कात देने में, बूढ़े बकरे, बहरे बकरे, या पहाड़ी बकरियों को ज़कात के तौर पर नहीं लिया जाना चाहिए।

समर्थक हदीस :

इमाम इब्नु माजा : 1795, 1797
इमाम दरिमी : 1568