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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Diperlihatkan Neraka, penghuninya mayoritas wanita karena kufur terhadap suami

Imam Bukhari : 84

حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَاعِيلَ قَالَ حَدَّثَنَا وُهَيْبٌ قَالَ حَدَّثَنَا هِشَامٌ عَنْ فَاطِمَةَ عَنْ أَسْمَاءَ قَالَتْأَتَيْتُ عَائِشَةَ وَهِيَ تُصَلِّي فَقُلْتُ مَا شَأْنُ النَّاسِ فَأَشَارَتْ إِلَى السَّمَاءِ فَإِذَا النَّاسُ قِيَامٌ فَقَالَتْ سُبْحَانَ اللَّهِ قُلْتُ آيَةٌ فَأَشَارَتْ بِرَأْسِهَا أَيْ نَعَمْ فَقُمْتُ حَتَّى تَجَلَّانِي الْغَشْيُ فَجَعَلْتُ أَصُبُّ عَلَى رَأْسِي الْمَاءَ فَحَمِدَ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَثْنَى عَلَيْهِ ثُمَّ قَالَ مَا مِنْ شَيْءٍ لَمْ أَكُنْ أُرِيتُهُ إِلَّا رَأَيْتُهُ فِي مَقَامِي حَتَّى الْجَنَّةُ وَالنَّارُ فَأُوحِيَ إِلَيَّ أَنَّكُمْ تُفْتَنُونَ فِي قُبُورِكُمْ مِثْلَ أَوْ قَرِيبَ لَا أَدْرِي أَيَّ ذَلِكَ قَالَتْ أَسْمَاءُ مِنْ فِتْنَةِ الْمَسِيحِ الدَّجَّالِ يُقَالُ مَا عِلْمُكَ بِهَذَا الرَّجُلِ فَأَمَّا الْمُؤْمِنُ أَوْ الْمُوقِنُ لَا أَدْرِي بِأَيِّهِمَا قَالَتْ أَسْمَاءُ فَيَقُولُ هُوَ مُحَمَّدٌ رَسُولُ اللَّهِ جَاءَنَا بِالْبَيِّنَاتِ وَالْهُدَى فَأَجَبْنَا وَاتَّبَعْنَا هُوَ مُحَمَّدٌ ثَلَاثًا فَيُقَالُ نَمْ صَالِحًا قَدْ عَلِمْنَا إِنْ كُنْتَ لَمُوقِنًا بِهِ وَأَمَّا الْمُنَافِقُ أَوْ الْمُرْتَابُ لَا أَدْرِي أَيَّ ذَلِكَ قَالَتْ أَسْمَاءُ فَيَقُولُ لَا أَدْرِي سَمِعْتُ النَّاسَ يَقُولُونَ شَيْئًا فَقُلْتُهُ

हमसे कहिन [मूसा बिन इस्माइल] कहिन, हमसे कहिन [वुहैब] कहिन, हमका बताइन [हिस्याम] से [फातिमा] से [असमा] कहिन: जब उ नमाज पढ़त रहीं तब हम ऐसिया से मिलेन। यहिके बाद हम उनसे पूछेन: 'लोग का करत हैं?' ऐसिया ने आकाश के ओर इशारा किहिन। ई पता चला कि लोग सूर्य ग्रहण के समय प्रार्थना करत रहें। त आयशा कहिन: 'अल्लाह का महिमा'। हम फिर से पूछेन: 'बस एक संकेत?' फिर उ आपन माथा से इशारा किहिन, मतलब सहमति मा सिर हिलाइन। यहिसे हम प्रार्थना मा शामिल होइ गयेन लेकिन एक भ्रमित भावना पैदा भै, यहिसे हम आपन माथा पानी से डुबोयेन। अपने उपदेश में, पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने अल्लाह का स्तुति की और उन्हें पवित्र किया, फिर कहा: 'कुछ भी नहीं है जो मुझे नहीं दिखाया गया है, जब तक कि मैंने इसे जहाँ से मैं स्वर्ग और नरक तक नहीं देखा है, तब तक मुझ पर प्रकट हुआ: कि आप अपने कब्रों में निंदा से मारा जाएंगे जैसे - या लगभग निंदा के रूप में - जिसमें मैं खुद को नहीं जानता कि निंदा शामिल है' अल मसिहुद दज्जल का -; 'केहू से पूछा जाई -उनके कब्र मा-; 'तुम ई आदमी के बारे मा का जानत हौ?' जहाँ तक आस्थावान या मनई निश्चित हैं, -असमा' निश्चित नाहीं है कि दुइनौ मा से कौन सा मतलब है - जवाब देई: 'वह मुहम्मद हैं, अल्लाह के रसूल जे हमरे पास स्पष्टीकरण अऊर मार्गदर्शन लइके आए हैं। तौ हम स्वागत करत हैं अऊर हम अनुसरण करत हैं। ऊ मुहम्मद है,' ऊ तीन बार कहिस। तौ वहि मनई से कहा गा रहा: 'चैन से सो जा, सचमुच हम पहिले से जानित है कि तुम आस्थावान मनई हौ'। रही बात मुनाफिक लोगन या संदिग्ध लोगन के, -असमा' का यकीन नाहीं है कि दुइनौ मा से कौन से मतलब है-, जवाब देई; 'मुझे नहीं पता कि ऊ कौन है, हमने इंसानन का कुछ बात करत सुना है तो हमने कहा'।

Hadith Corroboration :

Imam Ahmad : 2576, 3202, 6195, 13897, 17441, 19131, 24815, 24910, 25128, 25688, 25724, 25725, 25752
Imam Bukhari : 28, 84, 178, 413, 703, 706, 993, 994, 1136, 2191, 4258, 6743
Imam Muslim : 114, 1500, 1508, 1509, 1510, 1512
Imam Abu Dawud : 996
Imam Tirmidzi : 2235
Imam Nasa'i : 1455, 2035
Imam Malik : 398, 399, 401