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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Dikumpulkan telanjang dan tidak dikhitan. firman AL-ANBIYA' ayat 104

Imam Bukhari : 6045

حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا غُنْدَرٌ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ الْمُغِيرَةِ بْنِ النُّعْمَانِ عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَقَامَ فِينَا النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَخْطُبُ فَقَالَ إِنَّكُمْ مَحْشُورُونَ حُفَاةً عُرَاةً غُرْلًا{ كَمَا بَدَأْنَا أَوَّلَ خَلْقٍ نُعِيدُهُ }الْآيَةَ وَإِنَّ أَوَّلَ الْخَلَائِقِ يُكْسَى يَوْمَ الْقِيَامَةِ إِبْرَاهِيمُ وَإِنَّهُ سَيُجَاءُ بِرِجَالٍ مِنْ أُمَّتِي فَيُؤْخَذُ بِهِمْ ذَاتَ الشِّمَالِ فَأَقُولُ يَا رَبِّ أَصْحَابِي فَيَقُولُ إِنَّكَ لَا تَدْرِي مَا أَحْدَثُوا بَعْدَكَ فَأَقُولُ كَمَا قَالَ الْعَبْدُ الصَّالِحُ{ وَكُنْتُ عَلَيْهِمْ شَهِيدًا مَا دُمْتُ فِيهِمْ إِلَى قَوْلِهِ الْحَكِيمُ }قَالَ فَيُقَالُ إِنَّهُمْ لَمْ يَزَالُوا مُرْتَدِّينَ عَلَى أَعْقَابِهِمْ

हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन बस्यार] हमसे कहिन है [घुंदर] हमसे कहिन है [स्युबाह] से [मुघिराह बिन नुमान] से [सैद बिन जुबैर] से [इब्नअब्बास] कहिन, पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बार हमरे बीच मा खड़ा होइके एक भाषण देत रहे, फिर कहिन:'तुम नंगे पैर इकट्ठा होइ गये रहे, अऊर अखतना, जबकि उ अल्लाह के वचन का उद्धृत किहिन 'जइसे हम शुरुआत बनाइन, वइसे हम ओका बहाल करत हैं' -QS. अनबिया' १०४-। सबसे पहिले जेका कपड़ा दीन गा रहा, उ इब्राहिम अलैहिसलाम रहा, अऊर ओका मोर कुछ लोगन के साथे लावा गा रहा, फिर ओनका बाईं ओर घसीट के लइ गा रहा, जेहिसे कि हम अचानक एक मोड़ लिहेन; 'हे रब्बी, मोर दोस्त के मदद करा, मोर दोस्त के मदद करा' लेकिन अल्लाह ने केवल जवाब दिहिस; 'तुम नाहीं जानत हौ कि वहिके बाद उइ का किहिन'। तौ मैं बस एक पुण्यवान सेवक के शब्दन के रूप मा कहत हउँ - जेकर मतलब है 'इसा-, 'अऊर जब मैं ओनके बीच रहा तब मैं ओनके गवाह रहा' श्लोक 'वास्तव मा तुम पराक्रमी हौ' -QS। अलमैदा 118-119-। इब्नू अब्बास कहिन, एक खबर रही कि बाद मा उइ धर्मत्याग करिन।

Hadith Corroboration :

Imam Ahmad : 1814, 1849, 1923, 1992, 15464, 23131, 23447
Imam Bukhari : 3100, 3191, 4259, 4371, 6043, 6044, 6045, 6046
Imam Muslim : 5102, 5103, 5104
Imam Tirmidzi : 2347, 3091
Imam Nasa'i : 2054, 2055, 2056, 2057, 2060
Imam Ibnu Majah : 4266
Imam Darimi : 2682