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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Doa dalam tahiyyat - 9: ALLAHUMMA INNI A'UDZUBIKA MINAL BUKHLI WA A'UDZUBIKA MINAL JUBNI ...
Imam Ahmad : 1535

حَدَّثَنَا رَوْحٌ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ عُمَيْرٍ قَالَ سَمِعْتُ مُصْعَبَ بْنَ سَعْدٍ يُحَدِّثُ عَنْ أَبِيهِ سَعْدِ بْنِ أَبِي وَقَّاصٍ أَنَّهُ كَانَ يَأْمُرُ بِهَذَا الدُّعَاءِ وَيُحَدِّثُ بِهِ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ الْبُخْلِ وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ الْجُبْنِ وَأَعُوذُ بِكَ أَنْ أُرَدَّ إِلَى أَرْذَلِ الْعُمُرِ وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ فِتْنَةِ الدُّنْيَا وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ

हमसे कहिन है [रौह] हमसे कहिन है [स्यूबाह] से [अब्दुल मलिक बिन उमैर] कहिन; हम [मुशब बिन सद] का [अपने पिता, सद बिन अबू वकाश] से बतावत सुने रहेन कि उ उनसे एक प्रार्थना पढ़ै का कहिन, एक प्रार्थना जवन उ पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से सुनाइन, अर्थात्; 'अल्लाहुम्मा इन्नी अउदजुबिका मीनल बुखली वा अउदजुबिका मीनल जुबनी वा अउदजुबिका एक उरदा इला अर्दजलील 'उमुरी वा अउदजुबिका मिन फिटनातिद दुनिया वा अउदजुबिक मुज़िलाबिला - अल्लाह, very मैं शरारती होय से तोहरे शरण लेत हउँ, अऊर कायर होवे से तोहरे शरण लेत हउँ, अऊर मैं वापस लौटे से तोहरे शरण लेत हउँ। एक नीच युग तक, अऊर मैं दुनिया के निन्दा से तोहरे शरण लेत हउँ अऊर मैं कब्र के यातना से तोहरे शरण लेत हउँ-'।

Hadith Corroboration :

Imam Ahmad : 365, 1500, 1535, 6446, 11670, 11722, 12368, 12603, 12658, 12695, 12756, 12826, 12886, 12937, 12987, 13036, 13282, 14975, 14976, 18503
Imam Bukhari : 2611, 4338, 5888, 5890, 5893, 5894, 5897, 5911
Imam Muslim : 4878, 4879, 4899
Imam Abu Dawud : 1316, 1317, 1330, 3458
Imam Tirmidzi : 3406, 3407, 3425, 3490, 3495
Imam Nasa'i : 5348, 5350, 5351, 5352, 5353, 5354, 5355, 5356, 5357, 5358, 5362, 5363, 5364, 5381, 5383, 5384, 5385, 5386, 5387, 5394, 5395, 5400, 5401, 5402, 5443
Imam Ibnu Majah : 3834