Doa dalam tahiyyat - 9: ALLAHUMMA INNI A'UDZUBIKA MINAL BUKHLI WA A'UDZUBIKA MINAL JUBNI ...
Imam Nasa'i : 5443
أَخْبَرَنَا وَاصِلُ بْنُ عَبْدِ الْأَعْلَى عَنْ ابْنِ فُضَيْلٍ عَنْ عَاصِمِ بْنِ سُلَيْمَانَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الْحَارِثِ قَالَكَانَ إِذَا قِيلَ لِزَيْدِ بْنِ أَرْقَمَ حَدِّثْنَا مَا سَمِعْتَ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَا أُحَدِّثُكُمْ إِلَّا مَا كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَدَّثَنَا بِهِ وَيَأْمُرُنَا أَنْ نَقُولَ اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ الْعَجْزِ وَالْكَسَلِ وَالْبُخْلِ وَالْجُبْنِ وَالْهَرَمِ وَعَذَابِ الْقَبْرِ اللَّهُمَّ آتِ نَفْسِي تَقْوَاهَا وَزَكِّهَا أَنْتَ خَيْرُ مَنْ زَكَّاهَا أَنْتَ وَلِيُّهَا وَمَوْلَاهَا اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ نَفْسٍ لَا تَشْبَعُ وَمِنْ قَلْبٍ لَا يَخْشَعُ وَمِنْ عِلْمٍ لَا يَنْفَعُ وَدَعْوَةٍ لَا تُسْتَجَابُ
हमका [वाशिल बिन अब्दुल अ'ला] से [इब्न फुदलैल] से [अशिम बिन सुलेमान] से [अब्दुल्लाह इब्नुल हरिथ] से रिपोर्ट करै के बाद उ कहिन; अगर ई [जैद बिन अरकाम] से कहा जात; 'रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से जो हदीस सुनी है, वह बताओ!'. त उ कहिन; 'मैं तोहका कुछौ नाहीं बताउब सिवाय कुछ अइसन चीज के जवन रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमसे कहिन अऊर उ हमका आदेश दिहिन -कहय-: 'अल्लाहुम्मा इन्नी अ'उदज़ु बीका मीनल 'अज्जी वाल कसली वाल बुखली वाल जुबनी वाल हरमी वाल 'अदज़ाबिया क़िर'। अल्लाहुम्मा आति नफसीई तक्वाहा वा जक्कीहा अन्ता खैरू मन जक्कहा अन्ता वलीयुहा वा मौलाहा। अल्लाहुम्मा इन्नी अ'उदज़ु बिका मिन नफसीन ला तसीबा' वा मिन कल्बिन ला यख्श्या' वा मिन 'इल्मिन ला यान्फा' वा द'वातिन ला तुस्ताजाबू -हे अल्लाह, मैं कमजोरी, आलस्य, कंजूस, कायरता, संवेदना अऊर यातना के गंभीरता से तोहरे शरण लेत हई। हे अल्लाह मेरी आत्मा को धर्मनिष्ठा दो, साफ कर दो काहे से कि आप सबसे अच्छा है जो इसे साफ करते है। तुम शासक अऊर मालिक हौ। हे अल्लाह, मैं तोहार शरण लेत हउँ एक अइसन आत्मा से जवन कभी संतुष्ट नाहीं होत है, एक अइसन दिल जवन विनम्र नाहीं होत है, जवन ज्ञान काम के नाहीं होत है अऊर जवन दुआ नाहीं सुनी जात है।
Hadith Corroboration :
Imam Ahmad : 365, 1500, 1535, 6446, 11670, 11722, 12368, 12603, 12658, 12695, 12756, 12826, 12886, 12937, 12987, 13036, 13282, 14975, 14976, 18503
Imam Bukhari : 2611, 4338, 5888, 5890, 5893, 5894, 5897, 5911
Imam Muslim : 4878, 4879, 4899
Imam Abu Dawud : 1316, 1317, 1330, 3458
Imam Tirmidzi : 3406, 3407, 3425, 3490, 3495
Imam Nasa'i : 5348, 5350, 5351, 5352, 5353, 5354, 5355, 5356, 5357, 5358, 5362, 5363, 5364, 5381, 5383, 5384, 5385, 5386, 5387, 5394, 5395, 5400, 5401, 5402, 5443
Imam Ibnu Majah : 3834